महिला पुलिस ने ग्रामीणों के मोबाइल छीने और विडियो डिलीट करवा दिया
बिजावर | छतरपुर
बिजावर क्षेत्र के ग्राम उदयपुरा में शासकीय भूमि और वन क्षेत्र को लेकर ऐसा घमासान मचा है कि पेड़, प्लॉट, पुलिस और प्रशासन सब एक ही कहानी के किरदार बन गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग से लगी शासकीय भूमि पर पहले हरे-भरे पेड़ों की कटाई हुई, फिर जमीन को प्लॉटिंग में बदल दिया गया और केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित आदिवासी परिवारों को कथित रूप से 50-50 हजार रुपए लेकर प्लॉट बेच दिए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर कभी बच्चे क्रिकेट खेलते थे, मवेशी चरते थे और पेड़ पर्यावरण बचाते थे, वहां अब प्लॉटों की लाइनें खिंच गई हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब पेड़ कट रहे थे और जमीन पर कब्जे की तैयारी चल रही थी तब जिम्मेदार विभागों की नजर आखिर कहां थी?
फोन बजते रहे, अफसर नहीं पहुंचे!
ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने कई बार वन विभाग को सूचना दी, लेकिन टीम मौके पर नहीं पहुंची। आरोप है कि जब तक पेड़ कटकर जमीन प्लॉटों में तब्दील नहीं हो गई, तब तक कार्रवाई नजर नहीं आई। बाद में जब वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची तो मामला और गर्मा गया।
वीडियो बनाने पर मोबाइल छीने जाने का आरोप
गांव वालों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान पुलिस और वन अमले ने ग्रामीणों के साथ अभद्र व्यवहार किया। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि जब उन्होंने घटनाक्रम का वीडियो बनाना चाहा तो मोबाइल फोन छीन लिए गए और वीडियो डिलीट करवा दिए गए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बाढ़ का खतरा भी बड़ा सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि उदयपुरा गांव श्यामपुरी नदी के किनारे बसा है और बरसात में नदी उफान पर आती है। ऐसे में यदि विस्थापित परिवारों को इसी क्षेत्र में बसाया जा रहा है तो भविष्य में बाढ़ का खतरा उनके लिए नई परेशानी खड़ी कर सकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विस्थापित आदिवासियों को स्थायी और सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए।
ग्रामीणों का तंज
ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह जमीन वास्तव में शासकीय और वन क्षेत्र से जुड़ी है तो फिर प्लॉटिंग कैसे हो गई? और यदि सब कुछ वैध है तो पेड़ों की कटाई किस अनुमति से हुई? गांव में चर्चा है कि जंगल गायब होने में जितनी तेजी लगी, उतनी तेजी शिकायतों पर कार्रवाई में नहीं दिखी।
प्रशासन से मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग और राजस्व अधिकारियों से शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण की जांच, पेड़ों की कटाई की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
नोट: समाचार में शामिल आरोप ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन और बयानों पर आधारित हैं। आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हो सकेगी।