Joined September 2024
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I study how voters think, feel & decide at the booth level. Focus: booth-wise voter behaviour & turnout signals, public sentiment, local issue patterns, and youth, silent & swing voters—turning data into actionable political insights. Happy to connect & collaborate. #political
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उत्तर प्रदेश को छोड़ दें तो अधिकांश राज्यों में क्षत्रिय समाज का राजनीतिक प्रभाव लगातार घटा है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी कई बड़े राजपूत नेताओं का राजनीतिक दायरा सीमित होता गया, लेकिन इसके खिलाफ कोई मजबूत और संगठित राजनीतिक आवाज़ खड़ी नहीं हो सकी।
एक समय था जब यह संवाद सुनने में बहुत अच्छा लगता था — “राजस्थान में राजपूतों का वर्चस्व था और हमेशा रहेगा।” लेकिन जैसे-जैसे जमीनी हालात को करीब से देखा, कई सवाल खड़े होने लगे। राजस्थान में क्षत्रियों की अपनी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है। भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों में क्षत्रिय समाज की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है। उदाहरण के तौर पर, टिकट वितरण, संगठनात्मक पदों, मंत्रिमंडल, राज्यसभा और प्रशासनिक पदों में समाज की भागीदारी को लेकर कई लोग चिंता व्यक्त करते हैं। उनका मानना है कि राजनीतिक प्रभाव केवल इतिहास या भावनात्मक नारों से नहीं, बल्कि वास्तविक प्रतिनिधित्व, संगठन और नेतृत्व से बनता है। साथ ही आत्ममंथन की भी आवश्यकता है। कई बार समाज के भीतर ही व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं, गुटबाजी और राजनीतिक निष्ठाएं सामूहिक हितों से ऊपर चली जाती हैं। इसके विपरीत, कुछ अन्य समुदाय अपने नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रति अधिक एकजुट दिखाई देते हैं, जिससे उनका सामूहिक प्रभाव मजबूत होता है। संदेश यही है: केवल 30 सेकंड की रीलों, सोशल मीडिया पोस्टों या भावनात्मक नारों से किसी समाज का वजूद मजबूत नहीं होता। यदि किसी समाज को दीर्घकालिक प्रभाव और सम्मान चाहिए, तो उसे राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से मजबूत बनना होगा। युवाओं को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, व्यवसाय, प्रशासन और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाना ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। इतिहास पर गर्व जरूरी है, लेकिन भविष्य का निर्माण वर्तमान की तैयारी से होता है।
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केवल इतिहास और गौरवगान से राजनीतिक शक्ति कायम नहीं रहती। जब तक समाज शिक्षा, संगठन, नेतृत्व निर्माण और राजनीतिक भागीदारी पर ध्यान नहीं देगा, तब तक उसका प्रभाव लगातार कम होता जाएगा। समय की मांग है कि भावनाओं से आगे बढ़कर रणनीतिक और दीर्घकालिक सोच अपनाई जाए।
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किसी उभरते हुए खिलाड़ी के नाम और पहचान का इस्तेमाल करके फॉलोअर्स और प्रसिद्धि बटोरना बेहद निंदनीय है। यदि यह अकाउंट वैभव सूर्यवंशी का आधिकारिक अकाउंट नहीं है, तो सभी से आग्रह है कि इसे रिपोर्ट करें ताकि सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाने वालों पर कार्रवाई हो सके।
वैभव सूर्यवंशी का ट्विटर/X पर कोई अकाउंट नहीं है। यह कोई हो श्री वाला कालनेमी है जो रूप बदलकर बच्चे का फेम खा रहा है। सभी भाई इसे अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करके इस अकाउंट को सस्पेंड करवाये। रीपोर्ट कालनेमी- @Vaibhavsooryava @BCCI @rajasthanroyals @XCorpIndia @officecmbihar
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एक समय था जब मध्य प्रदेश की राजनीति में क्षत्रिय नेतृत्व की मजबूत पहचान थी, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। समाज के पास ऐसा कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा नहीं दिखता जो उसकी बात को सत्ता और संगठन तक प्रभावी ढंग से पहुंचा सके। नेतृत्व का यह शून्य भविष्य के लिए एक गंभीर विषय है।
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नेताओं की कमी नहीं है, लेकिन पूरे क्षत्रिय समाज को एक मंच पर लाकर उसकी बात रखने वाला प्रभावशाली चेहरा आज मध्य प्रदेश में नजर नहीं आता। यही सबसे बड़ी चिंता है। @BabuSahab_0003 @Sahasrabahu_ @KMShahi334
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“Vote से पहले Mindset Control का खेल ” चुनाव आते ही अचानक IT Cell की फैक्ट्री 24×7 चालू हो जाती है Fake narrative, edited clips, paid trends, धर्म-जाति का डर और भावनात्मक propaganda से जनता को इस तरह manipulate किया जाता है कि असली मुद्दे पीछे छूट जाएं। @BabuSahab_0003
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रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य पर सवाल मत पूछो… बस दिनभर “हम vs वो” में उलझे रहो। सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार अब विकास नहीं, perception management बन चुका है। पहले सोशल मीडिया पर माहौल बनाओ, फिर उसी माहौल को “जनता की आवाज” बताकर वोट ले लो। @KMShahi334 @Sahasrabahu_
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जनता जितनी भावनाओं में उलझी रहेगी, उतनी कम जवाबदेही मांगेगी। इसीलिए जागरूक नागरिक बनो, blind supporter नहीं। @SajjanBhad818 @Dilipshahi26491
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राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात के कई बड़े राजघराने आज अपनी शानो-शौकत, राजनीति और निजी वैभव तक सीमित होकर रह गए हैं। अगर सच में क्षत्रिय समाज और इतिहास की चिंता होती, तो कोई भी हमारे वीरों के इतिहास के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत नहीं करता। @BabuSahab_0003
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उत्तर प्रदेश के कुछ राजघराने फिर भी समय-समय पर समाज और इतिहास के मुद्दों पर बोलते दिखाई दे जाते हैं। लेकिन राजस्थान के कई बड़े राजघराने अपने , होटलों और पर्यटन व्यवसाय में इतने व्यस्त हैं कि समाज और इतिहास पर हो रहे प्रहार पर भी चुप्पी साध लेते हैं। @thethakurforce
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जिस इतिहास ने पहचान दी, उसी इतिहास की रक्षा के समय मौन रहना समाज को कमजोर करता है। राजसी वैभव से ज्यादा जरूरी अपने पूर्वजों के सम्मान और समाज के स्वाभिमान के लिए खड़ा होना है। @SajjanBhad818 @dheersen @Dilipshahi26491 @KMShahi334
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कृपया सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे PDF और पोस्ट देखकर भ्रमित न हों। जिस वेबसाइट — “AllCasteList.com” — की सूची शेयर की जा रही है, वह कोई सरकारी (Official Government) वेबसाइट नहीं है। @thethakurforce @Sahasrabahu_ @LSinghShekhawat
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वेबसाइट पर स्वयं स्पष्ट रूप से लिखा है कि: “यह Central Government या किसी State Government की official website नहीं है, बल्कि एक personal blog/website है।” @BabuSahab_0003 @KMShahi334 @rajput_of_india @SajjanBhad818
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क्षत्रिय भाइयों, यदि किसी वेबसाइट पर समाज से जुड़ी भ्रामक या गलत जानकारी डाली जा रही है, तो उसका शांतिपूर्ण और तथ्यात्मक विरोध होना चाहिए। आपस में भ्रम फैलाने के बजाय ऐसी वेबसाइटों से जवाब मांगिए और गलत जानकारी हटाने की मांग करिए।
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स्वाभिमान, साहस और वीरता के अमर प्रतीक महाराणा प्रताप सिंह जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। ⚔️🚩 उनका त्याग, पराक्रम और मातृभूमि के प्रति समर्पण सदैव हमें प्रेरणा देता रहेगा। जय मेवाड़! जय राजपूताना! #MaharanaPratapJayanti #Rajputana #VeerShiromani
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राजपूत हो या ठाकुर — ये अलग नहीं, एक ही पहचान के नाम हैं। समाज में इन्हें हमेशा क्षत्रिय के रूप में ही जाना गया है। फिर अलग-अलग नामों में क्यों बाँटना? एक ही समाज, एक ही परंपरा — तो पहचान भी एक ही होनी चाहिए: क्षत्रिय। अब समय है एकजुट सोच का, न कि अलग-अलग नामों का। #Kshatriya
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🔥 सतेंद्र गहरवार जी ने बिल्कुल सटीक बात रखी है। ✍️ सतेंद्र गहरवार जी शब्दों के धनी हैं, उनकी लेखनी बेहद प्रभावशाली है। अब समय है कि वे एक मजबूत IT Cell जैसा सेटअप बनाएं, जिससे डिजिटल दुनिया में संगठित तरीके से क्षत्रिय समाज की आवाज उठाई जा सके और हर प्लेटफॉर्म पर |
इस समय अगर किसी नेता या करणी सेना / क्षत्रिय महासभा को सच मे क्षत्रियो का हित करना है तो वो देश दुनिया का बेफुजुल मुद्दों को छोड़कर सिर्फ 3 मांगो पर पुरे भारत मे आंदोलन करना,धरना देना शुरू करना चाहिए, अगर ये तीन चीज लागू हो जाए तो क्षत्रिय समाज फिर से अपना पुराना गौरव इस लोकतंत्र मे भी पा सकता है 1- EWS सरलीकरण व उम्र फीस मे छूट ( राजस्थान गुजरात की तर्ज पर ) 2- EWS को पंचायती राज मे लागू करना 3- EWS को संवैधानिक आयोग बनाना आज यूपी मे पंचायती राज चुनाव मे सबसे अहीर सबसे मजबूत है क्यूंकि जहाँ OBC सीट आरक्षित होता है वहा कोई इनका टक़्कर नहीँ ले पाता, सेम यही हाल राजस्थान मे जाट का है, OBC सीट होने पर कोई इनका टक़्कर नहीँ ले पाता | अब सोचिये अगर पंचायती राज चुनावों मे EWS आरक्षण लागू हो गया तो यूपी बिहार मप्र राजस्थान हिमाचल उत्तराखंड गुजरात मे क्या प्रभाव पड़ेगा? बनिया कायस्थ जैसी जातियाँ पूर्ण रूपेण शहरी जाति हो चुकी है और ब्राह्मण जाति भी शहरी जाति बनने के कगार पर है, अगर ये 10% EWS आरक्षण लागू हो जाए तो इसका 80% फायदा यानी 8% हिस्सेदारी क्षत्रिय समाज का होगा | अभी 7-8 साल पहले बिहार मे पुलिस कांस्टेबल की भर्ती हुई थी जिसमे 9000 के करीब पोस्ट था जिसमे अगर मै गलत नहीँ हु तो सिर्फ 97 पोस्ट पर क्षत्रिय समाज का चयन हुआ था जिसमे भी 64 पोस्ट पर लड़कियां का चयन हुआ था, बिहार मे क्षत्रिय समाज जहाँ केंद्र की नौकरियों मे तो अच्छी संख्या मे था लेकिन राज्य सरकार की नौकरियों मे पिछले 20 साल से एकदम गायब हो रहा था उनके लिए EWS संजीवनी बूटी का काम किया है | राजस्थान मे क्षत्रिय समाज तो नौकरियों मे 25 साल से छोटी छोटी आबादी वाली जातियों से भी चयन मे पीछे था और था भी तो कांस्टेबल जैसी पोस्टो पर थे लेकिन EWS आरक्षण आने से वहां अब बड़ी पोस्टो पर भी चयन होने लगा है, हां आबादी अनुरूप भले नहीँ हो रहा लेकिन जहाँ पहले बड़ी पोस्टो पर 1% भी चयन नहीँ होता था आज 6-7% तक हो रहे और ये समय के साथ जल्द 12-15% तक पहुंचेगा क्यूंकि जिसके घर मे ग्रुप C की नौकरी आती है उसी के घर मे अगली पीढ़ी मे ग्रुप A - B की नौकरी आती है, वैसे भी भारत मे एक दूसरे को देखकर प्रेरणा लेने की आदत है " देखि देखा पुण्य देखी देखा पाप " अब लड़ाई है EWS सरलीकरण की, EWS मे सिर्फ 8 लाख की इनकम ही आधार हो और जमीन मकान की शर्त का हटना बहुत जरूरी है क्यूंकि अब गांव मे ऐसा कौन सा क्षत्रिय होगा जिसका 1 बिस्वा मे घर न हो? 5 एकड़ की लिमिट भी हटना चाहिए आखिर शहर मे रहने वाला जिसका आधा बिस्वा मे घर दुकान हो उसकी इनकम तो 5 एकड़ वाले किसान से तो हमेशा ज्यादा रहेगा, ये नियम तो ऐसा लगता है जैसे जानबूझकर लगाया गया है जिससे क्षत्रिय समाज लाभ लेने से वंचित रह जाए, बहुत महीन खेल किया गया है सरकार द्वारा वो धन्य भाग्य राजस्थान मे अशोकन गहलोत और गुजरात मे बीजेपी ने राज्य सरकार की नौकरियों मे जमीन की लिमिट हटा दिया है, सीधा 8 लाख इनकम ही आधार है और उन्हें ओबीसी की तरह उम्र मे भी छूट है तो जितने भी संगठन वाले है उनसे यही कहना है की अगर आप लोग सच मे समाज का भला करना चाहते हो पार्टियों की दलाली नहीँ करना चाहते तो यही 3 मुद्दों पर पुरे भारत मे आंदोलन करो, आवाज उठाओ, धरने दो Note - राजस्थान मे समाज चाहे जिसको फर्जी मे काकोसा बाबोसा जिजोसा मामोसा का टैग दे दे या राजाओं को सुबह शाम अगरबत्ती दिखाए लेकिन जो काम क्षत्रिय समाज के लिए धर्मेंद्र राठौड़ ने कर दिया कोई उनके आस पास नहीँ है, समाज को अचानक से मुख्य धारा मे ले आये राठौड़ साहब, जितनी भी तारीफ की जाए उतना कम है | हां इसके लिए गहलोत साहब की भी जितनी तारीफ या एहसान माना जाए उतना कम है। ✍️ Satendra Gaharwar
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आस्था और इतिहास को मिलाकर भ्रम फैलाना ठीक नहीं। किसी भगवान को मानना हर किसी का अधिकार है, लेकिन वंश का दावा इतिहास और प्रमाण मांगता है। प्रचलित मान्यताओं में श्रीकृष्ण की वंश रेखा भाटी–जाडौन क्षत्रिय से जोड़ी जाती है। इसे राजनीति का मुद्दा बनाना समाज को बाँटने जैसा है।
योगी जी तो यँहा तक कह रहे है देश के मुसलामनों के पूर्वज राम ही थे? जब हम यादव समाज को भगवान कृष्ण का वंशज कहते है तो कुछ लोगो को बुरा लगता है गाली गलौज करने लगता है।। कौन जाति किस भगवान का वंशज है यह लोगो की अपनी अपनी आस्था के बुनियाद पर आधारित है। इसलिये सबके आस्था का सम्मान कीजिये
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