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~Medical-Astrology~ चिकित्सीय_ज्योतिष चिकित्सीय ज्योतिष के विषय मे बात करती हूँ तो अक्सर लोग हैरान हो जाते हैं कि कैसे बिना जांच के पूर्व में हुए/वर्तमान के/या भविष्य में होने वालें रोगों के विषय मे बिना जाँच के सटीक जानकारी सिर्फ जातक की कुंडली से निकल आती है।
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सोमवती अमावस्या कल📌
🔴Astrology & Remedies🔴 सोमवती अमावस्या - कल 30/12/2024 पितृदोष निवारण, सौभाग्यवर्धन, कालसर्प दोष से सम्बंधित उपाय करें कल। सोमवती अमावस्या को सूर्यग्रहण के समान फलदायी कहा गया है, इस दिन किया गया स्नान, दान, जप, तर्पण आदि अनंत गुणा फल देता है। अमावास्या तु सोमेन सप्तमी भानुना सह। चतुर्थी भूमिपुत्रेण सोमपुत्रेण चाष्टमी।। चतस्रस्तिथयो स्त्वेताः सूर्यग्रहण सन्निभाः। स्नानं दानं तथा श्राद्धं सर्वं तत्राक्षयं भवेत्।। सोमवारी अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी एवं बुधवारी अष्टमी तिथीयां सूर्यग्रहण के समान फल देने वाली कही गयी हैं। इन तिथियों में किया गया स्नान, दान, जप, तर्पण आदि अनंत फलदायी कहा गया है। इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करना विशेष शुभ कहा गया है। वे जो पितृदोष से पीड़ित है पीपल 108 परिक्रमा "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र के साथ करें, अर्घ्य व जनेऊ अर्पित करें। वे जो पितृ कर्म के कर्तव्य में बंधे हैं प्रत्येक अमावस्या को अवश्य तर्पण आदि नियमों का पालन करें, कल परम पुण्यकारी सोमवती अमावस्या है आप स्वयं नही कर पा रहें है तो ब्राह्मण को बुलाकर विधि विधान से कर्तव्य का निर्वहन करें। याद रहे देव पूजा भाव प्रधान है पर पितृसत्ता के निमित्त किया जाने वाला कारक नियमपूर्वक व विधि विधान से किया जाना चाहिये। केवल इस कार्य से आप देखेंगे कि आप की बहुत सारी समस्याओं का स्वतः ही समाधान हो जाएगा। समय के साथ साथ अंतर महसूस होगा आपको। सौभाग्वती स्त्रियों के द्वारा तुलसी/पीपल की परिक्रमा कर सौभाग्यकारक शिव-पार्वती पूजा का विधान भी किया जाता है। जिसमे 108 परिक्रमा किन्ही 108 वस्तुओं फल, मेवे, सौभाग्य सामाग्री इत्यादि से पूर्ण कर, पूजा आदि कर, सभी वस्तुएँ सौभाग्यशाली स्त्री/ ब्राह्मणी को दे दी जाती हैं। मैंने आप लोगों से कहा था कि मैं एक ऐसे बहुत ही प्रभावशाली अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र के विषय मे बताऊंगी जिसका एक पाठ, शतरुद्री के तीन पाठों के समान फल देने वाला कहा गया है। यस्त्रिसंध्यं पठेच्छम्भोर्नाम्नामष्टोत्तरं शतम् ॥ शतरुद्रि त्रिरावृत्त्या यत्फलं प्राप्यते नरैः । स्तोत्र बहुत बड़ा है इसलिए यहां लिख पाना संभव नही है, आप स्तोत्र को हमारे blog पर प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही सोमवार व्रत की विशेषताओं और किये जाने वाले चंद्र ग्रह के उपायों पर भी लेख ब्लॉग में पोस्ट किए गए हैं। Blog का link आपको हमारे ट्विटर Bio में मिलेगा। sanatanandsciences.blogspot.…
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उसके लिए मलमास में दान की बाध्यता नहीं है वो तो कभी भी कर सकते हैं और हमेशा करना भी चाहिए चाहे आप समय दें या समान
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क्या केवल मालपुए और खीर ही दान करना चाहिए ? विद्या दान भी कर सकते हैं? मेरे पास एक पुराना लैपटॉप है ( वर्किंग कंडीशन) उसको मैं ग़रीब आदिवासी बच्चों की पढ़ाई के लिए देना चाह रहा था।
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अधिक मास में मालपुए- खीर का दान करना चाहिए। अधिकमास अब पूर्ण ही होने वाला है इसमें साधु,संत-समाज, ब्राह्मण, बहन, भांजी आदि को मालपुए का दान (दक्षिणा सहित) किया जाता है। अगर आपने भी नही किया है अभी तो अब कर दीजिए। कितने मालपुए? 33 33 ही क्यों❓ क्योंकि 11-11 दिनों का अंतर आने से 3 वर्ष के बाद पूरे 33 दिन का अधिक मास होता है तो प्रतिदिन एक कि गणना से 33 मालपुए मान लेते हैं। Picture Credit- pistachio doughnuts
🔴अधिकमास-क्षयमास🔴 क्या और क्यों होता है अधिक मास और क्षयमास? चंद्र और सूर्य के अनुसार माह में प्रतिवर्ष 11 दिन का अंतर आ जाता है यही 11-11 दिनों का अंतर तीन वर्ष पश्चात अधिकमास के रूप में प्राप्त होता है। आपने अधिकमास के साथ साथ क्षय मास के बारे में भी जरूर सुना होगा, क्षयमास 141 वर्ष में एक बार आता है, अथ मलमासः । स द्विविधः ॥ अधिमासः क्षयमासश्च ॥ संक्रांतिरहितो मासोऽधिमासः ॥ संक्रांतिद्वययुक्तो मासः क्षयमासः ॥ पूर्वाधिमासादुत्तरोधिमासस्त्रिंशत्तममासमा- रभ्याष्टसु नवसु वा मासेष्वन्यतमो भवति ॥ क्षयमासस्तु एकचत्वारिंशदधिक- शतसंख्यैर्वर्षैर्वा भवति नत्वधिकमासवदल्पकालेन ॥ क्षयमासः कार्तिकमार्गशीर्ष- पौषष्वन्यतमो भवति नेतरः ॥ यस्मिन्वर्षे क्षयसासस्तस्मिन्वर्षेऽधिकमासद्वयम् ॥क्षयमासात्पूर्वमेकोधिकमासः ॥ धर्मसिन्धु अब मलमास को कहते हैं-यह, दो प्रकार का होता है अधिकमास और क्षयमास। जिसमे क्षयमास तो संक्रांति से रहित होते हैं अधिकमास में दो संक्रांतियां आती हैं, क्षयमास एक सौ इकतालीस १४१ वर्षों में होता है अधिक मास के समान अल्पकाल में क्षयमास नहीं होता और कार्तिक, मार्गशीर्ष और पौष इनमें से कोई होता है अन्य नहीं। जिस वर्ष में क्षयमास हो उस वर्ष में दो अधिकमास होते हैं क्षयमास से पहिले एक अधिक मास और क्षयमास के बाद एक अधिकमास। ◆अधिक मास में मालपुए- खीर का दान करना चाहिए। अधिकमास 16 अगस्त को पूर्ण होने वाला है इसमें साधु,संत-समाज, ब्राह्मण आदि को मालपुए का दान किया जाता है। अगर आपने भी नही किया है अभी तो अब कर दीजिए। कितने मालपुए? 33 33 ही क्यों? क्योंकि 11-11 दिनों का अंतर आने से 3 वर्ष के बाद पूरे 33 दिन का अधिक मास होता है तो प्रतिदिन एक कि गणना से 33 मालपुए मान लेते हैं।
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पीरियड्स के दौरान अत्यधिक रक्तश्राव होने पर ये उपाय करें। वैसे शरीर में किसी भी प्रकार का उत्सर्जन या श्राव किसी किसी प्रकार के आंतरिक इन्फेक्शन को दिखाता है, आज की जीवन शैली में लगभग हर कोई इस से त्रस्त भी है, इसलिए तात्कालिक उपाय के बाद किसी विद्वान वैद्य से अवश्य करें।
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रोग की भयावहता को रोकने में सहायक होते हैं। 👉मासिक धर्म के समय अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में अपराजिता के 7-8 पत्ते अशुद्धि के दिनों में चबाकर पानी पी लें। 3 दिन करने से ही रक्तस्राव में कमी देखी गयी है। नही तो 3 दिन का ब्रेक लेकर फिर 3 दिन पत्तियों का सेवन करें।
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सोमवार व्रत क्यों/कैसे करें- भगवान शिव सोमवार के बारे में कहते हैं-  “मत्स्वरूपो यतो वारस्ततः सोम इति स्मृतः।  प्रदाता सर्वराज्यस्य श्रेष्ठश्चैव ततो हि सः।  समस्तराज्यफलदो वृतकर्तुर्यतो हि सः।।” अर्थात सोमवार मेरा ही स्वरूप है, अतः इसे सोम कहा गया है। इसीलिये यह समस्त राज्य का प्रदाता तथा श्रेष्ठ है। व्रत करने वाले को यह सम्पूर्ण राज्य का फल देने वाला है। भगवान शिव यह भी आदेश देते हैं कि श्रावण में  “सोमे मत्पूजा नक्तभोजनं”  अर्थात सोमवार को मेरी पूजा और नक्तभोजन करना चाहिए। पूर्वकाल में सर्वप्रथम श्रीकृष्ण ने ही इस मंगलकारी सोमवार व्रत को किया था। शिवपुराण, कोटि रुद्रसंहिता के अनुसार- निशि यत्नेन कर्तव्यं भोजनं सोमवासरे ।  उभयोः पक्षयोर्विष्णो सर्वस्मिञ्छिव तत्परैः ।। दोनों पक्षों में प्रत्येक सोमवार को प्रयत्नपूर्वक केवल रात में ही भोजन करना चाहिए। शिव के व्रत में तत्पर रहने वाले लोगों के लिए यह अनिवार्य नियम है।
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The choice of a puja, remedy, stotra, mantra japa, or spiritual practice depends on a persons energy and the influence of planetary and astrological factors such as lagna, nakshatra, transits, dasha, and antardasha. No daivta ever wishes harm to anyone, and no sincere prayer or recitation is inherently negative when done with proper pronunciation, devotion, and within ones capacity while following its basic discipline. Many spiritual practices can bring remarkable results. Fir bhi I have often observed that a remedy that benefits one person may not suit another. This does not mean the remedy or Devta is ineffective or angry. It simply means that at that particular time, the person's energy and circumstances may require a different approach for balance and support. No path is wrong, but it is also true that every remedy or every form of sadhna may not be equally suitable for every person at every stage of life.
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I'm sorry to say you but ,my "grah samy"is mangal but I have always felt all the problems on Tuesday moreover I faced my worst time by chanting "hanuman bahuk" and other literature written by goswame Tulsidas
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भोर में पढ़ना सबसे उचित है बाकी राम नाम रसिक भक्तों को पता ही नहीं चलता कि कब वे मन ही मन वे उसके अनगिनत पाठ कर चुके है🚩
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दी राम रक्षा स्तोत्र कभी भी और कोई भी पढ़ सकता है या फिर कुछ विशेष विधि है कृपया मार्गदर्शन करें 🙏🏻🙏🏻
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इस चौपाई की शक्ति असीमित है, आप जहां भी अटकें कि- 📌अब क्या होगा? 📌आगे क्या करें? तो बस बाबा का ध्यान करके इस चौपाई का जाप शुरू कर दें। उठते बैठते सोते जागते बस बाबा को कहना है। कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥ जगत में कौन सा ऐसा कठिन काम है जो हे बजरंगबली! तुमसे न हो सके। मुझ पर भी कृपा करो और मुझे इस कठिन समय से बाहर निकलो। साथ साथ करतल ध्वनि के साथ ये कीर्तन करें। जय राम जय राम जय जय राम जय जय श्री विघ्नहरण हनुमान
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A great session to listen-Book Launch and Interaction with Shri Vikram Sood - Former Raw Chief by Senior Journalist Atul Aneja ji at Surat by Surat Literary Foundation @Vikram_Sood @atulaneja youtu.be/KJ-W7TC7oAk?si=Gnuy…
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ब्रह्मांड में कर्म बंधन काटने की शक्ति केवल महादेव में हैं इसलिए वे कालों के काल महाकाल हैं। जब कहीं रास्ता न दिखे तब उनकी शरण लीजिए इन १०८ नामों से महादेव का नित्य अर्चन आपको अवश्य सहायता करेगा जीवन की कठिनाइयों से उबरने में। आप लोग मेरी टाइमलाइन या हाइलाइट पोस्ट्स में अपनी समस्या के अनुसार उपाय देख कर उन्हें कम से कम तीन माह करें अगर फिर भी लाभ न हो तब कुंडली देखने के लिए संपर्क किया करें, ज्योतिष ग्रहों की ऊर्जा को बैलेंस करने का एक माध्यम भर है हालांकि की ये ग्रह नक्षत्र गणना के प्रयोग का सबसे शूद्र रूप भी है तो ये न समझे कि किसी ज्योतिषी से संपर्क करके अचानक चमत्कार होगा ग्रह और दशाओं की अनुकूलता या प्रतिकूलता के चलते हुए उपाय शुरू करने के कुछ दिन बाद ही उनका प्रभाव दिखना शुरू होता है। शिवाय नमः
🔴Astrology&Remedies🔴 ज्योतिष उपायों के लिए कहा गया है कि शिवालय में हर ग्रह की शांति और शुभ फल प्राप्ति का उपाय किया जा सकता है तो महादेव के 108 नामों से ग्रह विशेष अनुसार अर्चन करें। 1.शिव- कल्याण स्वरूप 2. महेश्वर- माया के अधीश्वर 3. शम्भू- आनंद स्वरूप वाले 4. पिनाकी- पिनाक धनुष धारण करने वाले 5. शशिशेखर- सिर पर चंद्रमा धारण करने वाले 6. वामदेव- अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले 7. विरूपाक्ष. विचित्र / तीन नेत्र हैं 8. कपर्दी- जटाजूट धारण करने वाले 9.नीललोहित- नीले और लाल रंग वाले 10. शंकर- सबका कल्याण करने वाले 11. शूलपाणी- हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले 12. खटवांगी- खटिया का एक पाया रखने वाले 13. विष्णुवल्लभ- भगवान विष्णु के अति प्रिय 14. शिपिविष्ट- सितुहा में प्रवेश करने वाले 15. अंबिकानाथ- देवी भगवती के पति 16. श्रीकण्ठ- सुंदर कण्ठ वाले 17. भक्तवत्सल- भक्तों को अत्यंत स्नेह करने वाले 18. भव- संसार के रूप में प्रकट होने वाले 19. शर्व- कष्टों को नष्ट करने वाले 20. त्रिलोकेश- तीनों लोकों के स्वामी 21. शितिकण्ठ- सफेद कण्ठ वाले 22. शिवाप्रिय- पार्वती के प्रिय 23. उग्र- अत्यंत उग्र रूप वाले 24. कपाली- कपाल धारण करने वाले 25. कामारी- कामदेव के शत्रु, अंधकार को हरने वाले 26. सुरसूदन- अंधक दैत्य को मारने वाले 27. गंगाधर- गंगा जी को धारण करने वाले 28. ललाटाक्ष- ललाट में आंख वाले 29. महाकाल- कालों के भी काल 30. कृपानिधि- करूणा की खान 31. भीम- भयंकर रूप वाले 32. परशुहस्त- हाथ में फरसा धारण करने वाले 33. मृगपाणी- हाथ में हिरण धारण करने वाले 34. जटाधर- जटा रखने वाले 35. कैलाशवासी- कैलाश के निवासी 36. कवची- कवच धारण करने वाले 37. कठोर- अत्यंत मजबूत देह वाले 38. त्रिपुरांतक- त्रिपुरासुर को मारने वाले 39. वृषांक- बैल के चिह्न वाली ध्वजा वाले 40. वृषभारूढ़- बैल की सवारी वाले 41. भस्मोद्धूलितविग्रह- सारे शरीर में भस्म लगाने वाले 42. सामप्रिय- सामगान से प्रेम करने वाले 43. स्वरमयी- सातों स्वरों में निवास करने वाले 44. त्रयीमूर्ति- वेदरूपी विग्रह करने वाले 45. अनीश्वर- जो स्वयं ही सबके स्वामी है 46. सर्वज्ञ- सब कुछ जानने वाले 47. परमात्मा- सब आत्माओं में सर्वोच्च 48. सोमसूर्याग्निलोचन- चंद्र, सूर्य और अग्निरूपी आंख वाले 49. हवि- आहूति रूपी द्रव्य वाले 50. यज्ञमय- यज्ञस्वरूप वाले 51. सोम- उमा के सहित रूप वाले 52. पंचवक्त्र- पांच मुख वाले 53. सदाशिव- नित्य कल्याण रूप वाल 54. विश्वेश्वर- सारे विश्व के ईश्वर 55. वीरभद्र- वीर होते हुए भी शांत स्वरूप वाले 56. गणनाथ- गणों के स्वामी 57. प्रजापति- प्रजाओं का पालन करने वाले 58. हिरण्यरेता- स्वर्ण तेज वाले 59. दुर्धुर्ष- किसी से नहीं दबने वाले 60. गिरीश- पर्वतों के स्वामी 61. गिरिश्वर- कैलाश पर्वत पर सोने वाले 62. अनघ- पापरहित 63. भुजंगभूषण- सांपों के आभूषण वाले 64. भर्ग- पापों को भूंज देने वाले 65. गिरिधन्वा- मेरू पर्वत को धनुष बनाने वाले 66. गिरिप्रिय- पर्वत प्रेमी 67. कृत्तिवासा- गजचर्म पहनने वाले 68. पुराराति- पुरों का नाश करने वाले 69. भगवान्- सर्वसमर्थ ऐश्वर्य संपन्न 70. प्रमथाधिप- प्रमथगणों के अधिपति 71. मृत्युंजय- मृत्यु को जीतने वाले 72. सूक्ष्मतनु- सूक्ष्म शरीर वाले 73. जगद्व्यापी- जगत् में व्याप्त होकर रहने वाले 74. जगद्गुरू- जगत् के गुरू 75. व्योमकेश- आकाश रूपी बाल वाले 76. महासेनजनक- कार्तिकेय के पिता 77. चारुविक्रम- सुन्दर पराक्रम वाले 78. रूद्र- भयानक 79. भूतपति- भूतप्रेत या पंचभूतों के स्वामी 80. स्थाणु- स्पंदन रहित कूटस्थ रूप वाले 81. अहिर्बुध्न्य- कुण्डलिनी को धारण करने वाले 82. दिगम्बर- नग्न, आकाशरूपी वस्त्र वाले 83. अष्टमूर्ति- आठ रूप वाले 84. अनेकात्मा- अनेक रूप धारण करने वाले 85. सात्त्विक- सत्व गुण वाले 86. शुद्धविग्रह- शुद्धमूर्ति वाले 87. शाश्वत- नित्य रहने वाले 88. खण्डपरशु- टूटा हुआ फरसा धारण करने वाले 89. अज- जन्म रहित 90. पाशविमोचन- बंधन से छुड़ाने वाले 91. मृड- सुखस्वरूप वाले 92. पशुपति- पशुओं के स्वामी 93. देव- स्वयं प्रकाश रूप 94. महादेव- देवों के भी देव 95. अव्यय- खर्च होने पर भी न घटने वाले 96. हरि- विष्णुस्वरूप 97. पूषदन्तभित्- पूषा के दांत उखाड़ने वाले 98. अव्यग्र- कभी भी व्यथित न होने वाले 99. दक्षाध्वरहर- दक्ष के यज्ञ को नष्ट करने वाले 100. हर- पापों व तापों को हरने वाले 101. भगनेत्रभिद्- भग देवता की आंख फोड़ने वाले 102. अव्यक्त- इंद्रियों के सामने प्रकट न होने वाले 103. सहस्राक्ष- हजार आंखों वाले 104. सहस्रपाद- हजार पैरों वाले 105. अपवर्गप्रद- कैवल्य मोक्ष देने वाले 106. अनंत- देशकालवस्तु रूपी परिछेद से रहित 107. तारक- सबको तारने वाले 108. परमेश्वर- सबसे परम ईश्वर।
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Varahi Amman Varahi is divine form of Shakti who saves us from the clutches of evil forces & removes all obstacles.
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Girls from defence backgrounds are often raised to be confident, outspoken, expressive, and fearless about sharing their thoughts. When girls like us step into schools, colleges, or social circles where people come from very different mindsets, we often get labeled in different ways. Some people appreciate it, especially those who are open minded, while others find reasons to judge. Today I watched Twisha Sharma ka wedding video that someone shared. The way she spoke...so confident, expressive, and unapologetically herself....felt very familiar. People often talk about horoscope matching, family matching, culture, traditions, religion, and social compatibility. What is rarely said openly is that mindset compatibility matters too aur anjane me ham ye hi Milne ki baat karte bhi hain kyonki Every community, background, and family carries its own values and way of thinking. When one personz view is imposed on another, it can become difficult for a mature and independent minded jatak to truly be themselves. I don't know how to put it perfectly into words, but it feels sad. She seemed like such a lovely girl. 💔
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Hari om, kindly suggest some books to learn Phalit Jyotisha from scratch!!
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