हरियाणा प्रदेश पूरे देश में बेरोजगारी में न.1 पर है,फिर भी पता नहीं क्यों सरकार और
@OfficialGMDA विभाग कार्यकारिणी और कार्यो को दुरुस्त करने व गति देने के लिए युवा अधिकारियों को तवज्जो ना देकर सेवानिवृत्ति अधिकारियों को नौकरी पे रख रहे हैं।
जीमीडीए की वेबसाईट पे उपलब्ध डेटा के अनुसार
फिलहाल जीएमडीए में लगभग 64 उच्च अधिकारी हैं, जिसमे से लगभग 34 सेवानिवृत (रिटायर्ड) अधिकारी हैं और उन 34 में से भी लगभग 10 ऐसे हैं जिनकी उम्र 65 है और लगभग 6 ऐसे हैं जो 70 साल के आस पास हैं।
एक विभाग में कोई 1-2 सेवानिवृत अधिकारी, सालाहकार (एडवाइजर) के तौर पे सेवा दे तो समझ भी आता है।
लेकिन एसडीओ, एक्सएन जैसे कार्यविभौर पदों पे एक बुजुर्ग से आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं के वो फील्ड पे भी रहेंगे और कार्यालय के कामकाज को भी उसी गति से निर्वहन करेंगे??
असल मायनों में ये एक पूरा तंत्र है, जो की उच्चपदों पर बैठे अधिकारी अपने विभाग में अपने चहेते सेवानिवृत लोगों को भर्ती करवाते हैं ताकि किसी भी मामले में उनके ऊपर आंच ना आए, और सेवानिवृत अधिकारी की कोई जवाबदारी नहीं, ना चार्जशीट हो सकती और ना ही नौकरी खराब होने का डर, ऐसे में कोई व्यक्ति क्यों ज़्यादा काम की टेंशन लेगा।
साथ ही, उनको उनकी पेंशन के अनुरूप तनख्वाह तो मिलेगी ही, साथ में गाड़ी और ड्राइवर, ऑफिस असिटेंट, एमटीएस, और अन्य खर्च जो की लगभग 2 लाख प्रति माह हो जाता है।
गुरुग्राम के लिए, जीएमडीए सबसे महत्वपूर्ण विभाग है, ऐसी स्तिथि में गुरुग्राम की दुर्दशा की जिम्मेदार ये सेवानिवृत्ति अधिकारियों को मुख्य धारा में एसडीओ, एक्सएन या कोई और कार्यनिमित पद देना सिस्टम, डेवलपमेंट और गुरुग्राम की जनता सबके साथ धोखा है।
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