करेक्शन –अशोक पाठक सातरोड हिसार में रहता था ना कि फरीदाबाद
दोस्तों हम आज बात कर रहे है वेब सीरीज 'पंचायत' में बिनोद का किरदार निभाने वाले अभिनेता अशोक पाठक की। पर्दे पर 'देख रहा है न बिनोद' कहकर मशहूर होने वाले इस कलाकार की असली जिंदगी का संघर्ष किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
अशोक पाठक की वास्तविक जीवन यात्रा और उनके कड़े संघर्ष की कहानी आपके रोंगटे खड़े कर देगी।
बिहार से हरियाणा का सफर और तंगहाली
अशोक पाठक मूल रूप से बिहार के खगड़िया जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले हैं। जब वह काफी छोटे थे, तब उनका परिवार आर्थिक तंगी के कारण बिहार छोड़कर हरियाणा के फरीदाबाद में आकर बस गया। उनके परिवार की माली हालत इतनी खराब थी कि शुरुआती दिनों में बुनियादी जरूरतों के लिए भी बहुत संघर्ष करना पड़ा। फिल्मी दुनिया में आने से पहले अशोक ने पेट भरने के लिए हर छोटा-बड़ा काम किया। वह फरीदाबाद की सड़कों और बाजारों में अपने पिता और भाइयों के साथ रुई (कपास) बेचने का काम करते थे। कई बार उन्होंने ठेले पर सामान भी बेचा। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने किसी तरह अपनी स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की।
कॉलेज के दौरान अशोक का रुझान अभिनय की तरफ हुआ। उन्होंने फरीदाबाद और दिल्ली के थिएटर ग्रुप्स में काम करना शुरू किया। जब एक्टिंग का भूत पूरी तरह सवार हो गया, तो करीब 11-12 साल पहले वह सिर्फ कुछ हजार रुपये लेकर मुंबई (सपनों की नगरी)पहुंच गए। मुंबई में भी शुरुआती कई साल उन्हें कड़े संघर्ष, रिजेक्शन और 'कास्टिंग काउच' जैसी दिक्कतों का सामना करते हुए गुजारने पड़े।
मुंबई में रहने के दौरान कई बार उनके पास कमरे का किराया देने और ठीक से दो वक्त का खाना खाने तक के पैसे नहीं होते थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
'पंचायत' से पहले अशोक पाठक ने कई फिल्मों और वेब सीरीज में छोटे-मोटे किरदार निभाए। आपने उन्हें, फिल्म 'शमिताभ' (अमिताभ बच्चन स्टारर), सेक्रेड गेम्स (वेब सीरीज), 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' और 'फुकरे रिटर्न्स' जैसी फिल्मों में बहुत छोटे रोल्स में देखा होगा। वह सालों तक इंडस्ट्री में एक अदद पहचान के लिए तरसते रहे।
साल 2020-2022 के दौरान जब पंचायत सीजन 'रिलीज हुआ, तो अशोक पाठक की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। सीरीज में उनका किरदार 'बिनोद' और उनका डायलॉग "देख रहा है न बिनोद, कैसे अंग्रेजी बोल के बहकाया जा रहा है..."इंटरनेट पर इस कदर वायरल हुआ कि वह रातों-रात एक ग्लोबल मीम मटीरियल और स्टार बन गए।
आज अशोक पाठक को किसी पहचान की जरूरत नहीं है। जिस लड़के ने कभी सड़कों पर रुई बेची थी, आज वह अपनी बेहतरीन अदाकारी के दम पर ओटीटी (OTT) की दुनिया का एक सम्मानित चेहरा बन चुका है। उनका यह सफर सिखाता है कि अगर हुनर और सब्र हो, तो वक्त बदलते देर नहीं लगती।