पंचकूला के खैर जंगल में रातोंरात हजारों पेड़ों की कटाई, सबूत मिटाने को तनों तक जला दिए गए। सच उजागर करने वाले पुलिसकर्मी सस्पेंड और सरकार मौन। क्या यही पर्यावरण नीति है? जवाब दें राव नरवीर सिंह—जंगल बचेंगे या भ्रष्टाचार?
@RaoNarbir
चैनत (हांसी) गांव में पानी के लिए लोग कई दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
एक बुजुर्ग की पीड़ा सुनिए,
धोती पहनने वाली हमारी पीढ़ी ने कभी भाजपा को हरियाणा में नहीं आने दिया। पेंट पहनने वाली पीढ़ी उसे लेकर आई, अब प्रदेश उसकी कीमत चुका रहा है।
#NitinGadkari भट्ठा बिठाने पे तुले हैं देश की गाड़ियों का. इनका महकमा सड़क परिवहन का है और चाबुक पेट्रोलियम मिनिस्टर वाला चला रहे हैं
अप्रैल 2023 से पहले की कोई गाड़ी E20 के लिए सक्षम नहीं है , उस बावजूद जबरदस्ती आदेश थोप दिए गए जनता पे ..!
@nitin_gadkari
मुख्यमंत्री जी अपनी ही सरकार का रिपोर्ट कार्ड पढ़ रहे हैं!
बेरोजगारों पर लाठीचार्ज, किसानों पर लाठीचार्ज, कर्मचारियों पर लाठीचार्ज, महिलाओं पर लाठीचार्ज।👇
एक तरफ़ भाजपा कह रही है कि डीज़ल बचाओ, दूसरी तरफ़ उनकी नई प्रदेश अध्यक्ष 18 दिन तक पूरे हरियाणा में अपना स्वागत करवाएंगी।
यही है भाजपा का 'एक देश, दो नियम' मॉडल।"
दोनों आदेश 👇
"ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" का दावा था, लेकिन हरियाणा में तो हाल ये है कि जंगल खा लिए गए और सच बोलने वालों का करियर!
माफिया बेखौफ, ईमानदार अफसर सस्पेंड—यही है "ज़ीरो टॉलरेंस" का भाजपाई मॉडल?
हांसी में जिम संचालक को 10 गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। प्रदेश में आए दिन हत्या, लूट और गैंगवार की घटनाएं हो रही हैं। कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। सत्ता चालक अवैध कॉलोनियां काटने में व्यस्त है और मुख्यमंत्री पंजाब में।
हरियाणा को आखिर कौन संभाल रहा है?
पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना क्या अब अपराध है?
युवाओं के भविष्य की लड़ाई लड़ने जंतर-मंतर पहुंची रोहतक की गेस्ट टीचर सुलेखा दलाल को निलंबित कर दिया गया। सवाल यह है कि दोषी पेपर माफिया हैं या उनके खिलाफ आवाज उठाने वाले? युवाओं के हक की लड़ाई को दबाने की हर कोशिश लोकतंत्र पर चोट है।
रोहतक के डी-पार्क में हुआ भीषण अग्निकांड अपने पीछे तबाही का मंजर छोड़ गया। हादसे में कई परिवारों ने अपनों को खोया, जबकि वर्षों की मेहनत और आजीविका पलभर में राख हो गई।
इस दुखद घटना ने एक बार फिर आपदा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नेहरू का कद साल, महीने और दिन गिनकर नहीं मापा जा सकता। आज़ादी के बाद गरीबी, चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने संस्थानों, लोकतंत्र और भाईचारे की नींव रखी। नफ़रत नहीं, राष्ट्र निर्माण उनकी पहचान थी। प्रचार से नहीं, काम से इतिहास बनता है।
2016 में उज्ज्वला के नाम पर साल में 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर का वादा किया गया था। आज पहले 9 और अब सिर्फ 4 रह गए। गैस के दाम आसमान पर, सब्सिडी ज़मीन में दफन।
वादा राहत का था, लेकिन भाजपा सरकार ने गरीब परिवारों के खर्च और मुश्किलें दोनों बढ़ाने का काम किया है।
राजनीति में पहचान पद से नहीं,ऐसे ही मौकों से बनती है। जब हालात कठिन हों, दबाव हो और फिर भी कोई पीछे हटने के बजाय युवाओं के साथ खड़ा दिखाई दे,तो लोग खुद तय कर लेते हैं कि उनकी आवाज़ कौन उठा रहा है।
बाकी, तस्वीरें सबने देखी हैं।
@DeependerSHooda जैसे नेताओं की जरूरत हरियाणा को है।