Joined July 2024
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महोदय कृपया संज्ञान लें!🙏 @myogiadityanath @myogioffice
सेवा में, आदरणीय मुख्यमंत्री जी, मेरी पत्नी का ऋषिकेश एम्स में आज ऑपरेशन होना है! 2 लाख 50,000 का इस्टीमेट है! मेरी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है! कृपया मेरी आर्थिक सहायता करने की कृपा करें! बड़ी मेहरबानी होगी! @myogiadityanath @myogioffice
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किसी का जान पहचान तो राकेश भाई का मदद कीजिए। मुख्यमंत्री आर्थिक मदद कोष से कुछ व्यवस्था हो जायेगा तो भी बढ़िया है।
सेवा में, आदरणीय मुख्यमंत्री जी, मेरी पत्नी का ऋषिकेश एम्स में आज ऑपरेशन होना है! 2 लाख 50,000 का इस्टीमेट है! मेरी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है! कृपया मेरी आर्थिक सहायता करने की कृपा करें! बड़ी मेहरबानी होगी! @myogiadityanath @myogioffice
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जब किसी व्यक्ति के जीवन से अचानक आर्थिक सुरक्षा समाप्त हो जाए, अपने साथ छोड़ दें और उसी समय कोई गंभीर या जानलेवा बीमारी उसे जकड़ ले, तो वह केवल शारीरिक नहीं बल्कि गहरे मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक संकट से भी गुजरता है। ऐसी परिस्थितियों में निराशा, असहायता, भय, अकेलापन और भविष्य को लेकर अनिश्चितता स्वाभाविक हो जाती है। जब दर्द, बीमारी और संघर्ष एक साथ आ खड़े हों, तब मनुष्य की सहनशक्ति की सबसे कठिन परीक्षा होती है। हे प्रभु श्रीराम, अब कुछ रहम भी कीजिए। संघर्ष की भी एक सीमा होती है। यह मन अब थक चुका है, यह पीड़ा अब बर्दाश्त नहीं होती। #जय_श्री_महाकाल #जीवन #संघर्ष #CancerJourney #Hope
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सेवा में, आदरणीय मुख्यमंत्री जी, मेरी पत्नी का ऋषिकेश एम्स में आज ऑपरेशन होना है! 2 लाख 50,000 का इस्टीमेट है! मेरी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है! कृपया मेरी आर्थिक सहायता करने की कृपा करें! बड़ी मेहरबानी होगी! @myogiadityanath @myogioffice
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मित्रों, आज बहुत कष्ट में हूं! अपनी धर्मपत्नी जी का आज हार्ट का ऑपरेशन होना है! प्रभु अपनी कृपा बनाए रखना!🙏🙏
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Rakesh Kumar, retweeted
भाई साहब वालों ने राम मंदिर ट्रस्ट को बर्बाद कर दिया, पूर्व मेयर से लेकर ट्रस्ट के अधिकारियों तक और अधिकारियों से लेकर चपरासियों तक सबने भोली भाली जनता को श्री राम के नाम पर लूटा। जब मैं पहली बार राम लला के दर्शन करने अयोध्या गया तो मन में बहुत प्रफुल्लता थी, सोचा था 5 मिनट प्रभु की मूरत के दर्शन करूँगा, पर गर्भगृह में जो माहौल देखा उससे मन विचलित हो उठा, VIP के लिए अलग से लाइन, 15 मिनट दर्शन करने का समय और आम श्रद्धालुओं को मंदिर के सेवक 5 सेकण्ड में डांट कर भगा रहे थे। वैसे किसी को फोन ले जाने कि अनुमति नहीं, पर आप किसी भाईसाहब को जानते हों तो अपने साथ अपना पर्सनल फोटोग्राफर भी साथ ले जा सकते है। भक्तों के लिए कोई ख़ास सुविधा नहीं, संघियों के लिए मंदिर से 500 मीटर दूर ही बड़ा सा हॉस्टल, वहीँ आम श्रद्धालु गर्मीं में तपते हुए पत्थर पर आप पैर रखकर जाते हैं, अरबों का चढ़ावा पर कहाँ उसका प्रयोग हो रहा है सब जानते हैं। महंत नित्यगोपाल दास जी को मुखौटा बना कर नीचे धांधली होती रही। इन धर्म द्रोहियों को इनके कर्मों कि सजा अवश्य मिलेगी, लेकिन उससे पहले समस्त हिन्दू समाज को इन धर्म द्रोहियों का पुरज़ोर विरोध करना चाहिए।
दरवाज़े में सोना मढ़वा दिया, चोर आएँगे पंडित जी की गर्दन काटेंगे और ले जाएँगे, ये अयोध्या है भइया!! ये श्री श्री चंपत राय हैं जिन्होंने “दान लूट कांड” की आधारशिला अपने इस बयान के ज़रिए ही रख दी थी कि अयोध्या वाले तो “लुटेरे” हैं !! इनके इस बयान का ऐसा असर हुआ था कि 2024 के चुनाव में लुटेरों ने भाजपा की सांसदी वाली सीट ही लूट ली थी… वैसे इस बयान में छिपा दर्द ये था कि चाँदी का फूल लाने के बजाय नक़द नारायण चढ़ाया जाए…
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#रामदल की सरकार सभी मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति को लेकर एक स्पष्ट नीति बनाएगी! सभी मंदिरों में सभी वर्णों के एक एक पुजारी को रखा जाएगा! चढ़ावे की सुरक्षा और सदुपयोग के लिए नियामक का गठन होगा! इस पैसों से धर्म प्रचार, गरीब मंदिरों, स्कूल, कॉलेज अस्पताल जिम गौशाला चलेंगे!
भारत के असंख्य मंदिरों पर एक ही जाति ने आधिपत्य जमा रखा है.. श्रीराम मंदिर से चंदा चोरी के समाचार से कोई आश्चर्य नहीं है क्योंकि यह तो लगभग सभी मुख्य मंदिरों में हो रहा है, इन्होंने भगवान महाकाल के कोष तक को न छोड़ा; किंतु ये इनके पूर्वजों द्वारा स्थापित मंदिर को भी तुम्हें दे दे
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जवाब दो!
सबका साथ सबका विकास वाली सरकार ने ट्रस्ट में सिर्फ एक को ही क्यों शामिल किया , ट्रस्ट में तो सबको मौका मिलना चाहिए 500 साल तक जूते छाते का प्रयोग न करने वाले भगवान राम के वंशजों तक को जगह नहीं, लोग कहते है कि सरकार घृणा करती फलानी जाति से इतनी घृणा थी तो पूरा भार उन्हीं को क्यों
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जब अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट में एक भी क्षत्रिय को न लिए जाने का विरोध किया जा रहा था तब बहुत ज्ञानी आकर ये कहने लगें की भाई धर्म के मैटर में ये सब नही दिखते,जो भी ट्रस्टी है वह तो हिन्दू ही ना ? बड़े मंदिरो में ट्रस्टी होना पुजारी होना महंत होना विषुद्ध रूप से आर्थिक तौर पर मजबूती और राजनीतिक ताकत देता है ,ये कितना बड़ा पॉवर सेंटर होता है आम इंसानों के ये समझ के बाहर की चीज है Note - 9 सितम्बर 2023 की पोस्ट है,हम लोगो की बाते भले लोगो को समझ मे न आये लेकिन बाद मे वही सच निकलती है।
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एक देसी कहावत है कि जलेबियों की रखवाली कुतिया ! तो जलेबी कैसे सुरक्षित रह पाएंगी?
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Rakesh Kumar, retweeted
राम मंदिर में दान पात्र में चोरी से एक बात साफ़ हो गयी कि मंदिरो को सरकारी नियंत्रण में ही रखा जाना चाहिए नहीं तो ये लूट और चोरी का अड्डा बन जाते हैं। जो मंदिर सरकारी नियंत्रण में नहीं हैं उन्हें भी सरकार जल्द से जल्द अपने नियंत्रण में ले। सिखो से तुलना करके कुछ लोग कहते हैं कि गुरुद्वारों की तरह मंदिरो को भी सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाये लेकिन पहले सिखो जैसी त्याग, समर्पण और सेवा का भाव तो ले आओ। सिखों के लिए धर्म एक सेवा है और तुम्हारे लिए तो धर्म एक धंधा है।
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लेकिन तत्कालीन बेहया, बेशर्म, निकम्मे नेताओं पर कोई फर्क नहीं पड़ा! उन्होंने सारा संविधान ही अपने प्रिय मुस्लिमों के लिए बनवा दिया!
विभाजन का वो दर्दनाक सच, जो आज भी रूह कंपा दे। अमृतसर स्टेशन पर पहुंची उस 'भूतिया ट्रेन' का खौफनाक सन्नाटा आज भी इतिहास का सबसे काला अध्याय है। विभाजन की वेदी पर लाखों मासूम जिंदगियों ने जो दर्दनाक कीमत चुकाई, उसकी दास्तान रूह को झकझोर कर रख देती है। #Partition1947 #History #Amritsar लेखक - प्रखर श्रीवास्तव पुस्तक - हे राम प्रकाशक (हिंदी) - जनसभा प्रकाशक (इंग्लिश) - रूपा पब्लिकेशन Video Source : Instagram
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राजस्थान के राजपूतों को संगठित करके कोई सर्वमान्य राजनैतिक दल का गठन करें और अपना राजनैतिक वर्चस्व कायम करें!@shri_kys
मेरे प्यारे क्षत्रियों भारतीय जनता पार्टी आपकी माँ कैसे हैं? 1. जिस पार्टी में पूरे भारत में मात्र छोटे से राज्य छत्तीसगढ़ में एक ही प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है? 2. पूरे भारत में मात्र 01 ही क्षत्रिय राज्यपाल बना रखा है वो भी मणिपुर जैसे छोटे राज्य का जहां अराजकता केद्र के काबू में नहीं आ रही है। 3. मेरे प्यारे क्षत्रिय बन्धुओं गुजरात , छत्तीसगढ़, झारखंड, हरियाणा, दिल्ली ,पंजाब में आपका एक भी लोकसभा सांसद नहीं है बीजेपी से क्योंकि वहां आप फोकट में ही वोट दे रहे हो इसलिए टिकट ही नहीं मिलती है। 4. मध्य प्रदेश जैसे बड़ी जनसंख्या वाले राज्य में आपको मात्र 01 टिकट दी गई थी जहां 6,7 सांसद बनते रहे हैं। 5. उतर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां 2004 तक क्षत्रियों को 21 लोकसभा की टिकट दी जाती थी घटते घटते 10 पर आ गई है। 6. मध्य प्रदेश में नरेंद्र सिंह तोमर, छत्तीसगढ़ में रमन सिंह, राजस्थान में गजेंद्र सिंह शेखावत, दिया कुमारी, राजेंद्र राठौड़ जैसे चेहरों को आगे करके विधानसभा के चुनाव लड़वाए लेकिन एक को भी मुख्यमंत्री नहीं बनाया। 7. केंद्र सरकार ews आरक्षण का सरलीकरण नहीं कर रही है। 8. यूजीसी जैसे काले कानून जबरदस्ती थोप रही है। 9. राजस्थान में क्षत्रियों की माँ बीजेपी क्षत्रियों को 26 टिकट देती है और उसकी प्रतिद्वंदी जाति जो बीजेपी को 30% वोट भी नहीं देती है उसको 33 टिकट देती हैं। 10. राजस्थान में सबसे ज्यादा बीजेपी के राजपूत विधायक बनने के बाद भी मात्र 03 मंत्री बनाती है और प्रतिद्वंद्वी वर्ग के बीजेपी में कम विधायक होने के बाद भी 04 मंत्री बनाती है। 11. राजस्थान में जब से सरकार बनी है सैकड़ों बार सामाजिक संगठनों ने कई विधायकों ने ews आरक्षण को पंचायती राज चुनावों में लागू करने केंद्र में सरलीकरण करने का मुद्दा उठाया लेकिन आपके मुद्दे हल नहीं हो पाते हैं। 12. राज्य सभा में पूरे भारत में 245 सीटो में से मात्र 04 क्षत्रिय सांसद हैं। 13. राजस्थान में आजतक बीजेपी का कोई राजपूत प्रदेश अध्यक्ष नहीं बना ओर लंबे समय से राज्यसभा का सांसद भी नहीं बना। लेकिन इन फालतू बातों से अपने को क्या मतलब है अपने को हिंदुत्व बचाना है राष्ट्र की रक्षा करनी है गाय की रक्षा करनी है हर हर मोदी घर घर मोदी करना है।
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राममंदिर ट्रस्ट को तुंरत भंग किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें ट्रस्ट की भी पूरी संलिप्तता है। कुछ 'बहुत बड़े' लोगों की बिना मिलीभगत के यह संभव नहीं है।
लवकुश मिश्रा 6 महीने पहले राम मंदिर में ड्यूटी करना शुरू किया। दान में आए पैसों को गिनने का काम मिला। 6 महीने में ही उसने अयोध्या में 40 लाख का प्लॉट लिया। उसपर निर्माण शुरू करवा दिया। घर में 10 लाख कैश मिला। इसके अलावा इसके बारे में अभी और खुलासा होना बाकी है। अब आप सोचिए कोई व्यक्ति महज 6 महीने पहले मंदिर से जुड़ा और इतनी बड़ी चोरी कर गया। लवकुश के जैसे दर्जनों लोग हैं, कुछ और के बारे में भी पता चला कि उन्होंने करोड़ों के प्लॉट खरीदे हैं। अभी तक न किसी के खिलाफ FIR हुई है और न ही मंदिर की तरफ से इस पूरे गबन पर अपनी बात कही गई। दान गिनती का सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट है। साल में एकात बार ये लोग बताते हैं। जबकि दूसरे मंदिर में इससे ज्यादा पारदर्शिता है। इस पूरे मामले ने राम मंदिर की व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। इसके पहले ट्रस्ट ने जब जमीनें खरीदी थी तब भी ऐसे मामले सामने आए थे। कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
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हिन्दू मुस्लिम करके बीजेपी अभी 10 साल और सत्ता में रहेगी!10 साल बाद सिविल वार की स्थिति बनेगी! सभी नेताओं के परिजन विदेश भाग चुके होंगे! हो सकता है एक और बंटवार करें कि कांग्रेस ने किया था तो हम भी तो कर सकते हैं! बहुत मुश्किल हालात हैं!🙏
डेमोग्राफी मै ज्यादा पढा लीखा,बुद्धिमान नहीं हूं लेकीन भविष्य की धुंधलाहट आपको भेज रहा हूं पढना जयरामजी की पहली प्राथमिकता क्या हो विकास या जहरीले इस्लामिक कीड़ों की सफाई डेमोग्राफी का खतरनाक खेल भारत में मुस्लिम आबादी ३५ % हैं और ज्यादातर मदरसे में पढ़े हैं इसलिए २० साल बाद गृहयुद्ध नरसंहार हत्या बलात्कार और विभाजन निश्चित है लव जिहाद लैंड जिहाद ड्रग जिहाद घुसपैठ जिहाद धर्मांतरण जिहाद जनसंख्या जिहाद ये सब भारत की डेमोग्राफी को तेजी से बदल रहे हैं और यदि कठोर कानून तत्काल लागू नहीं किया गया तो २० वर्ष बाद या तो कन्वर्ट होना पड़ेगा। या भागना पडेगा जैसे यश चोपड़ा प्रेम चोपड़ा सुनील दत्त देवानंद राज कपूर राजेन्द्र कुमार गुलजार मनमोहन सिंह, खुशवंत सिंह, मिल्खा सिंह, इंद्र कुमार गुजराल, राम जेठमलानी और आडवाणी जी की तरह मकान दुकान खेत खलिहान उद्योग व्यापार आदि सब छोड़कर भागना होगा यदि विकास करने से देश सुरक्षित होता तो विकास के मामले में फ्रांस और स्विट्जरलैंड हमसे बहुत अधिक आगे है वर्ष १८०५ में अफ़गानिस्तान के प्रधानमंत्री पंडित नंदराम टिक्कू ने बहुत विकास किया था और १० साल बाद उन्हें खदेड़ दिया गया और आज वहाँ एक भी हिंदू जैन बौद्ध सिक्ख नहीं बचा यदि मठ- मंदिर गुरुद्वारा बनाने से हिंदू जैन बौद्ध सिक्ख सुरक्षित होते तो — अफ़गानिस्तान पाकिस्तान बांग्लादेश में हज़ारों मठ- मंदिर और गुरुद्वारे थे मगर जनसंख्या बढ़ी और सभी का नामोनिशान मिटा दिया गया यदि गौशाला धर्मशाला गुरुकुल बनाने से हिंदू जैन बौद्ध सिक्ख सुरक्षित होते तो अफ़गानिस्तान पाकिस्तान बांग्लादेश में भी हज़ारों गौशाला धर्मशाला और गुरुकुल थे जो जनसंख्या बढ़ते ही जमीन में दफन कर दिए गए यदि कथा पूजा दान हवन ध्यान साधना करने से हिंदू जैन बौद्ध सिक्ख सुरक्षित होते तो — अफ़गानिस्तान पाकिस्तान बांग्लादेश में हिंदू जैन बौद्ध सिक्ख का नामोनिशान नहीं मिटता १०० वर्ष पहले विश्व की सबसे बड़ी भगवान बुद्ध की मूर्ति अफ़गानिस्तान में थी; लेकिन अब वहाँ न मूर्ति बची है और न बौद्ध १०० वर्ष पहले विश्व का सबसे बड़ा जैन मंदिर मुल्तान में था, लेकिन अब वहाँ मदरसा चलता है और न तो भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति है और न तो कोई जैन १०० वर्ष पहले विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर गांधार (अफ़गानिस्तान) में था, लेकिन अब उसका नामोनिशान तक नहीं है न तो शिवलिंग बचा है और न ही शिवभक्त। १०० वर्ष पहले विश्व का सबसे बड़ा विष्णु मंदिर कैकेय (पाकिस्तान) में था लेकिन अब उसका नामोनिशान तक नहीं है। न तो भगवान विष्णु की मूर्ति बची है और न ही विष्णु भक्त वर्ष १९७१ में बांग्लादेश को बनवाने के लिए हमारे २० हज़ार सैनिकों ने बलिदान दिया था लेकिन आज वहां से हिंदू जैन बौद्ध सिक्ख को अपना मकान दुकान खेत खलिहान उद्योग व्यापार छोड़कर भागना पड़ रहा है वर्ष १९९० में कश्मीर से हिंदुओं को अपना मकान दुकान खेत खलिहान उद्योग व्यापार सब छोड़कर भागना पड़ा और आज तक उन्हें अपनी संपत्ती तक वापस नहीं मिली नेता कर क्या रहे है वोटजीवी नोटजीवी और सत्ताजीवी नेता प्रतिदिन आरोप- प्रत्यारोप तू-तू-मैं-मैं नूरा-कुश्ती बतोलेबाजी भाषणबाजी और तू चोर मैं सिपाही करते हैं लेकिन जब बात आवश्यक मुद्दों पर आती है, तो संसद में सभी राजनेता चुप्पी साध लेते हैं। हिन्दू यदि अपना मकान दुकान खेत खलिहान उद्योग व्यापार और त्योहार बचाना चाहते हैं तो दल की गुलामी छोड़ो और अपने क्षेत्र के सांसद से मिलकर लव जिहाद लैंड जिहाद ड्रग जिहाद घुसपैठ जिहाद धर्मांतरण जिहाद और जनसंख्या जिहाद रोकने के लिए कठोर कानून बनाने की मांग करिए हिन्दू यदि अपने बच्चों को सुरक्षित देखना चाहते हैं तो नेताओं की जय जयकार करने की बजाय अपने सांसद से मिलकर समान शिक्षा समान नागरिक संहिता (UCC) समान कर संहिता समान व्यापार संहिता समान जनसंख्या संहिता समान पुलिस संहिता समान न्याय संहिता समान प्रशासनिक संहिता लागू करने की मांग करे याद रखें आज के नेता २० वर्ष बाद आपका मकान दुकान खेत खलिहान उद्योग व्यापार और त्योहार बचाने नहीं आएंगे लेकिन आज का कठोर कानून ही आपका धन, धर्म और परिवार को बचाएगा। दो रास्ते चुनें — चीन जैसा कठोर कानून (कोई जिहाद नहीं) और इजरायल जैसा शक्ति का उपयोग (दुश्मन को कुचल दो) अंतिम चेतावनी अपने बच्चों को सुरक्षित देखना है? अपना घर दुकान त्योहार बचाना है तो जय जयकार बंद करो और अपने क्षेत्र के सांसद के पास जाओ। कानून बनवाओ। *नोट :* कृपया इस संदेश को कम से कम ५०० लोगों तक निरंतर शेयर करे. जब तक भारत में बढ़ते जिहाद को लेकर सरकार कठोर कानून लागू नहीं करती, चैन से ना बैठे! 90 करोड़ हिन्दू एक सशक्त कानून नहीं बनवा सकते हो ?? 🙏🙏🚩🚩 विचार करो। ये असली सच्चाई है
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Rakesh Kumar, retweeted
इस राम को किस किस जातीं ने नहीं लुटा पंडितों ने लू टा बनियों ने लुटा यादवो ने लुटा जाटो दलितो ने लुटा भाजपा काँग्रेस सभी ने लुटा केवल इस देश मै राजपूत वाल्मीकि ख्तिक कुमाहार खाती सुनार योगी जोगी ने राम को नही लुटा ना अपने जीवन मै आगे कभी लूट सकते है यही सत्य है जो कठोर है
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Rakesh Kumar, retweeted
राजस्थान के क्षत्रिय अपने को बड़ी शान से राजपूत कहते हैं लेकिन राजनीती का उन्हें 'र' भी नहीं आता। अगर उन्हें राजनीती आती तो राजपुताना से राजस्थान हुए प्रदेश पर सदा उनका ही वचंस्व रहता। सर्वाधिक सांसद और विधायक तो होते ही, अधिकतर सीएम भी राजपूत ही बनते। राजस्थान को राजपूतो ने अपने खून से सींचा है। इसकी कतरा कतरा भूमि पर उनका अधिकार है लेकिन यहाँ वर्चस्व तो दूर की बात राजपूत सत्ता में ठीक से भागीदार भी नहीं है। उनके पास कुछ पद तो हैं लेकिन शासन प्रशासन में सुनवाई नहीं। हिसाब से देखा जाये तो राजस्थान का पहला सीएम किसी राजपूत को ही होना चाहिए था लेकिन राजस्थान को पहला राजपूत सीएम मिला आठवे नंबर पर भैरो सिंह शेखावत के रूप में। 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में कुल 160 सीटों में 54 सीटों पर राजपूत विधायक जीते थे और 2023 में 200 में से 20 विधायक।प्रदेश में जब तक कांग्रेस का वर्चस्व रहा, ब्राह्मण और कायस्थ का वर्चस्व रहा। उस समय जनसंघ और भाजपा पूरे देश की तरह राजस्थान में भी अपनी जड़े ज़माने की कोशिश कर रहे थे। राजस्थान में उन्हें इस काम के लिए किसी राजपूत नेता की जरुरत थी क्यूंकि ब्राह्मण उस समय कांग्रेस के साथ थे। राजपूत राजस्थान के परंपरागत शासक तो थे ही कांग्रेस विरोधी मानसिकता से थे। ऐसे में भाजपा संघ ने एक साधारण राजपूत परिवार के भैरोसिंह शेखावत को प्रदेश की कमान दी और सत्ता भी हासिल की। राजपूतो ने दिल खोलकर बीजेपी का समर्थन किया, लेकिन जैसे ही बीजेपी बाद में मजबूत हुई, बीजेपी ने राजपूतो को मानसिक रूप से अपना प्यादा बनाकर साइड करना शुरू कर दिया या पिछलग्गू टाइप के राजपूतो को ही आगे बढ़ाया, या दिया कुमारी सिद्धि कुमारी जैसी महिलाओं नेत्रियों को जिससे बीजेपी की राजनीती को कोई खतरा नहीं। इसमें भैरो सिंह शेखावत की अदूरदर्शिता या कहिये दूसरा राजपूत नेता ना पनपने देने की मंशा भी रही होगी इसीलिए उन्होंने वसुंधरा राजे को प्रमोट किया। आज राजस्थान बीजेपी पूरी तरह से ब्राह्मण बनिया पार्टी बन चुकी है। राजपूतो से चित्तौड़गढ़ सीट तक छीनी जा चुकी है। मुख्यमंत्री तो दूर प्रदेशाध्यक्ष का पद भी राजपूत को नहीं मिलता। कुल मिलाकर राजपूत राजस्थान की राजनीती में निर्णय लेने वाला नहीं केवल वोट देने वाला है। अब इसमें दोष ना तो ब्राह्मण बनियो का है और नाही बीजेपी का। दोष केवल राजपूतो का ही है जो राजनीती करना ही नहीं जानते। केवल भावुक होकर शिकायत करना जानते हैं। राजपूत दिनभर धर्म के रक्षक बने घूमते हैं लेकिन उन्हें युगधर्म का अता पता भी नहीं है। आम राजपूत मतदाता की बात छोड़िये, राजस्थान के राजपूत नेताओं का पोलिटिकल ओरिएंटेशन भी बहुत कमजोर रहा है। । @gssjodhpur @Rajendra4BJP
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ये गंवार, जाहिल हिन्दू, इनके स्टॉल क्यों लगवाते हैं?
आजकल जो टर्किश आइसक्रीम के नाम पर जेहादियों द्वारा हिंदू लड़कियों के साथ नॉनसेंस बर्ताव किया जा रहा है उसका इस लड़की ने बहुत करारा जवाब दिया
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Rakesh Kumar, retweeted
चोर को चोर न कहो क्योंकि मामला मंदिर से जुड़ा है, धर्म से जुड़ा है, आस्था से जुड़ा है, और सबसे महत्वपूर्ण उनके बापों से जुड़ा है Exactly इसी प्रजाति के लोग पुराने समय में देवदासी प्रथा को भी बहुत Enjoy करते थे, उसमें बढ़चढ़कर हिस्सा लेते थे, इन भोगी लोगों को अपना बाप मानते थे
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पहले तथाकथित इतिहासकार जी से तो पूछ लो!
>एक भुला दिया गया साहस – बनारस, 3 दिसंबर 1632पटना से आगरा जाते हुए एक अंग्रेज यात्री ने यह घटना अपनी डायरी में दर्ज की:शाहजहाँ के हुक्म पर बनारस के पास एक नये बने हिंदू मंदिर को तोड़ने के लिए गवर्नर का दल पहुँचा। एक राजपूत योद्धा पहले से छिपा हुआ था। जैसे ही मौका मिला, उसने लंबे धनुष से हमला बोल दिया। गवर्नर के चचेरे भाई समेत 3-4 बड़े अधिकारियों को मार गिराया। जब वह घिर गया तो भी उसने अपनी जंजीर (कटार) निकाली और 1-2 और को मारते हुए अंत तक लड़ा। आखिरकार शहीद हो गया और उसकी लाश को पेड़ से उल्टा लटका दिया गया — सबके लिए चेतावनी।उसी यात्री ने लिखा कि शाहजहाँ ने अपने शासनकाल में बने सभी हिंदू मंदिरों को गिराने के फरमान जारी किए थे। बनारस जिले में अकेले 76 मंदिरों को तोड़ दिए जाने की खबर थी।सत्रहवीं सदी का एक यूरोपीय यात्री, जो महज गुजर रहा था, उसने इस एक राजपूत के अदम्य साहस को दर्ज कर दिया।इतिहास हमेशा सरल नहीं होता। कभी-कभी वह एक यात्री की डायरी के कोने में छिपा मिलता है। इस वीरता की कहानी पर आपका क्या विचार है?
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