किसी को इतना अपमानित मत करिए कि वह आपकी जड़ों में आचार्य चाणक्य की तरह मट्ठा डालने पर उतर आए
और आप महानंद से नालानंद बन जाएं
कहा जाता है कि हिमंता बिस्वा सरमा जी को राहुल गांधी ने मिलने का समय नहीं दिया, फिर इंतजार करवाया और चाय के साथ अपने डॉगी का बिस्कुट पेश किया।
नतीजा, असम से कांग्रेस साफ हो गई।
और अगर भविष्य में शर्मा जी को प्रधानमंत्री बनने का बड़ा अवसर मिला तो राजपरिवार की राजनीति हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है।
कहा जाता है कि वे अटल जी या मोदी जी की तरह शांत नहीं, बल्कि “खेड़ा का पेड़ा” बनाने की खुली बात करने वाले नेता हैं।
पूज्य योगी आदित्यनाथ जी को मुलायम सिंह यादव और मुख्तार अंसारी जैसे लोगों से इतना संघर्ष झेलना पड़ा कि वे संसद में रो पड़े थे।
आज हाल ये है कि मुस्लिम माफिया खत्म हो चुके है। अतीक मुख्तार अपनी कब्र में करवटें बदल रहे हैं और मुलायम का बेटा “पंडी जी कहेंगे तो ये भी करुंगा, पंडी जी कहेंगे तो वो भी करुंगा…” का पहाड़ा पढ़ने को मजबूर दिख रहे हैं।
सुवेंदु अधिकारी के पिता ने टीएमसी की सेवा की, खुद सुवेंदु ने नंदीग्राम और सिंगुर आंदोलन में ममता का साथ दिया।
लेकिन एक दिन अभिषेक बनर्जी के लिए उनसे कुर्सी खाली करने को कहा गया, जबकि वहां सिर्फ दो कुर्सियां थीं।
आज वही सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी की राजनीति को जमीन के नीचे दफ्न कर चुके हैं। आगे क्या होगा, समय बताएगा।
ऐसे में कबीर का दोहा याद आता है—
“निर्बल को न सताइए, जिसकी मोटी हाय।
मुए खाल की श्वास से, लोह भसम होई जाय।।”