Joined December 2023
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10 Dec 2025
RT @Prashant_Advait: Would you trust a cricket match where the umpire owns one of the teams? That’s exactly what media ownership looks lik…
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4 Dec 2025
As someone who spent a couple of years sitting at the feet of Acharya' jee @Advait_Prashant (being a student) studying the Bhagavad Gita, something shifted irreversibly inside me: I can no longer watch religious traditions (any tradition, including my own Muslim heritage) harm children in the name of “spirituality” and stay silent. Acharya taught us that true scripture is meant to liberate the mind, not imprison it; it is fire that burns ego, not a whip that breaks a child’s spirit. Every time I see these viral videos now (a little boy collapsing in tears after memorising the entire #Quran, adults cheering as if he’s been touched by God instead of pushed to the edge), something boils in me. This is no longer “their problem” or “our beautiful tradition.” This is my community still traumatising its children, century after century, and calling the tears “khushu” and the breakdown “love for Allah.” I stayed quiet for too long out of guilt and fear of being labelled Islamophobic. No more. If the Gita made me fall in love with truth, then truth now demands I speak when I see a 10-year-old’s childhood sacrificed on the altar of mechanical memorisation.
4 Dec 2025
Replying to @salahudeen33
Poor child. Imagine being ten years old, sobbing uncontrollably, not because you’ve understood a single profound truth, but because you’ve finally managed to cram 604 pages of 7th-century Arabic into your memory through endless repetition, fear of punishment, and the crushing pressure to perform “greatness” for adults who equate memorisation with piety. This isn’t enlightenment; it’s a tragedy dressed up as triumph. A child’s brain is being turned into a hard drive for sounds he barely comprehends in a language he may not even speak fluently. No critical thinking, no questioning, no space to wrestle with meaning—just parrot, cry, get praised, repeat. That’s how you manufacture certainty instead of wisdom, obedience instead of understanding. This is exactly why large parts of the Ummah remain stuck in literalism, ritualism, and defensiveness: generations taught from childhood that the highest spiritual achievement is to turn yourself into a human tape recorder, not to live the message, challenge it, or grow through it. If the Quran truly is a mercy and guidance for mankind, then forcing terrified children to memorise it without comprehension is one of the greatest disservices we could do to both the child and the Book. Allah’s “wrath” isn’t in earthquakes or poverty; it’s in watching His words reduced to a traumatic memory contest while justice, reason, and compassion are neglected. Let the boy deserves medals for endurance, therapy for the trauma, and the freedom to actually understand what he spent years reciting through tears. That would be something worth celebrating. #childabuse #religioustrauma #brainwasted #muslimkids
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Why politicians, spiritual leaders and businessman are often seen together? 1. 🧑‍⚖️ Politicians Want: Mass Influence Money From spiritual leaders: Access to large, loyal followings (votes). From businesspeople: Funding for elections, parties, or campaigns. ❝A spiritual guru can get you 10,000 votes; a businessman can fund your campaign.❞ 2. 🕉️ Spiritual Leaders Want: Protection Legitimacy From politicians: Legal protection, land allotments, and media silence during controversies. From businesspeople: Donations, buildings, tech, and infrastructure. ❝Being close to power shields their ashram, land, and image.❞ 3. 💼 Businesspeople Want: Connections Clean Image From politicians: Favorable policies, access to contracts, less red tape. From spiritual leaders: A "clean" public image, especially in traditional societies. ❝A photo with a spiritual guru can clean your public image even after a scam.❞ 🔍 Why This Triangle Works So Well Spiritual influence = emotional control over people. Political power = legal and media control. Money = influence over both of the above.
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प्रश्न: क्लाइमेट चेंज से बचने के लिए, अभी कुछ भी कर नहीं सकते? * ये कार्बन डाईऑक्साइड 280 से 480 ppm की करतूत इंसान की है, अपने आप को सबसे बुद्धिमान प्रजाति कहने वाली मनुष्य प्रजाति ने। फीडबैक लूप शुरू होने के बाद आपको कुछ नहीं करना, सबकुछ अपने आप एक चक्रीय प्रक्रिया में होता है। ग्लेशियर के पिघलने के बाद मिथेन गैस निकलती है, जो वो CO2 से बीस गुना घातक है। * Co2 के अवशोषण की लिमिट पार करी जा रही है। Par capita emissions: भारत का अभी भी सस्टेनेबल लिमिट के अंदर है, दुनिया की 90% आबादी ही ऐसी ही है। कातिल है टॉप 10 % हम हजारों साल में भी उतना एमिशन नहीं करते जितना ये 10% वाले करते हैं। इन 10% को सपोर्ट हम ही करते हैं। पूरा सोशल मीडिया चंद 5- 7 ने नियंत्रित कर रखा है। जितना आप शॉपिंग कर रहे हैं ये लोग और शक्तिशाली होते जा रहे हैं। ढंग की कोई चीज़ कभी वायरल नहीं होती। कारण है इनके प्लांड एलोगोरिदम। किसने ये बात आम मन में डाल दी कि गुड़ लाइफ के लिए गाड़ी आवश्यक है। हमारी इच्छा हमारी नहीं, किसी दूसरे ने हममें डाली है। हमारी हर इच्छा से इन लोगों का और फायदा होता है। बात पूंजीवाद के विरोध की नहीं है। लोभ, मद, कारण है मुख्य इस भीगने की लालसा के पीछे। जिंदगी की मूलभूत फ़िलोस्फी बदले बिना कोई सुधार नहीं हो सकता। मरने का नंबर गरीब का आता है पहले। ये जो आदर्श बना रखे हैं, ये ही तुम्हारे जान के दुश्मन है, समझ में क्यों नहीं आती बात ! तरक्की करो और कार्बन फुट प्रिंट नहीं बढ़े ये नहीं हो सकता। तरक्की की परिभाषा भी हमारे मन में ठूंसी गई है। तरक्की की असली परिभाषा बताने का प्रयास ही संस्था कर रही है। हम है कौन ? जब ये पता नहीं तो हमें चाहिए क्या, कैसे पता ? आत्म ज्ञान का अभाव ही क्लाइमेट चेंज बनता है अपनी वास्तविक तकलीफ को हटाना ही तरक्की है। मछली के लिए रेगिस्तान में महल का क्या उपयोग ! तुम वो हो नहीं, जो तुम अपने आप को मानते हो। ऑपरेशन 2030 क्लाइमेट चेंज से ही जुड़ा है। आपके सपने आपके है ही नहीं, वो भी दूसरों द्वारा आरोपित है। हमारी मान्यताएं हममें चोरी छिपे फिट कर कर दी गई है। चारों तरफ़ देखो तो, पूरी पृथ्वी प्रमाण दे रही है कि हमने ग़लत जीवन जिया है और जिए ही जा रहे हैं। तुम्हें आने वाली पीढ़ी को जवाब देना होगा, क्या जवाब दोगे, बच्चे पूछेंगे जब धरती जल रही थी तुम क्या रहे थे ? नेताजी, बाबाजी और लालाजी की तिकड़ी ने इस समस्या को दबाने के लिए प्रयास में भरपूर योगदान किया है। हर 0.1 राइज पर हजारों प्रजातियां ख़त्म हो जाती है। पृथ्वी पर 70 % खेती जानवरों को खिलाने के लिए की जाती है, जानवरों जिनको इंसान मार करके खाता है। हमारी सब वैल्यूज भोग को बढ़ाती है। हमारी वैल्यूज एमिशन फ्रेंडली हैं। त्यौहार भी हमारे एमिशन फ्रेंडली है। क्लाइमेट चेंज को यही चीज़ (अध्यात्म) रोक सकती है बस! दो फैक्टर: कितने व्यक्ति है और कितना भोगता है। दानव वही जो पृथ्वी को बर्बाद करे। किसी भी इंसान का मूल्यांकन उसके कार्बन फुट प्रिंट से होना चाहिए। ग्रीन टैक्स जैसी व्ववस्था होनी चाहिए। जिससे मांस महंगा हो। ________ 06.08.25, 00:33 #AcharyaPrashant @Advait_Prashant Posted by Seva Ram Kumawat on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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31 Jul 2025
यहाँ लोकधर्म, परंपरा, अंधविश्वास और सामाजिक संरचना के नाम पर महिलाओं पर किए गए अत्याचारों और उनसे जुड़ी मृत्यु के आंकड़ों को एक समेकित रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह विवरण ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कानूनी साक्ष्यों के आधार पर संगठित किया गया है: --- 🕯️ धर्म, परंपरा और समाज के नाम पर स्त्रियों पर कुप्रथाओं का समेकित लेखा-जोखा --- 🔥 1. सती प्रथा (भारत) परिभाषा: पति की मृत्यु के बाद पत्नी को उसकी चिता में जीवित जलाना। समयकाल: 4वीं शताब्दी से 19वीं शताब्दी तक क्षेत्र: बंगाल, राजस्थान, मध्य भारत मृत्यु आंकड़ा: अनुमानतः 30,000 से 1,00,000 महिलाओं की मौत केवल 1815–1828 के बीच बंगाल में 8,000 घटनाएँ दर्ज विशेष टिप्पणी: कई बार स्त्रियों को बलपूर्वक सती कराया गया। --- ⚰️ 2. ऑनर किलिंग (सामाजिक इज्जत के नाम पर हत्या) परिभाषा: जाति, धर्म या परिवार की ‘इज्जत’ के नाम पर महिला (ऑनर किलिंग में पुरुषों को भी मारा जाता था और अब भी मारा जाता है, विशेषकर उन मामलों में जहाँ वे किसी ऐसी महिला से प्रेम, संबंध या विवाह करते हैं जो समाज, परिवार या जाति की मर्यादाओं के विरुद्ध हो।) की हत्या। समयकाल: प्राचीन से लेकर वर्तमान क्षेत्र: भारत, पाकिस्तान, मिडल ईस्ट, अफ्रीका मृत्यु आंकड़ा: विश्व स्तर पर 5,000 हत्याएँ प्रति वर्ष (UNFPA) भारत में औसतन 200–300 केस प्रति वर्ष दर्ज, असल संख्या अधिक विशेष टिप्पणी: अधिकांश हत्याएँ अंतरजातीय विवाह या प्रेम के कारण होती हैं। --- 🧙‍♀️ 3. विच हंटिंग (डायन प्रथा) परिभाषा: किसी महिला को 'डायन' कहकर सामाजिक बहिष्कार, प्रताड़ना या हत्या। समयकाल: यूरोप: 1450–1750 भारत: आज भी जारी क्षेत्र: यूरोप (Germany, England, France) भारत (झारखंड, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़) मृत्यु आंकड़ा: यूरोप में 40,000–1,00,000 लोगों की हत्या, जिनमें 70–85% महिलाएँ भारत में 2000–2016 तक 2,500 महिलाएँ मारी गईं (NCRB) विशेष टिप्पणी: अंधविश्वास, ज़मीन कब्ज़ा और महिलाओं की स्वतंत्रता से भय इसका कारण। --- 💍 4. देवदासी प्रथा परिभाषा: मंदिर सेवा के नाम पर लड़कियों को यौन गुलामी में धकेलना। समयकाल: प्राचीन काल से 20वीं सदी तक (आज भी सीमित रूप में जारी) क्षेत्र: दक्षिण भारत, खासकर कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र मृत्यु आंकड़ा: हज़ारों महिलाएँ शारीरिक, मानसिक और सामाजिक मृत्यु का शिकार 2007 में कर्नाटक में 22,000 से अधिक देवदासियाँ सक्रिय थीं विशेष टिप्पणी: यह यौन शोषण को धार्मिक आस्था का जामा पहनाने वाली प्रथा थी। --- 🩸 5. FGM – Female Genital Mutilation (स्त्री जननांग विकृति) परिभाषा: यौन इच्छाओं पर नियंत्रण हेतु लड़कियों के जननांगों को विकृत करना। समयकाल: आज भी सक्रिय क्षेत्र: अफ्रीका, मध्य एशिया, इंडोनेशिया मृत्यु आंकड़ा: 20 करोड़ महिलाएँ प्रभावित (WHO) हर साल 3–4 मिलियन लड़कियाँ शिकार बनती हैं हजारों मौतें असुरक्षित प्रक्रिया, संक्रमण और मानसिक आघात से विशेष टिप्पणी: इसे 'संस्कार' के रूप में ढका गया, लेकिन यह क्रूर यौन हिंसा है। --- 👣 6. फुट बाइंडिंग (चीन) परिभाषा: स्त्री के पैरों को जबरन बाँधकर विकृत करना ताकि वे छोटे रहें (सौंदर्य के नाम पर)। समयकाल: 10वीं–20वीं सदी क्षेत्र: चीन मृत्यु आंकड़ा: 10 करोड़ से अधिक महिलाएँ प्रभावित प्रत्यक्ष मृत्यु नहीं, परंतु आजीवन अपंगता, संक्रमण, मानसिक और सामाजिक पीड़ा विशेष टिप्पणी: यह स्त्री को 'सुंदर' दिखाने के नाम पर 'विकलांग' बनाने की प्रक्रिया थी। --- ⚖️ 7. कोवर्चर कानून और वैवाहिक बलात्कार (ब्रिटेन व यूरोप) परिभाषा: स्त्री की कानूनी पहचान शादी के बाद समाप्त होना; पति की संपत्ति बन जाना। समयकाल: 17वीं–20वीं सदी क्षेत्र: यूरोप, अमेरिका मृत्यु आंकड़ा: प्रत्यक्ष हत्या नहीं, लेकिन मानवाधिकार हनन और मानसिक यातना से असंख्य आत्महत्याएँ विशेष टिप्पणी: स्त्री के लिए "जीवित रहते हुए गुलामी" का कानूनी ढाँचा। #AcharyaPrashant @Advait_Prashant Posted by Nitish Verma on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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31 Jul 2025
🌸किसी ने मुझसे कहा आचार्य जी को मत सुनो वरना सब खो दोगे। 🪔मैंने कहा मैं आपकी बात से सहमत हूँ जब से मैंने आचार्य जी (@Advait_Prashant) को सुनना शुरू किया जीवन से डर, लोभ, मोह, बुरा आचरण सब कुछ खोता चला जा रहा है। #AcharyaPrashant Posted by Neetu Ranawat on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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13 Jul 2025
संघर्ष अपने विरुद्ध :: इस किताब में पेज संख्या 103 पर जो चेप्टर है कि "तुम्हारे साथ हो वही रहा है जो तुमने तय किया है" उसको पढ़ने के बाद समझ आया सच में हम अपनी परिस्थिति के ज़िम्मेदार खुद होते हैं। कैसे ? मैं बहुत समय से अध्यापक पद के लिए प्रयासरत हूॅं और अभी कहीं मेरा चयन नहीं हुआ है, तो मेरे परिवार का रवैया मेरे लिए इतना निराशाजनक है कि मैं बता नही सकती हूँ और अब ज़बरदस्ती शादी के लिए दबाव बना रहे हैं। फिर मुझे समझ आया अब ऐसे नहीं चलेगा और मैंने तय किया घर से बाहर निकल कर अपनी ज़िंदगी का सफर क्योंकि वो मुझसे कहने लगे या तो शादी करो नहीं तो निकलो हमारे घर से 😣 अब मैं नहीं जानती आगे क्या होगा लेकिन इतना पता है हार नहीं माननी और अपने जीवन को बेहतर बनाना है। धन्यवाद! आचार्य जी @Advait_Prashant #AcharyaPrashant Posted by Sona singh on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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13 Jul 2025
आज मेरे CA के शिक्षक ने कहा — "मेरी रैंक मेरी कुंडली की वजह से आई थी।" मैं चौंकी भी नहीं, दुखी भी नहीं — भीतर एक सवाल गूंजा: "फिर मेहनत क्या होती हैं? क्या इंसान सिर्फ एक ग्रहों की कठपुतली मात्र है ?" मैंने Acharya Ji (@Advait_Prashant) से सिखा है कि — "तू ग्रह नहीं है, ना शरीर है, ना मन है। > तू 'वह' है — जो इन सबसे पहले था और इनके बाद भी रहेगा।" अगर मेरी रैंक ग्रहों से तय होती, तो क्या मैं अभ्यास नहीं छोड़ देती? क्या मेरी रातों की नींद, सुबह की थकावट, वो सब कुछ जो मैंने सहा — क्या वो सब व्यर्थ था? अब समझ आता है कि — वैसे भी रैंक कोई उपलब्धि नहीं, एक घटना होती है । और मैं? — जो अपनी ही माया में फँसकर कभी रैंक बन जाता है, कभी डर अब मैं ग्रहों से नहीं डरती ना ही रैंक से खुद को ऊँचा समझती हूँ। मैं उस 'मैं' की ओर चल पड़ी हूँ — जो न रैंक है, न फेल, न ग्रह है, न लक्ष्य। और इस सबके लिए मै अनुगृहित महसूस करती हु कि आचार्य जी बचा लिया अपने बहुत बहुत बड़ी उलझनों से 💕 #AcharyaPrashant Posted by soniya on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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13 Jul 2025
प्रणाम आचार्य जी (@Advait_Prashant) ,🪔 अवलोकन 12/07/25 "मैं आज पहली बार श्मशान गई थी। वहाँ जाकर मैंने कुछ देखा नहीं, बल्कि बहुत कुछ महसूस किया। मुझे लगा, जैसे पहली बार जिंदगी का असली चेहरा सामने आया हो। वहाँ बहुत से लोग थे, लेकिन ज़्यादातर लोग सिर्फ रस्म निभा रहे थे, मान्यताओं में बंधे हुए थे। हम सब जो जी रहे हैं, वो झूठ के सहारे जी रहे हैं। मैंने तय किया है कि मैं अपना हर फैसला, अपनी समझ से लूंगी। मैं अब जीवन को जागकर, देखना चाहती हूँ — न कि सिर्फ परंपराओं के हिसाब से। क्योंकि मौत के सामने सिर्फ सच्चाई टिकती है।"🪔 #AcharyaPrashant Posted by Dipika on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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12 Jul 2025
मुक्ति का अर्थ क्या है? 🤔 🌿 मुक्ति का अर्थ है उसे छोड़ देना जिसकी तुम्हारे लिए वास्तव में कोई उपयोगिता नहीं है। 🧘‍♂️ ईमानदारी से स्वयं से पूछना कि "मैं कौन हूँ?" और मुझे वास्तव में क्या चाहिए। 🕊️ जो कुछ तुम्हें चाहिए उसके अतिरिक्त जो भी तुमने पकड़ रखा है, उसे त्याग देना ही मुक्ति है। 🌅 मुक्ति का मतलब केवल छोड़ना ही नहीं, बल्कि जो तुम्हारे लिए आवश्यक है उसे पाना भी है। ~ आचार्य प्रशांत @Advait_Prashant #AcharyaPrashant Posted by Ajit singh jhala on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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12 Jul 2025
जानते हो ये चश्मे क्या हैं, किसलिए हैं?? किसने दिए?? क्या ये सिर्फ चर्मचक्षु के लिए हैं? जब मैं छोटी थी, तो मुझे दूर की चीज़ें धुंधली दिखने लगी थीं। स्कूल की ब्लैकबोर्ड पर लिखा कुछ भी पढ़ना मुश्किल हो जाता था। आँखें दर्द करती थीं, सिर भारी लगता था। मम्मी-पापा ने मेरे चश्मा नहीं बनने दिया। "अगर लड़की ने चश्मा पहन लिया तो कौन चश्मे वाली लड़की को पसंद करेगा?" मैं ज़िद करती रह गई और अब जब बिना चश्मे वाली को एक दुर्योधन के साथ बाँध दिया तब उसे (पापा-मम्मी )सुकून मिल रहा था। आँखों से ज़बरदस्ती काम कराने के कारण फिर धीरे-धीरे आँख के नंबर और बढ़ने लगे, भयंकर सर दर्द भी, जैसे मैं पागल ही हो गई। वो तो चाहते ही यही हैं कि मैं पूरी अंधी ही हो जाऊँ, भीतर से भी, बाहर से भी। चश्मा जैसे कोई बीमारी हो गया, कोई कलंक, कोई पाप!! मैं बस हैरान-सी रह जाती थी — क्या साफ़ देख पाना इतना बड़ा अपराध है? मैंने बरसों तक धुंध में जीने की कोशिश की। सिर्फ चीज़ें ही नहीं, खुद को भी धुंधला देखती रही। कभी अपनी चाहतों पर सवाल उठाने लगी। दर्पण में चेहरा नहीं, बस एक अस्वीकार झलकता था। लेकिन फिर जीवन में आचार्य प्रशांत (@Advait_Prashant) आए। ये चश्मे आचार्य जी ने ही दिए हैं, भीतरी भी और बाहरी भी। उन्होंने सिखाया कि समाज का डर, रिश्तों की सहमति और परंपरा की बेड़ियाँ – ये सब असली आँखों पर पट्टी हैं। उनकी बातों ने जैसे भीतर कुछ तोड़ दिया… और उसी टूटन में से मेरी दृष्टि जागी। एक दिन मैं बिना किसी से कुछ कहे, बिना अनुमति लिए, सीधे डॉक्टर के पास चली गई — पहली बार खुद के लिए। चश्मे का नंबर नज़रों का था, लेकिन निर्णय का नंबर पहली बार मेरे नाम हुआ था। आज जो चश्मा मैं पहनती हूँ, वह सिर्फ़ नज़र सुधारने का साधन नहीं, वह उस समाज के अंधविश्वास को चुनौती है जिसने मुझे देखने से वंचित रखा। यह चश्मा मेरे आत्म-सम्मान का प्रतीक है। "अब मैं चीज़ों को वैसे देखती हूँ जैसी वे हैं, ना कि जैसी मुझे दिखायी जाती थीं।" मैं आभारी हूँ उस दृष्टि के लिए जो आचार्य जी ने दी।🙏🏻 और अब जब मैं अपनी आँखों पर चश्मा लगाती हूँ, तो मुझे वो लड़की याद आती है जो धुंध में भी सच्चाई ढूँढ रही थी। अब ये लड़की साफ़-साफ़ देख सकती है — खुद को, समाज को और सत्य को। ये चश्मे सिर्फ चर्मचक्षु के लिए नहीं हैं। बात आंतरिक सफाई की है। आचार्य जी ने दिए हैं। ❤️ #AcharyaPrashant Posted by Sonalee on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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12 Jul 2025
बचपन से मैं भी अपना सबसे अच्छा मित्र वैसे ही चुनती थी, जैसे बाकी लोग चुनते हैं। लेकिन धीरे-धीरे मैंने देखा कि जो लोग "सबसे अच्छे दोस्त" कहलाते हैं, वे वास्तव में न तो मेरे सच्चे मित्र हैं, न शुभचिंतक। तब मैंने निर्णय लिया कि मैं अपने माता-पिता को ही अपना सबसे अच्छा मित्र मानूंगी, क्योंकि इस दुनिया में वही दो लोग हैं जो वास्तव में मेरा भला चाहते हैं। लेकिन उनका अत्यधिक मोह मेरे पूर्ण स्वतंत्रता के मार्ग में रुकावट बनता रहा। फिर मेरी मुलाक़ात आपसे हुई, आचार्य जी (@Advait_Prashant)। और आपने मुझे मेरी सबसे मूल्यवान मित्र भेंट की — "आध्यात्मिकता"। जो हर पल मुझे आत्मविकास की ओर प्रेरित करती है,जो मुझे सच्ची स्वतंत्रता का मार्ग दिखाती है। इस अनमोल मित्र को देने के लिए, आपका हृदय से धन्यवाद आचार्य जी🙏🏻🙏🏻। #AcharyaPrashant Posted by RAKHI SAMUI on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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11 Jul 2025
पाखंड और अंधविश्वास जानलेवा है instagram.com/reel/DL41J7-i4… #AcharyaPrashant @Advait_Prashant Posted by Karuna Chandra on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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11 Jul 2025
बोध कार्य- मेरी गीता यात्रा आचार्य जी को पहली बार मैंने facebook की post के माध्यम से देखा था और उनको सुनना मैंने youtube से शुरू किया था | पहला वीडियो जो मैंने सुना था वो था "आप किसी को न क्यूँ नहीं कह पाते" | मेरे लिए एकदम alarming था वो सब | थोड़ा समय लगा स्वीकारने में | फिर एक बार जब सुनना शुरू किया तो सुनती रहती थी घंटों | कई बार दिन की शाम हो जाती और रात तक भी सुनती रहती | हाथ पैर घर के कामों में लगे रहते और earphones हमेशा कानो में | ऐसा लगा कोई बात करने वाला मिला है जीवन में पहली बार | आचार्य जी कहते थे अभी तो बहुत राज़ खुलेंगे | अभी तो बहुत बातें हैं करने को | पास बैठो तो करें | मुझे भी जाननी थी वो सारी बातें | कैसे जाउंगी | फिर कुछ videos बार-बार सुने | उनमें से एक था "जो चेतन वो भी जड़" बहुत बार सुना कई बार सुनते - सुनते काम छोड़ कर बैठ जाती थी वहीं सीढ़ीयों पर और सुनती--- कैसे जड़? क्या कैसे? एक video वो था जो आचार्य जी गंगा जी की मूर्ति को देख कर समझा रहे थे | वो भी बहुत बार सुना और एक था "उधार चुकाओ मुक्ति पाओ" और उस समय जैसे जानवर से इंसान बन रही थी | आज जब उन दिनों की तस्वीरें निकाल रही थी फ़ोन से, काफी समय baad देख रही थी | खुद समझ आ रहा था देख कर कि कितनी लम्बी प्रक्रिया रही है मेरे बदलाव की | कैसे गढ़ा है आचार्य जी ने मुझे, कितनी मेहनत करी | जैसे-जैसे सुनती गयी, सहजता आती गयी | पहले की तस्वीरों में और आचार्य जी के आने के बाद की तस्वीरों में ही बहुत अंतर दिख रहा था | पहली दो तस्वीरें आचार्य जी के बस आने की हैं उसके बाद सब उनको सुनने के समय की | बहुत पुरानी तो देख कर लगता है ये कोई और ही है | मैं सोचती ही थी कि और कौन सी बातें करते होंगे आचार्य जी, जो जा सकते हैं उनके साथ कितनी बातें होंगी, कितना कुछ जानने को मिलेगा उनको | ये सब चल ही रहा था मन में और एक दिन संस्था से कॉल आ गया | मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा और कह रहे थे कि पूरी गीता यात्रा शुरू हो चुकी है | आचार्य जी पढ़ा रहे हैं | ऐसा लग रहा था जैसे प्यासे को विशाल जल स्त्रोत | मेरी उत्सुकता की कोई सीमा नहीं थी | काफी मुश्किलें थी, विरोध था | मुझे लेकिन सब backgroud में चलता दिख रहा था | गीता यात्रा दिख रही थी बस | आज जो भी हूँ, जैसे भी हूँ | जितना भी कुछ शुभ है | सब गीता यात्रा की देन है | बोध जैसा कुछ हो सकता है जीवन में ये सिर्फ आचार्य जी (@Advait_Prashant) ने बताया | बहुत-बहुत सुधरी हूँ, और साफ होते जाना है | लेकिन कभी- कभी दौरे पड़ जाते हैं अभी भी | आदत नहीं हैं इतना सही चलने की लगातार | तो बीच -बीच में दौरे पड़ जाते हैं | ये जाते हुए के fits हैं | छुटपन को अगर चोट लगे संघर्ष की वजह से तो छुटपन छोड़ो गुरु को नहीं | साफ होता मैं ही आत्मा है | #AcharyaPrashant Posted by Sunita on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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11 Jul 2025
2023 Vs 2025 2021-2023 मैं बहुत ज़्यादा महादेव🔱 को मानती थी, college passout के बाद 1 साल तक job नहीं लगी थी तो किसीने बताया था 16 सोमवार रखो, फिर मेरी job लग गई, तो मेरे अंदर अंधविश्वास पैदा हो गया था की महादेव एक बहुत बड़े देवता हैं । फिर मैं हर सोमवार व्रत रखती थी, ऐसा लगता था वो हमेशा मेरे साथ हैं, फिर मुझे मेरे भाई ने आचार्य जी के बारे में बताया, मैंने ध्यान नहीं दिया ज़्यादा , फिर एक college के दोस्त ने आचार्य जी के बारे में बताया, फिर भी मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया , बस नाम पता चल गया था उनका फिर जब मेरे बहुत ज़्यादा प्रश्न आने लगे, मैं छोटी छोटी चीज़ो में फसने लगी, मैं समझना चाहती थी प्रेम क्या होता है, देवी देवता का क्या महत्व है, मैं कैसे पता करूँ की कब मैं गलती करने जा रही हूँ , तब मैंने कई लोगों को सुना, संदीप माहेश्वरी , सद्गुरु, रविशंकर, प्रेम रावत, और जब उनकी बाते contradict कर रही थी तो और भी ज़्यादा प्रश्न बढ़ गए, फिर आचार्य जी को सुना, और सुनती चली गई, आचार्य जी इतने सरल तरह समझाते है की मुझ अंधविश्वासी को भी समझ आने लगा 🙏🏻 तब मैं शुरू में ग़लत मतलब निकालती थी पर मुझे लगता था आचार्य जी वही कह रहे है जो मुझे समझ आ रहा है, पर फिर प्रश्न करते करते समझ आने लगा , अपने आप मान्यताएँ ख़त्म होती गई धन्यवाद आचार्य जी❤️🙏🏻 @Advait_Prashant वारी जाऊ मैं सतगुरु के, किया मेरा भरम सब दूर 🙏🏻 (last वाली book read नहीं करी) #AcharyaPrashant Posted by Preeti Tanwar on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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11 Jul 2025
Celebrating Guru Purnima. To the one person who brought me clarity. To the one person whose words felt like a fresh breath of air. To the one person who brought me depth of the ocean. To the one person who made my skies blue once again. To the one person who held my hand strongly in my grief and gave me clarity. To the one person Who brought joy. To the one person who have words to my feelings. To the one person who made me remember What Truth is. To my Greatest mentor. Acharya Prashant. @Advait_Prashant My Work is my Prayer and Your Work is my Blessing. #AcharyaPrashant Posted by Sourabh Singh on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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11 Jul 2025
गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि - गढ़ि काढ़ै खोट। अन्तर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट।। ~ कबीर साहब बहुत - बहुत धन्यवाद आचार्य जी 🙏 हमे गुरु का वास्तविक अर्थ बताने के लिए। " तुम्हारी ज़िंदगी है, तुम्हारी जिम्मेदारी है।" ये लाइन बहुत साहस देती है और चुनौती भी देती है। आपने एक गूंगी गुड़िया को जबान दी है। अंदर से अधूरापन, अकेलापन बहुत कम हुआ है। डर तो दिन प्रतिदिन कम होते जा रहा है। पहले अकेले कहीं भी जाने से डरती थी लेकिन अब सहज रूप से चली जाती हूं। जैसे आज पटना आई हूं। आप नज़र ही बदल दिए है दुनियां को देखने का अब नजरे सिर्फ बाहर को नहीं देखती,खुद को भी देखने लगी है। अब समय बर्बाद करने के लिए समय ही नहीं मिलता है। पहले घंटो गॉशिप करने, फालतू चिंतन, औसत दर्जे का काम करने में बीत जाता था। सत्रों को सुनना, नोट्स बनाना, गीता एग्जाम देने में अलग ही आनंद आता है जैसे ज़िंदगी अलग ही मोड़ लेली है। पहले मैं कल्पना भी नहीं कर सकती थी कि मैं देर रात तक जग पाऊंगी। अब जरूरत से ज्यादा सोती भी नहीं हूं। पहले से काफ़ी ज्यादा मेहनत करती हूं। आपने जो गीता समाज बना कर दी है उसकी बात ही अलग है यहां कोई किसी को नहीं जानता, किसी का किसी से न स्वार्थ है, कोई किसी को नीचा नहीं समझता, सब एकदूसरे के लिए खड़े हैं। सब के "प्रकाश प्रदर्शक"आप है। सभी के जीवन में गीताजी है। आचार्य जी (@Advait_Prashant) जिसके ज़िंदगी में आप नहीं है उसकी ज़िंदगी में अंधेरा है। #AcharyaPrashant Posted by Gayatri on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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11 Jul 2025
गुरु पूर्णिमा : घाटकोपर, मुंबई 🗓️ - 10 जुलाई 2025 🌐 गुरु वो, जो मेरी उच्चतम संभावना से मुझे मिला दे, माने आग जो धुएं में ढक गई है, उसका धुआं छांटने में सहायक हो। एक व्यावहारिक तल पर, इस तरह हम परिभाषित कर सकते हैं। 🌐 पारमार्थिक तल पर गुरु ही ब्रह्म है। गुरु ही आत्मा है। गुरु ही शिव है। मैं का शुद्धतम रूप ही गुरु है। 🌐 गुरु = साधन (व्यवहारिक तल पर) साध्य (पारमार्थिक तल पर) #AcharyaPrashant @Advait_Prashant Posted by Rakesh Advait on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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10 Jul 2025
🌟 गुरु या पिंजरा? तय तुम्हें करना है! 🧘‍♂️🚪 🔥 गुरु कौन? कैसे पहचानें? गुरु शब्द बना है — 🔹 'गु' = अंधकार 🔹 'रु' = प्रकाश 👉 गुरु वह है जो तुम्हें अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाए। ✅ सच्चे गुरु की 5 निशानियाँ 1. क्या बंधन कट रहे हैं? ⛓️ 2. क्या भ्रम मिट रहे हैं? 🌫️ 3. क्या मन हल्का हो रहा है? 🕊️ 4. क्या सोचने की ताकत बढ़ रही है? 🧠 5. क्या तुम स्वतंत्र हो रहे हो या और गुलाम बनते जा रहे हो? 🧎‍♂️ 🚫 अगर इनमें से कुछ भी नहीं हो रहा — तो वह गुरु नहीं, एक व्यापार है! > "जा गुरु से भ्रम न मिटे, भ्रांति न जीव का जाए, ता गुरु झूठा जानिए, त्याग देर न लाय!" 🪞 गुरु का काम क्या है? गुरु का काम है: ✅ तुम्हें जगाना — खुद से, अपने भ्रमों से। ✅ तुम्हें सोचने की ताकत देना, डर नहीं। ✅ तुम्हें सच्चाई की ओर ले जाना, अपनी पूजा की ओर नहीं। ⚠️ जब गुरु भक्ति बन जाती है गुलामी जब तर्क करना पाप मान लिया जाता है जब हर बात पर आंख मूंदकर भरोसा किया जाता है जब गुरु मंज़िल नहीं, मूर्ति बन जाता है तब भक्ति नहीं, अंधभक्ति शुरू हो जाती है। 🌱 गुरु शरीर में क्यों आता है? क्योंकि हम देह से जुड़े हुए हैं। हमें समझाना हो, झकझोरना हो, तो किसी इंसान की आवाज़ ज़रूरी होती है। लेकिन… 👉 गुरु का शरीर केवल एक माध्यम है — साध्य नहीं! > गुरु साकार है ताकि वह तुम्हें निराकार की ओर ले जा सके। 🧭 गुरु वही, जो... ✅ तुम्हें सोचने की शक्ति दे ✅ तुम्हें अपने पैरों पर खड़ा करे ✅ तुम्हारी देह, मन, मोह, यहां तक कि गुरु से भी मुक्त कर दे 🔄 झूठे गुरु क्यों मिलते हैं? क्योंकि हम खुद सच्चे नहीं होते। हम चाहते हैं — 🔸 चमत्कार 🔸 शोहरत 🔸 चमत्कारी समाधान 🔸 दिखावा और सम्मान और जो धूर्त होते हैं, वो इन कमजोरियों को पहचानकर हमें फँसा लेते हैं। ✨ सच्चे गुरु की प्राप्ति कैसे होगी? > जब भीतर से सच्ची प्यास जगेगी, तब बाहर से सच्चा मार्गदर्शक मिलेगा। ✔️ जब तुम भीतर से कहोगे — "अब नहीं, अब बस सत्य चाहिए..." ✔️ जब तुम अपने झूठ, द्वेष, पाखंड को देख लोगे और उनसे बेजार हो जाओगे — तब गुरु प्रकट होगा! 🙏 गुरु पूर्णिमा पर संकल्प लें: ✅ व्यक्ति नहीं, विवेक को पूजेंगे ✅ गुरु नहीं, मुक्ति को लक्ष्य बनाएँगे ✅ हर संबंध को लगातार जांचेंगे — चाहे वो कितना भी पवित्र क्यों न लगे 🧘‍♂️ अंतिम सत्य वाक्य > "झूठ को देख लो, त्याग दो — सत्य अपने-आप गुरु बनकर प्रकट हो जाएगा।" > जो खुद को ईमानदारी से देख लेता है, उसे फिर कोई बाहर से धोखा नहीं दे सकता। 🌸 वंदन उस गुरु को — जो तुम्हें स्वयं से, और उससे भी, मुक्त करता है। 🌸#AP #AcharyaPrashant @Advait_Prashant Posted by Anand Sahu on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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10 Jul 2025
Bhagavad Gita session (9 july) Reflection: °Self control means that do not let anyone to decide your identity. °No body should allow to dictate morality to you. °Freedom is nothing but the freedom of the mind. °The more someone get into your brain the more you become a slave. °Society has gotten into the head of women and has made them think “I am a pretty woman”! Hence the chances of a woman getting a psychological disease is 5X more than men when they have a skin problem! Upto this level the society has captivated you. This is huge slavery and nothing else! °Makeup is not a problem. Problem is that when you are no body without makeup #AcharyaPrashant @Advait_Prashant Posted by Prachi Pratyasha Mohapatra on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=…
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