मे लो डी: "नमस्ते मोड़ी ! पिछली बार जो आप मुझे टॉफी देकर गए थे, वो बहुत चॉकोलेटी थी!" 😉
मो ड़ी: "देखा! आखिर दुनिया जानना चाहती है कि 'मेलोडी ' इतनी चॉकोलेटी क्यों है?'" 😎
मेलोडी: "हाँ, क्योंकि वो बाहर से कड़क और अंदर से खोखली थी... बिल्कुल आपके
चूनावी वादों की तरह!" 🤫
सुनने में आ रहा अपना विष गुरु भूरा ताऊ को मिलने उसकी कुर्सी तक गया!
लेकिन बिग ब्रेकिंग तो यही रहा कि G7 बैठक में मेलोनी (छिछोरी) काकी ने विष गुरु को बोला कि Instagram पे वै सबसे फेमस हैं....भक्त इसी को G7 की अहम बैठक का अचीवमेंट समझें और मूत के सो जाएं!!😜🤣🤣
भक्त -स्वामी जी ऐसी पत्नी को क्या कहते हैं जो
गोरी हो, लंबी हो, सुंदर हो, बुद्धिमान हो, पति को समझे और कभी झगड़ा न करे।
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स्वामी जी -मन का वहम कहते हैं बेटा, मन का वहम।
स्लोवाकिया में मोदी जी के स्वागत में कथित रूप से 25000 भारतीयों ने जय श्री राम और भारत माता की जय के साथ स्वागत किया.
अधिकृत रूप से स्लोवाकिया में 11000 के करीब भारतीय हैं.
बाकी क्या बंगाल चुनाव से निपट कर प्रवासी वोटर पहुंच गए?
या वहां भी SIR हुआ है?
😉😄😄
सच की फाइलें जलती है तो शक पैदा होता है! सबूत राख बन जाए तो सवाल पैदा होता है और चुनाव बाद जब ईवीएम ही जल जाए तो राजनीत में बवाल पैदा होता है! लेकिन जब पक्ष विपक्ष दोनों ही जनता के लिए एक समान हो तो फिर अचंभा कैसा?
राम मंदिर चढ़ावा कांड का ‘इनसाइड स्टोरी’ खुलासा। संघ-VHP की अंतर्कलह से फूटा गबन का राज।
अंदरूनी खींचतान ने खोला राम मंदिर चढ़ावा कांड का पिटारा।
ट्रस्ट में बढ़ते ‘दखल’ पर मची नाराज़गी, फिर खुला करोड़ों के गबन का खेल।
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला अब केवल चोरी या वित्तीय अनियमितता भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली हलकों की अंदरूनी खींचतान का एंगल भी सामने आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, संघ और विहिप से जुड़े दो धड़ों के बीच लंबे समय से चल रही असहजता और ट्रस्ट पदाधिकारियों के बेहद करीबी रहे कुछ लोगों के रामजन्मभूमि परिसर में बढ़ते दखल को लेकर नाराज़गी थी।
बताया जा रहा है कि इसी नाराज़गी और अंदरूनी टकराव के बीच चढ़ावा गबन की जानकारियां बाहर आईं। बताते हैं कि नगद रुपयों के मंदिर के यात्री सुविधा केंद्र में कर्मचारी पकड़े भी गए थे। बाथरूम तक में पैसा छूए हुए थे लेकिन तब भी ट्रस्ट ने FIR नहीं करवाई। इसके बाद दूसरा गुट सक्रिय हो गया। बात अखिलेश यादव तक पहुंच गई और उन्होंने ट्वीट कर सियाम मामला सार्वजनिक हो गया। मामला धीरे-धीरे खुलता गया और फिर संदिग्ध कर्मियों, उनके नेटवर्क, संपत्तियों और कथित संरक्षण पर सवाल खड़े हो गए। अब जांच सिर्फ रकम की हेराफेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि किसके संरक्षण में यह खेल चलता रहा और कैसे अंदरूनी संघर्ष ने पूरे प्रकरण को उजागर कर दिया।
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