National Security Affairs Analyst, Columnist, Lawyer. Trying to figure out solutions: National Security, Geo-Strategy, Comparative Law, History

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On Pokhran nuclear tests anniversary, I argue that India should lift its voluntary moratorium on nuclear testing as US has conducted nuclear tests more than 1000 times, Russia 715 times and China more than 45 times while India has conducted very low yield nuclear tests just twice. The yield difference we have with China is gigantic. Still, China is continuing with underground nuclear tests at Lop Nur and produced 100 nuclear weapons last year as Trump plans to resume testing over the next twenty months and Russia is building next generation smart nuclear weapons. @JagranNews jagran.com/editorial/apnibaa…
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अन्य क्षेत्रे कृतं पापं तीर्थ क्षेत्रे विनश्यति। तीर्थ क्षेत्रे कृतं पापं वज्र लेपो भविष्यति॥
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Sovereignty once lost will be difficult to redeem. With that logic Vajpayee would have never done Nuclear Test in 1998 & Indira would have never liberated Bangladesh. Excuses are a sign of weakness not strength. National interests should triumph over business interests of few oligarchs. Having said that its too late now to redeem. We have the missed the bus on next teach leap of AI in IR 4.0. Our policy makers bet on Trump was a wrong one. I had decoded the man in 2017 & the Agenda he brought to table in America First. We slept over it for 9 years believing he would bat for us. Even made NRIs swing to him only to be given the biggest rebuke. Now he is anyway ripping apart 1991 model that powered & turbo charged India’s Economy. Plus we have hegemonist China on our borders which also does not want India to rise as a pole. Naturally our bureaucracy & establishment feels comfortable going with status quo & not rocking the boat. Its about self preservation & preserving their relevance ! Nothing wrong in that !
Replying to @TheNavroopSingh
Those few crumbs are 54% of total services exports, 110 billion and $80 billion of merchandise export, 20%. Indirect exports may lead to higher value. Babu, netas and big biz kids are all US educated. Pride can't fill stomachs, nor lack of self respect in the insecure elite.
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मामला दिल्ली के बॉर्डर से जुड़ी एक बेशकीमती जमीन का है।जमीन में थोड़ा विवाद है।ऐसी ही विवादास्पद जमीन को कोडियों में लेकर करोड़ों में बेचने की विशेषयोग्यता बीजेपी दिल्ली सरकार के एक मंत्री रखते हैं। मंत्री बड़े पारखी हैं।मंत्री जी की नजर जमीन पर पड़ी। मंत्रीजी जमीन को दिल दे बैठे।मंत्री जी अकेले नहीं थे , जिनका दिल इस जमीन पर आया।दिल्ली के एक और नेता इस जमीन को दिल दे बैठे। दोनों नेता जमीन को लेकर आमने सामने आ गए।मामला इन दोनों नेताओं से बड़े एक नेता के पास पहुंचा।बड़े नेता बहुत बड़े वाले हैं।बड़े नेता ने दोनों नेताओं को बुलाया।बड़े नेता ने समझाया कि “काम बहुत है और समय कम है, मिलकर काम करो।सबका साथ,सबका विकास के मंत्र पर चलना है। जमीन को लेकर उलझे दोनों नेताओं ने सहमति से सिर हिलाया।मामले का निपटारा हुआ। अब जमीन का बँटवारा तीनों नेताओं के बीच बराबर होगा।
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अयोध्या हारने के पीछे सिर्फ एक व्यक्ति की जिद और घमंड था। चंपक राय जी का व्यवहार सबने देखा ही है। काम धंधे से लेकर टिकट तक सब उनके कहने पर हो रहा था। परिणाम स्वरूप अयोध्या के 55000 साधुओं ने वोट नहीं दिया और लालू सिंह हार गए। जिला हारा लेकिन अयोध्या विधानसभा जीत गए।
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अब समझ में आया कि भाजपा अयोध्या सीट किन लोगों की वजह से हारी थी? ये मंडली वहां खूंटा गाड़ कर बैठी थी और इनके चमचे भ्रष्टाचार और भूमाफियागिरी कर रहे थे। लोकल लोग सब देख रहे थे। हिंदुत्व विरोधी, विचार परिवार विरोधी और संगठन विरोधी गतिविधियों के चलते इन लोगों को तत्काल मंदिर से ही नहीं अयोध्या से बाहर किया जाए। पूरे सनातन धर्म की साख पर बट्टा लगा दिया इन लोगों ने।
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ट्रस्ट के अध्यक्ष जी यात्रा पर रवाना हो गए हैं। सचिव जी की तबीयत खराब हो गई है। उन्हें काढ़ा दिया जाएगा। नृपेंद्र मिश्र जी सिर्फ निर्माण कार्य देखते हैं। राम लला पर ही छोड़ दो सब। अयोध्या में वही न्याय करेंगे।
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Even in 1971, US Navy sailed close to India, threatened but didnt per se kill Indians. This time they have crossed that Rubicon by killing 3 sailors.
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चंपत चाचा के भतीजों की लिस्ट बहुत लंबी है। सारे भतीजे करोड़पति हो चुके हैं।
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जब कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई गई थी उस समय मुलायम सिंह यादव के मुख्य सलाहकार कौन महानुभाव थे ?
दैनिक जागरण लिख रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के जिस कमरे में चढ़ावे की गिनती होती थी उसमें सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का विरोध एक ट्रस्ट पदाधिकारी ने ही यह कहकर किया था कि "सब अपने ही लड़के हैं, यहां कैमरा क्यों लगेगा"। फिर थोड़े बहुत कैमरे लगे, पदाधिकारी महाराज से छिपाकर। इन्हीं कैमरों से चढ़ावे की चोरी पकड़ी गई। अगर पदाधिकारी जी की चलती और कोई कैमरा ना लगता तो सोचिए क्या होता? पूरे हिंदू समाज के अराध्य रामलला के मंदिर को अपनी निजी संपत्ति की तरह चला रहा ये पदाधिकारी है कौन? पत कीजिए........साॅरी आई मीन पता कीजिए।
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एक कारसेवक की बात सुनो; राम मंदिर के नाम पर क्या क्या हो रहा है; सब पता चल जाएगा!
प्रभु राम के चढ़ावे पर उठे गंभीर प्रश्न: आस्था के नाम पर जांच से परहेज़ क्यों? अयोध्या का श्रीराम मंदिर केवल ईंट, पत्थर और शिल्प से निर्मित कोई धार्मिक परिसर नहीं है। वह करोड़ों भारतीयों की आस्था, त्याग, संघर्ष और विश्वास का प्रतीक है। देश और दुनिया के असंख्य श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार वहां धन, सोना, चांदी और बहुमूल्य वस्तुएं अर्पित की हैं। इसलिए मंदिर को प्राप्त होने वाला प्रत्येक रुपया मात्र नकदी नहीं, एक श्रद्धालु द्वारा सौंपा गया पवित्र न्यास है। ऐसे स्थान के चढ़ावे में चोरी, गबन अथवा वित्तीय अनियमितता का आरोप भी साधारण घटना नहीं माना जा सकता। राम मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी बताए जा रहे महिपाल सिंह ने अत्यंत गंभीर और विशिष्ट आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दान की नकदी गिनते समय नोटों की वास्तविक गड्डियों और तैयार किए जाने वाले वाउचरों में अंतर रखा जाता था। उन्होंने दावा किया है कि एक अवसर पर लगभग पांच लाख रुपये की अतिरिक्त राशि पकड़ी गई थी। उनका आरोप यह भी है कि शिकायत करने के बाद कार्रवाई कथित अनियमितता करने वालों पर नहीं, उन्हीं पर हुई और उन्हें पद से हटा दिया गया। महिपाल सिंह ने सात-आठ महीने के सीसीटीवी फुटेज मिटाए जाने तथा मंदिर में दान के रूप में आने वाले सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य धातुओं का समुचित लेखा उपलब्ध न होने जैसे आरोप भी लगाए हैं। ये आरोप अभी किसी सक्षम न्यायिक अथवा स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा प्रमाणित नहीं हुए हैं, लेकिन इनकी प्रकृति इतनी गंभीर है कि इन्हें केवल राजनीतिक आरोप बताकर खारिज नहीं किया जा सकता। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी इस प्रकरण पर अत्यंत कठोर सवाल उठाए हैं। हम उनके वक्तव्य का वीडियो भी प्रस्तुत कर रहे हैं। दूसरा वीडियो राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे एक सजग व्यक्ति का है, जो मंदिर की व्यवस्था और चढ़ावे को लेकर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इन दोनों वीडियो में व्यक्त बातें संबंधित वक्ताओं के आरोप और विचार हैं; हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति को जांच और न्यायिक प्रक्रिया से पहले दोषी घोषित करना नहीं, सार्वजनिक महत्त्व के प्रश्नों को सामने रखना है। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यदि यह सूचना सही है, तो इससे स्वयं इस विवाद की गंभीरता प्रमाणित होती है। दूसरी ओर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि समय-समय पर आंतरिक ऑडिट किया जाता है, जिसमें ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि सम्मिलित रहते हैं तथा अब तक कोई उल्लेखनीय अनियमितता सामने नहीं आई है। लेकिन प्रश्न यह है कि आरोप जब ट्रस्ट की अपनी व्यवस्था और कर्मचारियों से जुड़े हों, तब क्या केवल आंतरिक ऑडिट पर्याप्त माना जा सकता है? न्याय का सामान्य सिद्धांत है कि कोई व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता। अतः आवश्यक है कि संपूर्ण प्रकरण की जांच किसी ऐसी स्वतंत्र एजेंसी और फॉरेंसिक ऑडिट टीम से कराई जाए, जिसका ट्रस्ट के दैनिक प्रशासन से कोई संबंध न हो। जांच में कम-से-कम निम्न अभिलेखों को तत्काल सुरक्षित किया जाना चाहिए—दानपात्रों की दैनिक गणना का रिकॉर्ड, मूल वाउचर, बैंक जमा पर्चियां, नकदी परिवहन रजिस्टर, स्ट्रांग रूम और काउंटिंग रूम के प्रवेश अभिलेख, सीसीटीवी बैकअप, कर्मचारियों की ड्यूटी सूची तथा सोने-चांदी और आभूषणों की संपूर्ण सूची। यदि किसी कर्मचारी, बैंक अधिकारी, एजेंट अथवा पदाधिकारी को सौंपी गई दानराशि का बेईमानी से निजी उपयोग या बंदरबांट जांच में सिद्ध होती है, तो यह केवल “चोरी” नहीं, आपराधिक न्यासभंग और बेईमानी से संपत्ति के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है। यदि किसी अपराध को छिपाने के उद्देश्य से सीसीटीवी या अन्य प्रमाण मिटाए गए हों, तो प्रमाण नष्ट करने से संबंधित आपराधिक प्रावधानों की भी जांच होनी चाहिए। राम के नाम पर प्राप्त धन का हिसाब मांगना राम का विरोध नहीं है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम से जुड़ी प्रत्येक संस्था से मर्यादा, शुचिता और पारदर्शिता की मांग करना ही सच्ची रामभक्ति है। जब आरोप इतने गंभीर हों, आरोप लगाने वाले सामने आकर बयान दे रहे हों और मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचने की खबर हो, तब मौन किसी संस्था की प्रतिष्ठा की रक्षा नहीं करता—वह संदेह को और गहरा करता है। न किसी निर्दोष को आरोपों के आधार पर अपराधी घोषित किया जाना चाहिए, न आस्था की आड़ में संभावित अपराध को जांच से संरक्षण मिलना चाहिए। निष्पक्ष जांच हो, अभिलेख सुरक्षित किए जाएं, सभी पक्षों को सुना जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। क्योंकि यह केवल करोड़ों रुपये का प्रश्न नहीं—करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास का प्रश्न है।
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बेटी के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार्य नहीं... हम उस संस्कार में पले-बढ़े हैं, जहां कहा जाता है - गांव की बेटी सबकी बेटी, गांव की बहन सबकी बहन। -मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी
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उत्तर प्रदेश- सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री के ख़िलाफ़ ,ग़लत टिप्पणी हुई , मेरे संज्ञान में आते ही मैंने FIR के आदेश दिए - CM योगी !!
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सीसीटीवी फुटेज तो पहले पुलिस या सीबीआई द्वारा सील की जानी चाहिए थी। ट्रस्ट के लोगों पर आरोप है और वही फुटेज खंगाल रहे हैं। इस बात का पूरा प्रबंध किया जा रहा है कि मामला कोर्ट में पहुंचे तो टिक ना पाए क्योंकि आरोपियों के वकील कहेंगे कि सीसीटीवी फुटेज सीज होने से पहले ही उसमें छेड़छाड़ हो चुकी थी। गवाह कोई मिलेगा नहीं। भतीजे चोर हों तो चाचा थोड़े ही गवाही देगा।
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दैनिक जागरण लिख रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के जिस कमरे में चढ़ावे की गिनती होती थी उसमें सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का विरोध एक ट्रस्ट पदाधिकारी ने ही यह कहकर किया था कि "सब अपने ही लड़के हैं, यहां कैमरा क्यों लगेगा"। फिर थोड़े बहुत कैमरे लगे, पदाधिकारी महाराज से छिपाकर। इन्हीं कैमरों से चढ़ावे की चोरी पकड़ी गई। अगर पदाधिकारी जी की चलती और कोई कैमरा ना लगता तो सोचिए क्या होता? पूरे हिंदू समाज के अराध्य रामलला के मंदिर को अपनी निजी संपत्ति की तरह चला रहा ये पदाधिकारी है कौन? पत कीजिए........साॅरी आई मीन पता कीजिए।
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"सर, कुछ दिन पहले जब मैं चिलबिला चौकी गया, मैं नाबालिग हूँ, तब मैंने केस की प्रगति जानने के लिए चौकी पर गया था। वहां के इंचार्ज ने मुझे गालियां दीं क्योंकि मैंने आपके पास ट्वीट किया था, मेरा फोन तक ले लिया @pratapgarhpol @Uppolice
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1 year to Air India 171 Crash ! Final Report on cause of crash still not put out.
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दैनिक जागरण के अयोध्या संवाददाता लिखते हैं कि श्री रामजन्मभूमि मंदिर परिसर में स्थित "यात्री सुविधा केंद्र के जिस गोपनीय कक्ष में चढ़ावे में आए नोटों की गड्डियां बनती हैं और सिक्कों की गणना होती है उसमें न केवल ट्रस्ट, स्टेट बैंक व कलेक्शन एजेंसी के लोग रहते हैं, बल्कि परिसर की सुरक्षा करने वाली निजी और सुरक्षा एजेंसियों के लोगों की भी उपस्थिति रहती है। यही नहीं, धनराशि की गणना मंदिर ट्रस्टियों की देखरेख में होती है। इन परिस्थितियों में गबन आपसी मिलीभगत बिना संभव नहीं है"। अब मुझे कलियुग में इतना सत्य लिखने वाले दैनिक जागरण के अयोध्या संवाददाता की सुरक्षा को लेकर चिंता हो रही है।
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Filing nominations one has to be acutely cautious in providing every information. Be superfluous than wanting. No court interferes in election process. Election petition is subsequent to results. Should have furnished criminal case details avoiding interpretation of the provision
#BREAKING: Supreme Court dismisses Congress leader Meenakshi Natarajan's plea challenging the rejection of her Rajya Sabha nomination for the Madhya Pradesh by-election. • Court holds that challenges to rejection of nomination papers must ordinarily be pursued through an election petition. • Refuses to carve out an exception under Article 32 even in cases alleging a "glaring" or "manifestly illegal" rejection of nomination. • Reiterates that Article 329(b) bars judicial interference during the election process and that courts cannot create categories of cases warranting mid-election intervention. • Notes the consistent line of precedents beginning with N.P. Ponnuswami and followed in subsequent election law decisions. • Clarifies that all rights and contentions of the petitioner remain open in an election petition and that observations in the order will not prejudice such proceedings. #SupremeCourt
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तो पत्रकार महोदय के लॉजिक के अनुसार,अगर आपने मंदिर निर्माण का समर्थन किया है तो आपको चंदे में हेराफेरी का 'विशेषाधिकार' मिल जाता है? यह कैसी अजीब उम्मीद है कि लोग चंदा चोरी पर सवाल भी न उठाएं? आस्था अपनी जगह है और पारदर्शिता अपनी जगह। जो भी सच या झूठ है, उसकी निष्पक्ष जांच हो ।
जब रामलला टेंट में थे तब खामोशी थी , आज भव्य मंदिर बन गया तो चंदे का हिसाब याद आ गया।
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कहीं कोई अपराध हो जाए तो एफआईआर दर्ज कराई जाती है, पुलिस जांच करती है, कोर्ट देखता है कि जांच सही है या गलत। कोई नया कानून आया है क्या जिसमें पुलिस का काम अब रिटायर्ड जज किया करेंगे? वैसे जब कुछ हुआ ही नहीं है तो रिटायर्ड जज क्या करेंगे?
ब्रेकिंग न्यूज़। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़: रिटायर्ड जज करेंगे जांच, FIR अब भी नहीं 🔴 करोड़ों के चढ़ावे पर घमासान: संतों के आरोप, पूर्व लेखाकार का दावा, लेकिन जांच एजेंसी अब तक दूर 🔴 राम मंदिर दानपात्र विवाद: बैठकों पर बैठकें, पर पुलिस कार्रवाई शून्य 🔴 राम मंदिर चढ़ावा मामले में लखनऊ में बैठक हुई। रिटायर जज से जांच करवाने का फैसला। #Breakingnews #Ayodhya #Rammandir
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