ईरान की छात्रा का मामला आज सुर्खियों मे है। अलग अलग लोगों के अलग अलग राय है। अलग अलग न्यूज़ चैनल अलग अलग खबर बता रहे हैं। कुछ का कहना है कि उस छात्रा के साथ हिजाब सही से पहनने को लेकर सख़्ती किया गया और उसके विरोध में उसने ऐसा कदम उठाया,
हालाँकि कुछ कहना है कि लड़की की ग़लती है, छात्रा का इरादा ही कुछ ऐसा था कि उन्हे हिजाब से दिक्कत है और वो प्रोटेस्ट करना चाहती थी, इस घटना से पहले ही वो यूनिवर्सिटी कैंपस में या क्लासरूम में वीडियो बना रही थी और कह रही थी की मै सब लड़कियों को बचाने आई हूं। इस बात को लेकर कहा सुनी हुई फिर उसने ऐसा कदम उठाया।
मामला जो भी हो, लड़की की गिरफ्तारी हो चुकी है, बहुत से लोग तो इस बात को फैला रहें कि लड़की को मार भी दिया गया, हालांकि मेन स्ट्रीम मीडिया से इसकी जानकारी नही साबित हो रही। अच्छी बात ये है कि ईरान के मीडिया में भी उस छात्रा के लिए सही से न्यायिक प्रक्रिया अपनाने और उसे वकील मुहैया कराने की बात चल रही।
गलती सिर्फ लड़की की या फिर सिर्फ यूनिवर्सिटी गार्ड्स की नही होगी। कही न कहीं आवेश में या जैसे भी गलती सब से हुई है। वहां पर हिजाब और पर्दे के लिए जो सिस्टम बनाये गए हैं वो फॉलो करना चाहिए, कोई भी सभ्य समाज उस तरीके के प्रदर्शन से सहमत नही होगा। अगर वैसा प्रदर्शन किसी लोकतंत्र के देश में होगा तो वहां की पुलिस का रवैया भी कठोर ही होगा। पर्दा बुरी रिवाज़ नही है, कोई भी सभ्य समाज नंगेपन को पसंद नही करता। उस वीडियो में बाकी छात्राओं को देखकर ऐसा तो नही लगता कि हिजाब में पुरा ढकना है, सभी कम्फरटेबल दिख रहें हैं।
लेकिन सबसे अहम ये कि हज़ारों मील दूर बैठकर हमलोग ये सही गलत का फैसला नही कर सकते, हां ये आवाज उठाने मे कोई बुराई नही की किसी पर ज्यादती नही होनी चाहिए। लेकिन यहाँ कोई लड़की को गाली दे रहा कोई ईरान के सिस्टम को।