एक पौधा (मारा) मां के नाम
दूजा पौधा (मारा) बाप के नाम..
पर्यावरण दिवस है। अभी प्लांटेशन सीजन भी आने वाला है। झूम झूम कर पौधे लगाये जायेंगे। फोटो खींचे जाएंगे। निवेदन है, पौधे न लगायें।
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एक पौधा कम से कम 2 साल ठीक ठाक केयर मांगता है। बीज से उगना, पॉलीथिन में बढ़ना, साइट पर जाकर रखना- वहां एकलामेटाइज होना..
फिर नई जमीन, खाद, पानी, मौसम, कीट पतंगे, बीमारी, बकरी, बैल, ड्राई स्पेल- सब झेलकर वह खड़ा होता है, सर्वाइव करता है। और सब कुछ ठीक से करो तो भी 20% मोर्टालिटी आ ही जाती है।
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लेकिन जब आप मां के नाम, पौधा धरती में घोंपकर भाग आते है, उनमे 50% पौधे दो माह के भीतर सफाचट हो जाते वे। साल भर के बाद 95 से 98%
2 से 5% अपनी किस्मत औऱ निर्लज्जता से जी जाते हैं।
याने यदि 5 लाख पेड़ लगे, तो 4.95 लाख मर गए।
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तो जो लोग, संस्थान, क्लब वगैरह दावा करते है कि 15 लाख पौधे लगा दिये, एक करोड़ लगा दिए। तो वहां यह मत सुनिए की पौधे कितने लगाए।
5% घटा दीजिये। तो वास्तव में वह बता रहा है कि मैंने 95 लाख पौधे मार डाले। एक अपनी माँ के नाम से मारा,
दूजा आपकी मां के नाम से,
तीसरा नेताजी की मां के नाम से मार आया।
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लब्बोलुआब यह, कि साल दो साल उस पौधे की देखभाल करने का जिम्मा लेते हैं, तो पौधा लगाइये। वरना तौबा कीजिये।
पौधा मत लगाइये।
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