पटना में परीक्षार्थी सफोकेशन से मर गया घुट-घुट के। सेशन पर जो अराजकता की स्थिति थी, वह हम सबने देखी। विद्यार्थियों को इस देश में कीड़े-मकोड़े की तरह देखा जाता है।
रैंडम जगह पर सेंटर होंगे ताकि बच्चे अधिकतम समस्याओं का सामना कर सकें। उन्हें एक दिन पहले जाना पड़े, रेल में भीड़ हो, सड़कों पर जाम लगे।
कोई लॉजिक नहीं है बगले के जिले की जगह तीन सौ किलोमीटर दूर सेंटर देने का। कुत्तों की तरह हमारी शिक्षा व्यवस्था इन्हें ट्रीट करती है।
छात्र मर रहे हैं, मारे जा रहे हैं, आंदोलन कर रहे हैं, लीक हुए पेपर की दोबारा परीक्षा दे रहे हैं, और नीरो बंसी बजा रहा है। उसे कोई पॉलिसी नहीं लानी, मरते रहो।
ऐसी निष्ठुर सत्ता, ऐसी घटिया व्यवस्था, ऐसी उपेक्षा मैंने पहले नहीं देखी।