from sikar ...aspirants civil services...Be positive.❤️

Joined October 2020
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किसी भी समाज पर अमर्यादित शब्दों से बचना चाहिए... सनद रहे ग़लत एक व्यक्ति, नेता या समूह विशेष हो सकता है पूरा समाज कदापि नहीं। सम्मानपूर्वक अपने विचार रख सकते हो।।
जो युवा साथी नफरती चिंटूओ के अकाउंट पर कमेंट, कोट, रिपोस्ट कर रहे हैं आपसे निवेदन है ऐसा बंद कीजिए! नफ़रत चिंटू ओ को आप जाने अनजाने में आगे बढ़ा रहे हैं उन्हें रिप्लाइ, लाइक करकर तो ये तुरन्त बंद करे 🙏 अगर इन नफ़रत फैलाने वाले कीड़ों को जवाब देना है तो सीधे पोस्ट कर जवाब दे परंतु गालियां किसी को ना दे , अगर आप सब ने ये कर लिया तो सोचना आधा मानसिक नियंत्रण आपने पा लिया है और ये जरूरी है आपका नियंत्रित होना 🙏 अगर आपको कोई जानकारी या कुछ पूछना है तो मुझे पूछ सकते हैं परन्तु इन नफरतियो का अकाउंट बड़ा करना बंद कीजिए ! बाकी सबके विचार आमंत्रित हैं, पोस्ट को सभी साथियों तक अवश्य पहुंचाए !
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यहीं हम कह रहे हैं.... बस कुछ नासमझ मीणा भाई इसे समझ नहीं रहे हैं। सरकार टस से मस नहीं हो रही है, सरकार को कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा है और ये दोनों समाज आपस में जहर उगल रहे हैं पढ़े लिखे बेवकूफ़ हो रहे हैं।।
युवा नेता नरेश का पांचना बांध के नाम पर राजनैतिक रोटियां सेकने वालो को करारा जवाब पानी भजन लाल से मांगो मुख्यमंत्री से अगर तुम बीजेपी सरकार से पानी मांगोगे तो मैं तुम्हारे साथ खड़ा हूं एक दूसरे समाज के नेताओं को चैलेंज मत करो @NareshMeena__ ❤️🙏
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माननीय सांसद महोदय... पांचना बांध समस्या का समाधान गुर्जर मीणा समाज के पंच पटेल आपस में बैठकर कर लेंगे लेकिन आपकी स्तरहीन भाषा दोनों समाजों में खाई पैदा करेगी अतः शब्दों का चयन एक जनप्रतिनिधि को सोच समझकर करना चाहिए क्योंकि आपको वोट सर्वसमाज ने दिया है ।
खंडीप,गंगापुर सिटी में आज किसान महापंचायत में सम्मिलित होकर किसान भाइयों से संवाद किया। @INCIndia @INCRajasthan
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इनसे ओर उम्मीद भी क्या ही कर सकते हैं।भाई
पांचना बांध पर एक तरफ पानी कि मांग को लेकर 39 360 गावों के किसान बैठे हैं आराम से बैठे हैं ना किसी को मारने की धमकी दी ना किसी से बदला लेने की बात कहीं, ना किसी बड़े नेता, विधायक, सांसद की मीटिंग करवाई ! इनकी मांग स्पस्ट है कि हमारे गांव को पाणी दे दो उसके बाद जितना पाणी लेना है ले जाना ! दूसरी तरफ खंडीप गांव में इसी पानी की मांग को लेकर धरना चल रहा है धरना कर रहे हैं विधायक रामकेश मीणा जो गहलोत सरकार में मुख्यमंत्री सलाहकार रहे उस समय नहर खोलने की बात करना तो दूर चुनाव जीतते ही सुनी भी नहीं किसी की ! अब सरकार गई तो याद आया पाणी लेना है ठीक है मांग करो सरकार से परंतु सरकार से मांग करने के बहाने :- 1. नहर में पानी की जगह खून बहेगा 2. तुम्हारे नेता की राजनीति ख़तम करेंगे 3. तुम्हारी कोई ओकात नहीं तुम हाथ जोड़ोगे 4. तोप लेकर आएंगे सबको उड़ा देंगे 5. 2007-08 में जैसा नरसंहार लालसोट में किया वैसा कर देंगे 6. तुम नक्सली हो तुम आतंकवादी हो और भी बहुत कुछ .... ये शब्द बोल रहे हैं विधायक, सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व प्रधान, सरपंच , प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में पढ़े अबोध बालक क्या ये सही है ? ये पाणी की मांग कम और दंगा करने की मांग ज्यादा लग रही है जबकि बात स्पश्ट है दोनों पक्षों के पटेल मिलकर मामला सुलझाएंगे फिर ऐसे बयान क्यों ? सभी बुद्धिजीवी लोगो के विचार आमंत्रित हैं ! @arvindchotia @8PMnoCM @MohitBharatYBP @Zinda_Avdhesh @Rajsthanikaka @TheNewspinch @garrywalia_
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सच्चाई कड़वी लगती है.... ओमी भाई कास.. गर गुर्जर समाज ऐसा पायलट के लिए गहलोत के पुतले जलाता तो... कितने कुत् भौंकना शुरू हो जाते।।bt..
मैंने तो पहले ही कहा था कि रमेश जी उड़ता तीर मत लो यह देख लो राजस्थान में इन मिन 3 माली है वो ही तुम्हारा पुतला जला रहे हैं, और नहीं आप के पक्ष में मीणा समजा और ना ही गुर्जर समाज 😀
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NETRAM GURJAR retweeted
हर महिला अगर अपनी जुबान पर थोड़ा ताला लगा ले तो मैं गारंटी के साथ कह सकती हूं कि दहेज और तलाक जैसी कभी नौबत ही ना आए अब आज दिल्ली का ही मामला देख लीजिए शिखा सिंह की शादी 2020 में हुई थी, इन्होंने पति से स्वयं झगड़ा किया और खुद ही दहेज का केस डाल दिया, केस में पैसा लगाते-लगाते लड़की के पिता सड़क पर आ गए. उनकी हालत ऐसी हो गई कि वह स्वयं का इलाज तक नहीं करा पा रहे थे. यही टेंशन करते-करते अभी 10 दिन पहले इनके पिता जी को अटैक आ गया, जिन्हे गंभीर हालत में सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया जब इसकी सूचना महिला के पति सौरभ को मिली तो वह सरकारी अस्पताल पहुंचा और वहां से अपने ससुर साहब को निकालकर गुड़गांव के सबसे बड़े हॉस्पिटल मेदांता ग्रुप में भर्ती कराया, अब लड़की के पिता पूरी तरह स्वस्थ हैं, आज दिल्ली कोर्ट में लड़की की तारीख थी, पति के सामने पहुंचते ही लड़की ने तलाक के सारे कागज फाड़ दिए और पति को गले लगा लिया
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न्याय...
राजस्थान काँग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री @GovindDotasra जी के सुपुत्र के लिखित परीक्षा में 343 और साक्षात्कार में 85, बन गए RAS एक महिला के लिखित में 425 और साक्षात्कार में 25, नहीं बन पाई RAS… वाह रे न्याय…🤔
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NETRAM GURJAR retweeted
राजेश पायलट: मिट्टी से उठकर राजनीति के आकाश में चमका एक नक्षत्र राजेश पायलट। कल्पना कीजिए, सफ़ेद बालों, उसी दृढ़ चेहरे और किसान-जवान के प्रश्नों पर गरजती हुई आवाज़ के साथ वे आज की राजनीति को किस निगाह से देख रहे होते! उस राजनीति को, जिसमें साधनहीन प्रतिभाओं के लिए दरवाज़े संकरे और धन, वंश तथा चाटुकारिता के लिए राजमार्ग चौड़े होते जा रहे हैं। राजेश पायलट का मूल नाम राजेश्वर प्रसाद था। अत्यंत साधारण और अभावग्रस्त पशुपालक परिवार में पले इस मेधावी युवक ने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज तक अपनी राह बनाई। वह कॉलेज, जहाँ से निर्मल वर्मा, सुचेता कृपलानी, गोपालकृष्ण गांधी, राजमोहन गांधी, गोपीचंद नारंग, अमिताव घोष और रामचंद्र गुहा जैसी विलक्षण प्रतिभाएँ निकलीं। राजेश्वर प्रसाद का वहाँ पहुँचना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं था; वह उस ग्रामीण भारत की विजय थी, जिसके बच्चों के पाँव में धूल अधिक और अवसर बहुत कम होते हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना में पायलट की प्रतिष्ठित नौकरी प्राप्त की, लेकिन आकाश में उड़ते हुए भी उनकी दृष्टि नीचे खेतों पर टिकी रही। किसानों की बदहाली ने उनके भीतर यह प्रश्न जगाया कि इस जीवन में ही इन परिस्थितियों को बदलने का रास्ता क्या है। उन्हें उत्तर राजनीति में दिखाई दिया। उन्होंने सुरक्षित और सम्मानजनक नौकरी छोड़कर उस अनिश्चित संसार में प्रवेश किया, जहाँ प्रतिभा से अधिक खेमे, षड्यंत्र और विरासतें काम करती हैं। वे बागपत से चौधरी चरणसिंह के विरुद्ध चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिला। निराशा के उसी क्षण संजय गांधी ने उन्हें भरतपुर से चुनाव लड़ने भेजा। भरतपुर उनके लिए अपरिचित था। जयपुर में प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया; उनके नामांकन में त्रुटियाँ छोड़कर रास्ता रोकने तक के प्रयास हुए। लेकिन आम कार्यकर्ताओं और जनता ने उस अनजान युवक में अपना भविष्य देखा। राजेश्वर प्रसाद, राजेश पायलट बनकर उभरे और राजस्थान की राजनीति में एक नई धारा प्रवाहित हुई। भरतपुर से शुरू हुई उनकी यात्रा दौसा पहुँची। वे 1991, 1996, 1998 और 1999 में लगातार लोकसभा पहुँचे। तूफ़ानों से लड़ते, गिरते और फिर उठते हुए उन्होंने स्वयं को मिट्टी से सोना निकालने और इस्पात मोड़ने वाली शख़्सियत सिद्ध किया। उनमें किसान की सरलता, सैनिक का अनुशासन और लोकतांत्रिक नेता का साहस था। राजेश पायलट को किसान और जवान से गहरा प्रेम था। वे उस संस्कृति से निकले थे, जिसमें गाय केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, परिवार की सदस्य होती है; जिसमें गोधूलि कोई काव्यात्मक शब्द नहीं, श्रम, पशुधन और ग्रामीण जीवन की साँस होती है। इसीलिए उनकी राजनीति में खेत की गंध और साधारण मनुष्य की पीड़ा थी। 11 जून 2000 को एक सड़क दुर्घटना ने उस यात्रा को अचानक रोक दिया। वे अपनी राजनीति को उसके अंतिम गंतव्य तक पहुँचाने से पहले चले गए। राजस्थान की लोकतांत्रिक राजनीति को मिले श्रेष्ठ नेताओं में राजेश पायलट का स्थान सदैव विशिष्ट रहेगा। केदारनाथ अग्रवाल की पंक्तियों के साथ उस दमकते नक्षत्र को असीम प्रणाम : “हम जिएँ न जिएँ दोस्त, तुम जियो एक नौजवान की तरह, खेत में झूम रहे धान की तरह, मौत को मार रहे बाण की तरह।” #RajeshPilot #SachinPilot
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इसका मतलब पायलट साहब फॉल्ट शब्द अपने साथियों को भी नहीं बोलने देते लेकिन रमेश जी का गुब्बार फूट ही गया।
सचिन पायलट जी नाराज होंगे फिर भी मैं बोलूंगा! अशोक गहलोत बार बार कहते हैं हमने 10 करोड़ लिए में कहना चाहता हूं मेरा नार्को टेस्ट करवा लो अगर पैसे लिए हो तो ! पर नार्को टेस्ट गहलोत जी को भी करवाना पड़ेगा कि निर्दलीय और बीजेपी विधायकों को पैसे दिए या नहीं दिए 🤣😂 जब जब कांग्रेस आगे बढ़ती है यह आदमी पीछे लाता है! 😂🤣 पूर्व मंत्री रमेश मीणा जी
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NETRAM GURJAR retweeted
अशोक गहलोत जब मुख्यमंत्री बने थे… और सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था तब अशोक गहलोत ने पायलट को Provoke करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी… एक सिपाही का ट्रांसफ़र तक पायलट के हाथ में नहीं था.. पायलट का कोई काम नहीं होता था… कोई सिफ़ारिश आगे नहीं बढ़ती थी… लेकिन पायलट के मुँह से आपने कभी उत्तेजित शब्द नहीं सुने होंगे… यहाँ तक कि बग़ावत करने के बावजूद एक भी Loose कमेंट नहीं आया उनकी तरफ़ से… लेकिन अशोक गहलोत ने छूटते ही घटिया और स्तर हीन बयानों की झड़ी लगा दी थी… हमें तो पहले से पता था, ये निकम्मा है नाकारा है… वो खुद को बहुत होशियार समझता है मैं यहाँ कोई बैंगन बेचने नहीं आया हूँ मैं मुख्यमंत्री बनने आया हूँ… उसकी अभी रगड़ाई नहीं हुई है.. शुरू होते ही मुख्यमंत्री पद चाहिए उसको…!! वग़ैरह वग़ैरह… उस दिन सारा गांधी वादी आवरण हट गया था…!! असली चेहरा लोगों के सामने आ गया था…!!!
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संयम ❤️
“10 करोड़ लेने का आरोप लगाने वालों से आज भी कहता हूँ — मेरा नार्को टेस्ट करा लो, सच सामने आ जाएगा। आज कृषि विभाग में सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों ने किसानों के विश्वास को ठेस पहुँचाई है। जो लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें करते थे, आज उन्हीं के विभाग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आज किसान गर्मी, सर्दी, बरसात और हर कठिन परिस्थिति सहकर देश का पेट भरता है, लेकिन उसकी आय दोगुनी नहीं हुई। खाद और बीज की गुणवत्ता को लेकर किसान परेशान है और कृषि विभाग पर उठ रहे सवाल किसानों की चिंता को और बढ़ा रहे हैं। 15 वर्षों से एक व्यक्ति को लगातार संघर्ष करते देख रहा हूँ। कितनी भी मुश्किलें आई हों, चेहरे पर कभी निराशा नहीं आने दी, कभी किसी की बुराई नहीं की, हमेशा यही कहा—“सब ठीक हो जाएगा।” यही सचिन पायलट जी की सबसे बड़ी ताकत है। #rameshmeena #karauli #sapotra #rajasthan #congress
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वाह चट भी तेरी और पट भी तेरी....
जब मैंने तीर छोड़ा था तो पूरी उम्मीद थी कि निशाना बिल्कुल सही जगह लगेगा; लेकिन कुछ गुर्जर भाई बोल रहे थे कि सचिन को मत लाओ बीच में.! आख़िरकार कांग्रेस महासचिव @SachinPilot जी को आज मंच से बोलना ही पड़ा कि पाँचना बाँध का पानी सबको मिलना चाहिए; सरकार जल्दी माँग पूरी करें, आपसी संवाद स्थापित हो और किसी के बहकावे में ना आयें.! पूरे भाषण के माध्यम से गुर्जर समुदाय को उन्होंने इनडायरेक्ट संदेश दिया है कि जो लोग सचिन पायलट को कमजोर करने के लिए पाँचना बांध पर बैठे है; उनसे दूर रहो..! जय जवान - जय किसान.! #SachinPilot
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तांत्रिक vs जादूगर ...
सचिन #पायलट जी ने कहा जब मैं #कॉलेज में पढ़ता था एक बहुत बड़ा #तांत्रिक चंद्र #स्वामी था उससे बड़े-बड़े लोग #डरते थे उनको #पायलट साहब ने गृह #मंत्रालय में काम करते हुए #हथकड़ी लगा दी थी और जेल में डाल दिया।। है तो हम #जादूगरों से डरने वाले नहीं है #SachinPilot Sachin Pilot
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नार्को टेस्ट..?
अगर हमने 10-10 करोड़ #रूपये लिए हैं तो हमारा #नार्को टेस्ट करवाइये ओर आपका भी करवाइए गहलोत साहब मैं आपको चैलेंज करता हूं #गहलोत जी की आपने #BAP ओर #निर्दलीयों को कितने रुपए दिए। हमारे पास #सबूत हैं - रमेश मीणा(पूर्व कैबिनेट मंत्री) #Rahul #Gandhi #Sachin #Pilot #Ramesh #Meena
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रामकेश की संकुचित सोच का शानदार जवाब....
सचिन पायलट जी ने स्पष्ट कहा है जो आतंकवादी मानसिकता से ग्रस्त प्रोपेगेंडा धारी है आम समाज उनसे दूरी बनाकर रखें और जो धरने पर बैठे रिटायर फौजियों , किसानों को आतंकी- नक्सली बोल सकते है ऐसे देशविरोधी तत्वों से सावधान रहें उनके झूठ का पर्दाफाश करें।
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Real hero...
राजेश पायलट का आख़िरी राज़….
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नैतिकता कहां है...
किरोड़ी लाल मीणा देंगे इस्तीफ़ा और होगी निष्पक्ष जांच ? अब इस्तीफ़ा दे ही देना चाहिए जब यह कागज सामने है! पद पर रहते कैसे होगी जाँच ? बड़े सवाल….क्या नैतिकता दिखाएँगे “बाबा” youtu.be/bR1qnXIPVjQ?si=qgFQ…
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क्लांतिकलियों ये क्या खेला हो गया।।
एसीबी की एफआईआर में ‘डॉक्टर साहब’ और ‘मंत्री जी’ का भी जिक्र है। सुनील सैनी ने सुनील सेतिया से कहा- ‘डॉक्टर साहब का फोन आया था।’ जुगल विश्नोई ने अपने भांजे स्वतंत्र से कहा- ‘संदीप वाले लफड़े से सारा ही मामला उजागर हो गया, गंगानगर वाला पेमेंट मंत्री जी को कुछ नहीं आया।’
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“डीपी जारोली तो अपना आदमी है” अशोक गहलोत के OSD रहे लोकेश शर्मा (@_lokeshsharma) ने #प्वाइंट_की_बात पॉडकास्ट में एक ऐसी ऑडियो रिकॉर्डिंग पेश की है जिससे राजस्थान की राजनीति में नया भूचाल आ सकता है… बड़े खुलासे वाली पूरी बातचीत जल्दी ही youtube.com/@umashankarsingh… पर
⚡️एक विस्फोट पॉडकास्ट ⚡️ जल्दी ही #प्वाइंट_की_बात में सब्सक्राइब कीजिए और थोड़ा सा इंतज़ार कीजिए youtube.com/@umashankarsingh…
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जनता से बड़ी कोई पीआर एजेंसी नहीं है सर 🙏
मुझे पता नहीं, यह सच है या झूठ; लेकिन यह बताया गया कि कुछ रोजनेताओं ने भारी भरकम पैसा देकर मुंबई की पीआर एजेंसीज को हायर किया हुआ है और वे जिस तरह कह रही हैं, उस तरह राजनेता कर रहे हैं। हमारी राजनीति और हमारे राजनेताओं का अपने संकीर्ण लाभों के लिए पीआर एजेंसियों वाले और इवेंट वाले किस तरह सत्यनाश कर रहे हैं, यह एक भयावह खेल हो गया है। उन्होंने दुनिया के संचार सिद्धांतों का कुछ पता नहीं है कि वे पत्रकारिता में कैसे काम करते हैं और राजनीति में कैसे। सोशल मीडिया में उनका क्या प्रभाव रहता है और आम जीवन में क्या। इस हम कल या आज ही उदाहरण से समझ सकते हैं। जब कोई बड़ा और बुजुर्ग नेता किसी युवा नेता पर वार करे तो उस बारे में पब्लिक मनोविज्ञान क्या कहता है? राजनीति में शब्द केवल विचार नहीं होते। वे संकेत होते हैं। और संकेत अक्सर वह कह देते हैं, जो वक्ता कहना नहीं चाहता। कोई दो दशक पहले चुनाव विश्लेषक वाली योनि में रहते हुए योगेंद्र यादव ने दॅ हिन्दू में लिखा था कि चुनाव में जो हाेता है, वह दिखता नहीं और जो दिखता है, वह होता नहीं। इसे मैं नाना प्रकार के लोगों के यहाँ कल से 57 बार पढ़ चुका हूँ। बड़े-बड़े लोगों के पास मौलिक सोच नहीं है और वे एक बंजर दृष्टि के शिकार हैं। तो अब मूल बात पर। कोई वरिष्ठ, अनुभवी और स्थापित नेता किसी युवा पर सार्वजनिक रूप से सीधा प्रहार करता है तो वह युवा को नहीं, स्वयं को परिभाषित कर रहा होता है। क्योंकि शक्ति का पहला नियम यह है कि जो वास्तव में शक्तिशाली होता है; वह प्रतिक्रिया नहीं देता, वह दिशा देता है। तीन बार के मुख्यमंत्री, दशकों का राजनीतिक अनुभव, लाखों कार्यकर्ताओं का विश्वास और इतने तपेतपाए इनसान यानी यह सब लिए हुए कोई नेता जब किसी युवा के नाम पर बेचैन होता है तो जनमानस में एक ही प्रश्न जन्म लेता है, "इतने बड़े नेता को इस युवा से क्या भय है?" यह प्रश्न ही युवा की सबसे बड़ी राजनीतिक पूँजी बन जाता है। वरिष्ठ नेता ने कुछ कहा, पर जनता ने कुछ और सुना। और जनता जो सुनती है, वही सत्य बन जाता है। हम लोग पत्रकारिता के विद्यार्थियों को संचार सिद्धांत सिखाते हैं तो उन्हें बताते हैं कि मनोविज्ञान में psychological reactance का सिद्धांत राजनीति के बारे में क्या कहता है। यह सिद्धांत कहता है कि जब किसी को सार्वजनिक रूप से दबाया जाता है तो दर्शक स्वतः उसके प्रति झुकने लगते हैं। यह कोई सोची-समझी सहानुभूति नहीं। यह मानवीय स्वभाव की सहज और अनायास प्रतिक्रिया है। प्रहार जितना बड़े मंच से हो, सहानुभूति उतनी गहरी और व्यापक होती है। युवा नेता बिना कुछ किए, केवल निशाने पर रहकर एक ऐसी छवि अर्जित कर लेता है, जो वर्षों की मेहनत से भी शायद न बनती। यानी हमला किस पर हो रहा है? और क्यों हो रहा है? क्योंकि वह इतना ताक़तवर है कि इतने बड़े व्यक्ति का हमला उस पर ज़रूरी हो जाता है। पत्रकारिता में हम विद्यार्थियों को यह भी सिखाते हैं कि social proof का वह सिद्धांत क्या है, जो राजनीति में सबसे निर्मम सत्य की तरह काम करता है। जनता यह नहीं देखती कि कौन क्या कह रहा है; जनता यह देखती है कि कौन किसके बारे में बात करने पर विवश है। जिस युवा का नाम वरिष्ठ नेता बार-बार लेते हैं, वह युवा जनता की दृष्टि में relevant, significant और inevitable हो जाता है। वरिष्ठ नेता सोचते हैं कि वह युवा को छोटा कर रहा है; वास्तव में वह हर बार उसे स्थापित कर रहा होता है। यह राजनीतिक आत्मघात है। धीमा, अदृश्य, पर निश्चित। इससे भी गहरी बात यह है कि जिस क्षण वरिष्ठता प्रतिक्रिया में उतरती है; वह अपना स्तर स्वयं तय कर देती है। दो नेता जब एक ही मैदान में खड़े दिखते हैं तो जनता उन्हें बराबर मानने लगती है। और जब मैदान बराबर हो तो वह युवा का होता है। क्योंकि युवा के पास खोने को कुछ नहीं और पाने को सब कुछ है। वरिष्ठ के पास खोने को प्रतिष्ठा है; जिसे उसने जाने कैसे-कैसे त्याग करके, कैसे काम करके, कैसी-कैसी ज़हरीली अनुभूतियों को आत्मसात करके अर्जित किया है और एक बार खोई प्रतिष्ठा लौटती नहीं। इतिहास में जो नेता अमर हुए; वे इसलिए नहीं कि उन्होंने हर प्रहार का उत्तर दिया, इसलिए कि उन्होंने जाना कि कौन से प्रहार का उत्तर न देना ही सबसे बड़ा उत्तर है। मौन केवल चुप्पी नहीं; वह एक रणनीति है और प्रायः सबसे शक्तिशाली। जो सच में अप्रासंगिक होता है, उसका नाम नहीं लिया जाता। वरिष्ठ नेता का हर सार्वजनिक प्रहार युवा का वह परिचय लिखता है जो युवा स्वयं कभी न लिख पाता। राजनीति की यही सबसे बड़ी विडंबना है; और यही उसका सबसे निर्मम और शाश्वत सत्य भी। और यह वही ग़लती है, जो देश के शीर्षस्थ राजनेता और भाजपा के शिखर पुरुष राहुल गांधी के बारे में करते रहते थे। 
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