भीकाजी कामा ने दिखाया कि असली ताक़त गरज में नहीं, विनम्रता और दृढ़ता में है।
इसीलिए आज भी उनका नाम,
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की मिट्टी में सुगंध बनकर बसता है।
उनकी जयंती पर याद रखें:
धर्म की असली गूंज शोर में नहीं,
बल्कि शांत और अटल कर्म में होती है।