आपके पास तो पूरा समाज पड़ा है शिक्षा देने के लिए,मगर आप अलग डगर पर अलग ही राग अलापती रहती हैं।पता नहीं कौन सा एग्रीमेंट साइन कर लिया है आपने?
पितृसत्ता को जब चोट लगती है तो वो धार्मिक बँटवारे का सहारा लेती है। ये ट्वीट किसी भी तरह हिंदू धर्म पर टिप्पणी नहीं है बल्कि उस सोच पर है जो एक महिला को उसकी मर्ज़ी का जीवन जीने, जीवनसाथी चुनने के अधिकार से वंचित करती है, और महिला के शरीर व sexuality पर क़ब्ज़ा चाहती है।