Senior Scientist, जौनपुरी, बनारसी, इलाहाबादी, खेती किसानी, राजनीति और ज्ञान विज्ञान!

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"Injustice anywhere is a threat to justice everywhere" ~ Martin Luther King Jr
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मीडिया में रिपोर्ट हो रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच इन 14 मुद्दों पर समझौता होने की संभावना है। अगर ये शर्तें सही हैं तो इसको पढ़िये और सोचिए कि इस युद्ध में किसकी हार हुई है। ———————————- शुक्रवार को ईरान-अमेरिका के बीच 14-सूत्रीय समझौता (MOU) पर हस्ताक्षर होने की संभावना 1. लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध का स्थायी और तत्काल अंत। 2. अमेरिका की प्रतिबद्धता कि वह ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा और इस्लामी गणराज्य ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा। 3. 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह हटाया जाएगा। 4. अमेरिका ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अपनी सैन्य उपस्थिति वापस लेने के लिए प्रतिबद्ध होगा। 5. ईरान द्वारा निर्धारित व्यवस्थाओं के तहत 30 दिनों के भीतर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा। 6. तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों को निलंबित किया जाएगा तथा ईरान को उनसे होने वाली वित्तीय आय तक पूर्ण पहुंच मिलेगी। 7.अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना प्रस्तुत करनी होगी। 8. परमाणु मुद्दों, अमेरिकी प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों तथा IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों पर अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की वार्ता होगी। 9. ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत परमाणु हथियार न बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। 10. वार्ता अवधि के दौरान अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत नहीं बढ़ाएगा और कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा। 11. अंतिम वार्ता के 60 दिनों के दौरान ईरान की जमी हुई 24 अरब डॉलर की संपत्ति जारी की जाएगी। इसका आधा हिस्सा वार्ता शुरू होने से पहले उपलब्ध कराया जाएगा। 12. समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक पर्यवेक्षण तंत्र बनाया जाएगा। 13. अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी। 14. अंतिम वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी जब तक कि ईरान की जमी हुई संपत्तियों का आधा हिस्सा जारी न हो जाए, तेल प्रतिबंध निलंबित न हो जाएं और नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त न कर दी जाए। अंतिम समझौता केवल संवर्धित परमाणु सामग्री और संवर्धन, प्रतिबंधों में राहत तथा ईरान की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण कार्यक्रम तक सीमित रहेगा। नोट: ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिरोधी समूहों (Resistance Groups) को समर्थन देने से जुड़े मुद्दों को वार्ता के एजेंडे से पूरी तरह हटा दिया गया है।
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इस बार ईरान के मीडिया ने भी कन्फर्म किया है।
Iranian media confirms that a US-Iran peace deal has been reached Now that Tehran is reporting it, we know it is real.
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ग़ज़ब दुनिया चल रही है। ट्रम्प ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीज़फायर और डील की घोषणा की थी। अमेरिका और ईरान के बीच डील की घोषणा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने की है।
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लोग सवाल उठा रहे हैं कि अमेरिकी हमले में मारे गए भारतीयों पर मोदी कोई बयान क्यों नहीं दे रहे। लेकिन सच यह है कि मोदी बोलने की स्थिति में हैं ही नहीं। पिछले बारह वर्षों में भारत की विदेश नीति को इस तरह संचालित किया गया कि वह अमेरिका के सामने स्वतंत्र रूप से मुंह खोलने में असमर्थ हो गई। देश की कूटनीति एक-दो कॉर्पोरेट घरानों के व्यापारिक हितों और ठेके दिलवाने तक सिमट कर रह गई। अडानी के व्यावसायिक हित अमेरिका से गहराई से जुड़े हैं। अभी वे भारी भुगतान करके अमेरिका में उनके ऊपर चल रहे धोखाधड़ी के मुकदमे से पिंड छुड़ाया हैं। ऐसे में यदि अमेरिका से संबंध बिगड़ते हैं, तो अडानी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। और जहाँ अडानी का नुकसान हो, वहाँ मोदी का बयान नहीं आयेगा। मोदी के लिए असली संकट यह है कि गोदी मीडिया के ज़रिए वर्षों से यह प्रोपेगेंडा फैलाया गया कि भारत अब एक “विश्वगुरु” और महाशक्ति बन चुका है। जबकि हकीकत में भारत अलग थलग पड़ गया है। लेकिन जब अपने नागरिकों की मौत पर सरकार मौन साध लेती है, तो उनके अपने समर्थक भी सवाल उठाने लगते हैं। हालाँकि मोदी का अगला कदम सबको पता है गोदी मीडिया के माध्यम से ध्यान भटकाओ, नया मुद्दा उछालो। इसमें उन्हें महारत हासिल है। लेकिन इस बार झूठ की परतें खुल रही हैं। और एक-एक परत के साथ सवाल और गहरे होते जा रहे हैं।
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अंग्रेज़ों की गलती है ल। वे ब्रिटिश भारत में फ़ुटबॉल नहीं खेलते थे, केवल क्रिकेट खेलते थे।
🚨Sunil Chhetri Reveals Why India Is Still Missing the Fifa World Cup2026🚨 Reporter 🗣️: Why is India unable to qualify for the FIFA World Cup every time? Sunil Chhetri 🗣️ India doesn't fail to qualify for the World Cup because of a lack of talent. The real problem is that we are not yet a true sporting nation. We do not identify and nurture talent at the right age and through the right system. With a population of 1.5 billion, countless talented children never get discovered or developed. Countries like the United States, France , Germany, Argentina , and Brazil succeed because they have strong systems that scout talent early and provide the best coaching, facilities, and support. The day India builds a nationwide structure where every talented child can be identified, nurtured, and given the right opportunities, we will not only improve in football but in every sport. Talent is not the issue—the system is.
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महाशय घास का सत्यानाश कर रहे हैं, इन्हें ट्रेनिंग की ज़रूरत है। ज़्यादातर भारतीयों को शिकायत रहती है कि पश्चिमी देशों में उन्हें अपने काम ख़ुद करने पड़ते हैं, क्योंकि यहाँ शोषण के लिए सस्ता श्रम उपलब्ध नहीं है। जबकि सही क़ीमत पर सब सर्विस उपलब्ध होता है।

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मोदी की विदेशों में होने वाली प्रायोजित रैलियों में बाकायदा खाने के पैकेट और आने-जाने की परिवहन व्यवस्था तक उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन सवाल यह है कि इसका खर्च आखिर कौन उठाता है? नोट: ये वीडियो मोदी के 2023 के अमेरिका यात्रा के दौरान का है।

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ये समाज की ज़िम्मेदारी है कि बच्चों को एपस्टीन फ़ाइल में नामित लोगों से दूर रखें।
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चंदा चोरी के मामले में मीडिया जानबूझकर छोटी मछलियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जबकि चोरी किए गए चंदे के पैसे का भाजपा/आरएसएस के बड़े नेताओं के बीच बंदरबांट हो रही है।
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चपत राय एक छोटी मछली है। चंदा चोरी के पैसे का भाजपा/आरएसएस बड़े नेताओं में बंदर बांट चल रहा है।
चंपत राय ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा क्यों नहीं दिया? राम मंदिर के चढ़ावे में डकैती का मामला है, चंपत राय को कौन बचा रहा है ? एक मिनट, कहीं ऐसा तो नहीं कि चंपत राय किसी को बचा रहे हैं । ED, NIA, CBI का जैकेट पहन कर किसी विपक्षी नेता के घर के बाहर दिखने वाली टीम कहाँ है? ED का छापा क्यों नहीं पड़ा? डकैती की पुष्टि होते ही FIR क्यों नहीं हुई? कैश बरामद करन वाले कौन थे? अयोध्या में कितनी ज़मीन की ख़रीद बिक्री कैश में हुई है? सबका हिसाब कौन देगा?
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जातिवादी मीडिया बोलचाल की भाषा भी तय करती है। चंदा चोरी को चढ़ावा कांड लिख रहा है।
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हाल ही में अमेरिका से भारत लौटे एक एनआरआई का यह पत्र पढ़िए और सोचिए ज्यादातर एनआरई लोग विदेशों में प्रायोजित मोदी की रैलियों में “मोदी-मोदी” के नारे लगाते हैं, लेकिन मोदी के शासन वाले नये भारत में रहना नहीं चाहते। ————— अमेरिका में 13 साल रहने के बाद भारत लौटा (H-1B समाप्त हो गया) और बहुत संघर्ष कर रहा हूँ। किसी दूसरे देश में जाने के लिए मेरे पास क्या विकल्प हैं? नमस्ते सभी को, मैं हाल ही में 13 साल अमेरिका में रहने के बाद भारत वापस लौटा हूँ क्योंकि मेरा H-1B वीज़ा समाप्त हो गया था। फिलहाल मैं एक टियर-2 शहर में रह रहा हूँ और सच कहूँ तो रिवर्स कल्चर शॉक और यहाँ की व्यवस्थागत चुनौतियाँ मुझे काफी प्रभावित कर रही हैं। बुनियादी ढाँचे से जुड़ी समस्याएँ: रोज़ाना 4–5 घंटे (कभी-कभी 8 घंटे तक) बिजली कटौती होती है। मेरा पावर बैकअप केवल 2–3 घंटे ही चल पाता है। जीवन की गुणवत्ता: भीषण गर्मी से जूझना पड़ रहा है। मच्छरों की समस्या लगातार बनी रहती है। अव्यवस्थित ट्रैफिक और खराब वायु गुणवत्ता ने जीवन को काफी थका देने वाला बना दिया है। मैं सक्रिय रूप से किसी ऐसे देश में बसने की योजना बना रहा हूँ जहाँ अंततः नागरिकता प्राप्त करने का अवसर हो। मेरे पास पहले से मास्टर डिग्री है और मैं दोबारा F-1 स्टूडेंट वीज़ा की प्रक्रिया से नहीं गुजरना चाहता। समुदाय से मेरा प्रश्न: क्या अनुभवी आईटी पेशेवरों के लिए ऐसे कोई अन्य व्यावहारिक वीज़ा विकल्प या रास्ते हैं, जिनके माध्यम से वे बिना H-1B लॉटरी प्रणाली से दोबारा गुज़रे किसी दूसरे देश में कानूनी रूप से जाकर काम कर सकें? ऐसे लोगों के सुझाव, अनुभव और सलाह का स्वागत है जिन्होंने इस तरह की परिस्थितियों का सामना किया हो। धन्यवाद।
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हिंदुस्तान टाइम्स ने खबर भी बनाया है।
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सनातनी एनआरआई कह रहा है कि उन तीन भारतीयों ने दुःसाहस किया, इसलिए मारे गए।
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मोदी हमले की निंदा में एक ट्वीट तक करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, लेकिन उनके समर्थक टीवी स्टूडियो में बैठकर परमाणु युद्ध की डींगें हाँक रहे हैं।
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अमेरिकी नौसेना के हमलों में तीन भारतीयो के मौत पर भारत और अमेरिका के बयान के बीच के अंतर को देखिये। ——- भारत का बयान: अमेरिकी नौसेना के हमलों में तीन लोगों की मौत पर हम कड़ा विरोध दर्ज कराते हैं। इस प्रकार की घातक सैन्य कार्रवाई उचित नहीं है। अमेरिका का बयान: वाणिज्यिक जहाज़ों को अमेरिकी बलों के निर्देशों का तुरंत पालन करना चाहिए। ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों/नाकेबंदी का कोई भी उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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बताइये ईश्वर के नाम पर चन्दा चोरी करने वाले लोग दूसरे लोगों को धर्म विरोधी बताते हैं। पूर्वांचल में कहावत है कि “सच में कलजुग चलत बा”
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देश गोबर युग में प्रवेश कर चुका है।😊
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पूरे प्रोजेक्ट के उद्देश्य के बारे में पुजारी बाबा लाल दास ने दशकों पहले विस्तार से बताया था।
इस समय अयोध्या मंदिर में चंदा चोरी का मामला सुर्खियों में है। राम जन्मभूमि के पहले पुजारी बाबा लाल दास को सुनिए। उन्हें 1981 में लखनऊ उच्च न्यायालय द्वारा रामजन्मभूमि के पुजारी के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने वर्षों पहले इस विषय पर विस्तार से अपनी बातें रखी थीं। बाबा लाल दास की 1993 में हत्या कर दी गई थी।
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इस समय अयोध्या मंदिर में चंदा चोरी का मामला सुर्खियों में है। राम जन्मभूमि के पहले पुजारी बाबा लाल दास को सुनिए। उन्हें 1981 में लखनऊ उच्च न्यायालय द्वारा रामजन्मभूमि के पुजारी के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने वर्षों पहले इस विषय पर विस्तार से अपनी बातें रखी थीं। बाबा लाल दास की 1993 में हत्या कर दी गई थी।
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इनका नेता स्वयं महिलाओं के लिए ‘जर्सी गाय’, ‘करोड़ों की गर्लफ्रेंड’ और ‘शूर्पणखा’ जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करता है, तो उसके समर्थकों से बेहतर व्यवहार की क्या उम्मीद की जा सकती है?
Here are the accounts who initially tweeted about Akhilesh Yadav's daughter. Both have deleted their accounts now.
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