Hustle in silence and let your success make the noise

Joined July 2010
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भारत में केवल दो ऐसे व्यक्ति थे जो 2014 के बाद सत्ता का विरोध करने का साहस रखते थे। एक जुबिन गर्ग थे, जो अब नहीं रहे, और दूसरे खान सर हैं... मुझे ऐसा लगता है कि उन्हें भी अब चुप करा दिया गया है।
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जिस गुरु ने लाखों घरों में उम्मीद का चिराग जलाया, आज उसी के संस्थान पर हमला हुआ है। शिक्षा के मंदिर में यह अराजकता सरकार की विफलता का काला चेहरा है। बहुत हुआ, अब न्याय चाहिए! #JusticeForKhanSir
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रुपये के लगातार कमज़ोर होने से देश का कर्ज और आयात बिल दोनों बढ़ रहे हैं। यह स्थिति आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह से विफलता को दर्शाती है। प्रचार तंत्र चाहे जितना चिल्लाए, देश की गिरती करेंसी सरकार के दावों की पोल खोल रही है।
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साहेब का नया मास्टरस्ट्रोक! जो फौज दुश्मनों के छक्के छुड़ाती थी, वो अब पेपर लीक माफिया से निपटेगी। देश को सेना दी थी रक्षा के लिए, और सरकार ने उन्हें परीक्षा का चौकीदार बना दिया। हद है! #NEET
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देश की हालत देखकर रोना आ रहा था, फिर मैंने सोचा जब पूरी दुनिया ही सर्कस है, तो जोकर बनकर रोने से अच्छा है, दर्शक बनकर जोर-जोर से हँसा जाए!
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नेताओं के बच्चे विदेशों में ऐश कर रहे हैं, और हमारे बच्चे NEET पेपर लीक के सदमे में खुदकुशी कर रहे हैं! ट्रेनों-बसों में धक्के खाकर परीक्षा देने वाले गरीब छात्रों के आंसुओं का हिसाब कौन देगा?
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देश में भीषण लू चल रही है, गरीब पानी की बूंद-बूंद को मोहताज है और बिजली कटौती से त्राहि-त्राहि मची है। लेकिन धन्य है हमारा मीडिया, जो एसी (AC) कमरों में बैठे मंत्रियों को 'ज्यादा पानी पीने' की शाही सलाह को देश की सबसे बड़ी खबर बता रहा है। यह तमाशा बंद करो!
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गोदी मीडिया के दम पर देश में झूठा विकास दिखाया जा रहा है। असलियत यह है कि अस्पतालों में दवाएं नहीं हैं, स्कूलों की हालत खराब है और बुनियादी सुविधाएं ठप हैं। सच को कब तक छुपाओगे?
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इतिहास गवाह है कि केवल नारे लगाने और विदेश यात्राएं करने से कोई वैश्विक नेता नहीं बनता। जब शिक्षा और समझ का अभाव हो, तो नीतियां ऐसी ही दिशाहीन हो जाती हैं। साहब ने देश को कर्ज में डुबोया और खुद दुनिया की सैर करते रहे। 🤬
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पहले भारत की अर्थव्यवस्था की तुलना चीन और फ्रांस से होती थी। फिर 2014 आया ।।। वोर हम हिंदू अचानक जाग गये, अब भारत की अर्थव्यवस्था की तुलना बांग्लादेश और नेपाल से होती है!!
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देश हित में उठाएं गए इस फैसले का स्वागत करता हूं 🫡
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अब बस इंतजार है उस दिन का जब कहा जाएगा एक टाइम खाना कम खाइए… देशहित में।
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संविधान निर्माताओं ने भारत को विविधताओं का देश माना था। एक समान कानून थोपना बाबासाहेब आंबेडकर के समावेशी भारत के सपने के खिलाफ है। हम अपनी सांस्कृतिक आज़ादी से समझौता नहीं करेंगे। #SaveAmbedkarConstitution #UCCVirodh
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मौन सिर्फ मानसिक शांति या आत्म-मंथन के लिए कुछ पल के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन दुनिया को बदलने, न्याय पाने, रिश्ते बचाने और तरक्की करने के लिए शब्दों, तर्कों और आवाज़ की ही ज़रूरत होती है। इसलिए, "सारे उत्तर मौन में नहीं, बल्कि सही संवाद में मिलते हैं।
May 26
कुछ उत्तर केवल मौन में ही मिलते हैं।
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चंद रुपयों के लिए बिकती सुर्खियाँ और खोखले वादे करते नेता,यही आज की कड़वी सच्चाई है। लेकिन सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि जनता इस तमाशे को देखकर भी गहरी नींद में सोई है। यह चुप्पी बहुत भारी पड़ेगी।
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₹1-2 बढ़ाकर जनता के सब्र का इम्तिहान क्यों ले रहे हो? सीधे ₹300 कर दो! कम से कम रोज-रोज का सिरदर्द तो खत्म हो। गरीबों को मुफ्त राशन का झांसा देकर मध्यम वर्ग की खाल खींची जा रही है। जनता सब देख रही है और वक्त आने पर जवाब देगी।
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जिस देश में विपक्ष को गाली देना और सत्ता की कमियों पर पर्दा डालना ही देशभक्ति मान लिया जाए, वहाँ लोकतंत्र नहीं बचता। भाषा की मर्यादा खोकर हम कैसा सभ्य समाज बना रहे हैं? सोचिए।
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जो सत्ता में कभी रहा ही नहीं, उसे हर नाकामी का जिम्मेदार बताना कहाँ का न्याय है? नफरत और ट्रोलिंग के चश्मे को उतारिए, सवाल हमेशा सत्ता में बैठे लोगों की नीतियों से होना चाहिए।
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UAE के मुसलमानों से प्यार, भारत के मुसलमानों से तकरार।" बाहर गले मिलना और घर में नफरत की राजनीति करना, इसे ही ढोंगापन कहते हैं यार। सत्ता के लिए अपनों को पराया और परायों को अपना बनाना कहाँ का इंसाफ है?
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