अरावली केवल एक पर्वतमाला नहीं, यह उत्तर भारत का सांस लेने वाला फेफड़ा है। 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा निर्णय दिया जिसने अरावली की किस्मत को खतरों से भर दिया है। अब अरावली को पहचानने का नया पैमाना सिर्फ 100 मीटर से ऊपर की ऊँचाई होगा और इस एक नियम ने अरावली के 90% हिस्से को सुरक्षा से बाहर फेंक दिया है। यानी बाकी पहाड़ियों को खनन के नाम पर खोदना लगभग वैध हो जाएगा। पुरानी तरह नए लीज़ भले न मिलें, पर “सस्टेनेबल” शब्द के बहाने जो चाहे, जैसा चाहे, खनन कर सकता है।