चूंकि "मामा" संघ के बड़े पदाधिकारी हैं इसलिए "भांजे" की एलोपैथिक दवाओं का कारोबार करने वाली स्काईमैप फार्मा कंपनी को बिना किसी पूर्व आयुर्वेदिक अनुभव के देश की एकमात्र प्रॉफिटेबल सरकारी आयुष मिनी-रत्न 145 करोड़ रुपए नेटवर्थ वाली
#IMPCL कंपनी, महज 121 करोड़ रुपए में स्काईमैप फार्मा के मालिक संजय गुप्ता को सौंप दी गई.
IMPCL कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत के मुताबिक औपचारिक तौर पर कम्पनी की परिसंपत्तियां करीब 200 करोड़ होने का अनुमान है जिसकी वास्तविक कीमत कई गुना ज्यादा है.
IMPCL कम्पनी द्वारा भरा जा चुका करीब 40 करोड़ का जीएसटी रिटर्न, 50 करोड़ की एफडी और 40 एकड़ जमीन–सब कुछ इस मनमानी सौदेबाज़ी के तहत स्काईमैप फार्मा के हिस्से में चला गया है. जबकि स्काईमैप फार्मा को आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बनाने का कोई तजुर्बा ही नहीं है.
#Disinvestment की प्रक्रिया में सरकार आमतौर पर
#Enterprise_Value के आधार पर बोलियां मंगाती है. यदि कंपनी की कुल लिक्विड एसेट,एफडी और कैश ही ₹90 करोड़ के आसपास थी,तो महज ₹121 करोड़ में पूरी कंपनी बेच देना नीतिगत स्तर पर एक बड़ा 'अंडर-वैल्यूएशन' का मामला बनता है.
IMPCL में इस वक्त तकरीबन 62 स्थायी कर्मचारी और साढे तीन सौ ठेके के तहत नियोजित मज़दूर कार्यरत हैं.
इस कंपनी को के पास 1200 से भी अधिक दवाएं बनाने का लाइसेंस है.
यह कम्पनी फारेस्ट की लीज पर करीब 35 एकड़ जमीन पर बनी हुई है.
अल्मोड़ा जिले के मोहान और आसपास के सैकड़ों लोगों की आजीविका इस कंपनी को जड़ी बूटी उपलब्ध करने के माध्यम से जुड़ी हुई है.
कर्मचारी संघ का यह भी आरोप है कि चूंकि कंपनी की जमीन 'फॉरेस्ट लैंड' है इसलिए इसके ट्रांसफर के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय
#MoEFCC या स्थानीय वन विभाग की मंजूरी अनिवार्य है. जिसकी इस डील में पूरी तरह से अनदेखी की गई है.
इस डील में जो समझौते दर्ज हुए हैं उनमें मुख्य रूप से यह लिखा गया है कि स्काईमैप फार्मा अगले एक साल तक कोई चारणी नहीं करेगी और अगले 3 साल तक कारोबार का स्वरूप नहीं बदल सकती.
कर्मचारी संघ को संशय है कि एक साल के बाद कर्मचारियों की छंटनी करके 3 साल बाद कंपनी आयुर्वेद की जगह एलोपैथिक दवाएं भी बना सकती है या कंपनी को बंद करके यहां होटल/रिजॉर्ट्स भी खोल सकती है.
इसीलिए इस शेयर पर्चेजिंग एग्रीमेंट का विरोध करने के लिए आज IMPCL कर्मचारियों का एक डेलिगेशन आयुष मंत्रालय दिल्ली पहुंचा है.