एक तरफ तस्वीर है बांद्रा रेलवे स्टेशन की जहां मजहबी लोग इबादत कर रहे है,
दूसरी तस्वीर है सड़क पर सिर्फ सफेद रंग पोतने की जिस पर जैन धर्म गुरु चल सके,
दोनों तस्वीरों मैं मामला धर्म से जुड़ा है लेकिन बुजदिल कायर राज ठाकरे को दिक्कत सिर्फ जैन धर्म से है,
क्यों कि राज ठाकरे को पता है कि मजहब वालो के खिलाफ बोलेगा तो सड़क पर निकलना मुश्किल हो जाएगा,
वैसे भी इस राज ठाकरे और इसके चेले चपाते की हिम्मत देखी है जब उत्तर भारतीय को मराठी बोलने पर मार पीट रहे थे,
लेकिन जब बात मुस्लिम इलाकों मैं मराठी बुलवाने की आई तो ना राज ठाकरे की हिम्मत हुई ना उसके तलवे चाटने वाले गुलामों की,
ये अपने आप को बाला साहब की वारिस का उत्तराधिकारी मानता था लेकिन बाला साहब का वारिस बनने की काबिलियत ना उद्धव मैं ना इस कायर राज ठाकरे मैं,
ये गली का वो कु त्ता है जो इलाके मैं भौंकता है और जैसे ही दूसरे इलाके मैं जाने की बात आती है छुपकर दुम दबा कर निकलता है,
हर सनातनी हिंदू जैन धर्म का सम्मान करता है और करता रहेगा चाहे ऐसे कई राज ठाकरे खड़े हो जाए 🤬