रेल मंत्री जी , सवाल बहुत सीधा है।
15 साल बाद भी ट्रेन लेट होने की समस्या जस की तस है।
तत्काल टिकट बुकिंग आज भी टिकट कम और डिजिटल जुआ ज्यादा लगती है।
IRCTC पर लॉगिन , CAPTCHA, OTP, पेमेंट और सीट - सब भगवान भरोसे चलते हैं।
स्टेशन और ट्रेनों में फूड वेंडर मनमानी करते हैं।
कभी ओवरचार्जिंग, कभी खराब क्वालिटी, कभी बिल नहीं - लेकिन कार्रवाई सिर्फ पोस्टर और ऐप में दिखती है।
देश की आबादी बढ़ती रही, यात्री बढ़ते रहे, लेकिन ट्रेन और सीटों का अनुपात उसी पुराने हिसाब में अटका पड़ा है।
त्योहारों पर जनता इंसान कम और मालगाड़ी का सामान ज्यादा महसूस करती है।
सवाल यह है कि जब ट्रेन समय पर नहीं चल रही , टिकट समय पर नहीं मिल रहा , खाना सही दाम पर नहीं मिल रहा और यात्रियों के लिए पर्याप्त ट्रेनें नहीं हैं, तो 2047 का विकसित भारत किस प्लेटफॉर्म से छूटेगा?
रेल मंत्री जी, देश को सिर्फ वंदे भारत की फोटो नहीं चाहिए।
देश को समय पर ट्रेन , आसान टिकट, साफ खाना, सुरक्षित सफर और पर्याप्त सीटें चाहिए।
कृपया बताइए - हम 2047 के बाद अचानक विकसित होंगे, या उससे पहले भी आम यात्रियों के अच्छे दिन आने का कोई chance है?
आपका नाम अश्विनी वैष्णव है।
आप रेल मंत्री हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर “रील मंत्री” के नाम से ज्यादा फेमस हैं।
अब आपने भरोसा दिलाया है कि IRCTC की खराब वेबसाइट 30 दिनों में अपडेट हो जाएगी।
वही IRCTC, जहां टिकट से पहले यात्री CAPTCHA से कुश्ती लड़ता है।
वही IRCTC, जहां तत्काल बुकिंग 10 बजे शुरू होती है और उम्मीद 10:01 पर दम तोड़ देती है।
वही IRCTC, जहां लॉगिन फेल, OTP लेट, पेमेंट हैंग, पैसा कट और अंत में नतीजा - वेटलिस्ट या रिग्रेट।
पिछले 3,037 दिनों से यात्री वेबसाइट पर बुलेट ट्रेन नहीं मांग रहे।
वे बस इतना चाहते हैं कि टिकट बुक करते समय सिस्टम इंसानों जैसा काम करे , सरकारी दफ्तर जैसा नहीं।
डिजिटल इंडिया में एक ट्रेन टिकट बुक करना अगर UPSC प्रीलिम्स जैसा लगने लगे , तो समस्या यात्री की नहीं , सिस्टम की है।