भाजपा सरकार का 'भर्ती कैलेंडर' महज एक कागजी छलावा और प्रदेश के लाखों युवाओं के साथ किया गया एक क्रूर मजाक साबित हुआ है।
एक तरफ सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए समय पर भर्तियां कराने का दंभ भरती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि समान पात्रता परीक्षा (CET) के आयोजन में विफलता के कारण आज प्रदेश के 20 लाख से अधिक बेरोजगार युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। पिछली पात्रता की अवधि समाप्त हो चुकी है और नई परीक्षा का कोई अता-पता नहीं है, जिसके चलते कांस्टेबल और ग्राम विकास अधिकारी जैसी 23 महत्वपूर्ण नई भर्तियां अब सीधे एक साल के लिए अटक गई हैं।
नियमों में बदलाव और 'मंथन' के नाम पर राज्य सरकार की सुस्ती ने चयन बोर्ड को पंगु बना दिया है, जिससे युवाओं के सामने ओवरएज होने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हमारी सरकार ने हमेशा युवाओं को संबल देने का काम किया था, लेकिन वर्तमान सरकार की प्रशासनिक अक्षमता और दिशाहीनता ने राजस्थान के प्रतिभावान युवाओं को सड़कों पर भटकने के लिए मजबूर कर दिया है।
मुख्यमंत्री जी को विज्ञापनों की दुनिया से बाहर आकर यह जवाब देना चाहिए कि जब चयन बोर्ड के पास परीक्षा के निर्देश तक नहीं हैं, तो फिर ये खोखले कैलेंडर जारी करने का ढोंग क्यों किया जा रहा है? युवाओं के सब्र का और इम्तिहान न लें, तुरंत नोटिफिकेशन जारी कर रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया को शुरू करें।