इंदौर का महापौर बन एक मॉडल सिटी जिसमे पेड़ - नदी - तालाब हो, साइकल-पैदल मार्ग हो, स्वास्थ्य -शिक्षा समाज चलाए, कार्य - व्यवसाय - रहवासी ज़ोन हो, बनाना चाहता हूँ

Joined September 2009
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Reminder - tick tick tick #Bitcoin is thought - solution for #USADebt. #DebtTrump #USDebt #Dollar #StableCoin
Just a reminder! Bitcoin is solution built for a purpose, but not what we see but on another side of the same coin. Sooner, world ii come to know. USA debt and Bitcoin are co-related.
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राहुल पालीवाल (Surviving in जाहिल-युग ©) retweeted
It's Sad 💔💔💔💔 Chappan Inch Ka Seena Hai ,, Bas Muh chuppakar Jeena hai Bhaktooooooooooo nachooooooooo horamzaadooooo
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राहुल पालीवाल (Surviving in जाहिल-युग ©) retweeted
Gajab Topibaazi Chal Rahi hai bhai ???? 😳😳😵‍💫😵‍💫😵‍💫 Shocking 😵‍💫😵‍💫😵‍💫😵‍💫 Hazaro Karod ki Topibaazi ?????? Please watch it aankhe Chakra jayega and dimaag Bhi Sarkar alag-alag naamon se schemes launch karti rehti hai, lekin aksar unka purpose wahi hota hai. Kabhi-kabhi toh sirf naam badal diya jata hai, funds alag kar diye jate hain. Kuch schemes launch hone ke baad usi saal funding bhi nahi paati. Public ka paisa apni marzi se use kiya jata hai, lekin accountability kahin nazar nahi aati. Success ka data kahan hai? Agar itni agricultural schemes successful hain, toh phir kisaan aaj bhi aatmahatya kyun kar rahe hain ?????
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लुटेरी गैंग
चूंकि "मामा" संघ के बड़े पदाधिकारी हैं इसलिए "भांजे" की एलोपैथिक दवाओं का कारोबार करने वाली स्काईमैप फार्मा कंपनी को बिना किसी पूर्व आयुर्वेदिक अनुभव के देश की एकमात्र प्रॉफिटेबल सरकारी आयुष मिनी-रत्न 145 करोड़ रुपए नेटवर्थ वाली #IMPCL कंपनी, महज 121 करोड़ रुपए में स्काईमैप फार्मा के मालिक संजय गुप्ता को सौंप दी गई. IMPCL कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत के मुताबिक औपचारिक तौर पर कम्पनी की परिसंपत्तियां करीब 200 करोड़ होने का अनुमान है जिसकी वास्तविक कीमत कई गुना ज्यादा है. IMPCL कम्पनी द्वारा भरा जा चुका करीब 40 करोड़ का जीएसटी रिटर्न, 50 करोड़ की एफडी और 40 एकड़ जमीन–सब कुछ इस मनमानी सौदेबाज़ी के तहत स्काईमैप फार्मा के हिस्से में चला गया है. जबकि स्काईमैप फार्मा को आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बनाने का कोई तजुर्बा ही नहीं है. #Disinvestment की प्रक्रिया में सरकार आमतौर पर #Enterprise_Value के आधार पर बोलियां मंगाती है. यदि कंपनी की कुल लिक्विड एसेट,एफडी और कैश ही ₹90 करोड़ के आसपास थी,तो महज ₹121 करोड़ में पूरी कंपनी बेच देना नीतिगत स्तर पर एक बड़ा 'अंडर-वैल्यूएशन' का मामला बनता है. IMPCL में इस वक्त तकरीबन 62 स्थायी कर्मचारी और साढे तीन सौ ठेके के तहत नियोजित मज़दूर कार्यरत हैं. इस कंपनी को के पास 1200 से भी अधिक दवाएं बनाने का लाइसेंस है. यह कम्पनी फारेस्ट की लीज पर करीब 35 एकड़ जमीन पर बनी हुई है. अल्मोड़ा जिले के मोहान और आसपास के सैकड़ों लोगों की आजीविका इस कंपनी को जड़ी बूटी उपलब्ध करने के माध्यम से जुड़ी हुई है. कर्मचारी संघ का यह भी आरोप है कि चूंकि कंपनी की जमीन 'फॉरेस्ट लैंड' है इसलिए इसके ट्रांसफर के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय #MoEFCC या स्थानीय वन विभाग की मंजूरी अनिवार्य है. जिसकी इस डील में पूरी तरह से अनदेखी की गई है. इस डील में जो समझौते दर्ज हुए हैं उनमें मुख्य रूप से यह लिखा गया है कि स्काईमैप फार्मा अगले एक साल तक कोई चारणी नहीं करेगी और अगले 3 साल तक कारोबार का स्वरूप नहीं बदल सकती. कर्मचारी संघ को संशय है कि एक साल के बाद कर्मचारियों की छंटनी करके 3 साल बाद कंपनी आयुर्वेद की जगह एलोपैथिक दवाएं भी बना सकती है या कंपनी को बंद करके यहां होटल/रिजॉर्ट्स भी खोल सकती है. इसीलिए इस शेयर पर्चेजिंग एग्रीमेंट का विरोध करने के लिए आज IMPCL कर्मचारियों का एक डेलिगेशन आयुष मंत्रालय दिल्ली पहुंचा है.
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ग़ज़ब
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी कोई नई नहीं है। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे का दावा है कि 1989 में गांव-गांव, शहर-शहर और देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या आईं सोने-चांदी, हीरे-माणिक्य और अष्टधातु की 1250 शिलाएं अब ‘गायब’ हो चुकी हैं। ये शिलाएं 2002 तक कारसेवकपुरम में रहीं। मिट्‌टी की पूजित शिलाएं आज भी कारसेवकपुरम में रखी हैं, लेकिन धातु की शिलाएं कहीं दिखाई नहीं देतीं। संतोष दुबे के मुताबिक, सोने-चांदी की शिलाओं की देख-रेख का जिम्मा भी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पास था। ये शिलाएं कारसेवकपुरम में जहां सुरक्षित रखी गई थीं, वहां 3 ताले लगे थे। फिर ये शिलाएं कहां गायब हो गईं, यह किसी को नहीं पता है। पूरी खबर: dainik.bhaskar.com/foB0W94h0…
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भाई ये अपराधी है. कौन? अरे भीड़ में एक ही चेहरा अलग है.
The cringe circus continues in Slovakia. Only 9200 people of Indian origin live in Slovakia. I have not seen such events organised for Americans in other countries when Trump visits. Politicians are not celebrities. They have taken this image management too far.
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चड्डी गैंग के प्रवक्ता। चुटिया चिंदू इन्हें पास अपने मानसिक रोग ठीक करवाने जाता है। इन्हें सिस्टम ने चिंदू के लिए पाला पोसा और बड़ा किया है। लेकिन चिंदू चुटिया है।
राममंदिर चोरी मामले में ये लोग कुछ क्यों नहीं बोल रहे हैं? क्या इस मामले में बागेश्वर धाम वाले धीरेन्द्र शास्त्री जी पर्जी नहीं निकाल सकते?? अगर नहीं निकाल रहे हैं तो इनके ऊपर FIR हो मासूम लोगों को बेवकूफ बनाकर पैसे ऐंठते हैं…
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अब चिंदु क्या करेगा?
हिंदू जगाने वालों ने असल में हिंदू को सुला दिया है वरना मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के मंदिर से 200 करोड़ की चढ़ावा चोरी की ख़बर पर हिंदू ख़ामोश नहीं बैठता।
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राहुल पालीवाल (Surviving in जाहिल-युग ©) retweeted
Panic over collapsing fertility This is the daughter of India's IT Dhandho Nandan Nilekani. She is pushing the idea of 3 kids per family now, after India's fertility has collapsed to 1.9, and may touch 1.5 by 2030. Now this is something we all celebrate, subject to the simple condition that we get rich before we get old, etc. But can you guess why she is pushing this crazy idea? 1) If population starts reducing sharply from birth-side, most consumption Dhandho models, and government rent-seeking models too will begin to shrink. Horror! 2) The huge govt. surveillance machinery will have lesser and lesser to feed upon. 3) And since isn't an innovation nation, the world's interest in us will collapse faster than our fertility (as they can't sell ever more to us, any more). 4) Of course the daily fear of population explosion that WhatsApp University feeds into innocent minds will end too. Read again - Indian elite want more kids per family, not less, because their business gets whacked otherwise. For the sake of this nation, reject these Dhandhos and their predatory ideas. Surely this lady has no clue of how impossible it is for a regular middle-class family to educate even a second child now.
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टिक टिक टिक
कर्नाटक के गृह मंत्री Priyank Kharge ने RSS सरसंघचालक मोहन भागवत को सवालों का तूफान भेज दिया…..!! 100 साल पूरे कर रहे RSS से पूछा — 60,000 शाखाएँ, लाखों स्वयंसेवक, भारी-भरकम फंडिंग… फिर भी कानूनी रजिस्ट्रेशन, फंडिंग का हिसाब, टैक्स और पारदर्शिता क्यों नहीं……???? आम नागरिक, NGO, ट्रस्ट तो कानून का पालन करते हैं, तो RSS संविधान से ऊपर क्यों……??? शताब्दी मनाने से पहले पारदर्शिता दिखाओ, जवाब दो भागवत जी….!! पर्दे के पीछे से देश चलाने का दौर अब खत्म!
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क्या हुआ बे इतना सन्नाटा क्यो है. सबके हिस्से में कुछ आया होगा. चिंदू के हिस्से में राम आए. हे राम.
राममंदिर दानपात्र में करीब 200 करोड़ का घोटाला हुआ है लेकिन धीरेन्द्र शास्त्री चुप है कुमार विश्वास चुप है अनिरुद्धचार्य चुप है भद्राचार्य चुप है देवकीनंदन चुप है ये वही लोग हैं जिन्हें बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों की बहुत चिंता रहती है लेकिन राममंदिर दानपात्र लूट पर चुप है। ऐसे ही ये लोग हिंदू धर्म की रक्षा करेंगे ?
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200 करोड़ तो झाकी है मथुरा काशी बाक़ी है।
प्रभु श्री राम के नाम पर महा घोटाला, चम्पत राय ने 3 करोड़ की नजूल जमीन 24 करोड़ में खरीदी, 800 % की लूट। आखिर ED पार्टी ने इन चंदा चोरों को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया ? करोड़ो हिंदुओं की आस्था से कब तक खिलवाड़ करेंगे ED पार्टी के मुखिया "मोदी" ? भ्रष्ट- ट्रस्ट को भंग करो, चंदा चोरों को गिरफ्तार करो।
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Thats the point.
ये बूढ़ा बेशक अनपढ़ है, लेकिन तजुर्बे में PhD है। ये अच्छे से समझता है कि पिछली सरकार का पतन भी तभी शुरू हुआ जब मंत्रियों के इस्तीफे लिए गए, उनकी CBI जाँच की गई। इस्तीफा लेना मतलब गलती को स्वीकार करना। फिर पब्लिक को ऐसी लत लग जाती है कि एक के बाद के इस्तीफे माँगती है। और फिर एक दिन खुद का ही लवणेन भोज्यम हो जाता है। इसलिए इस्तीफा माँगने वालों का मजाक उड़ाओ, इग्नोर करो, आगे बढ़ो, फिर किसी नए मुद्दे में उलझा दो, 2047 का सपना दिखा दो।
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Many won’t believe it, but India has its own deep state. An organization with influence across politics, bureaucracy, universities, police, and major institutions—powerful enough to shape national discourse and policy, yet officially unregistered as a single entity. That organization is the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS). With over 80,000 branches, thousands of affiliated institutions, vast properties, and nationwide reach, critics ask: how can such a powerful organization operate without the level of public scrutiny expected of others? No official public membership list, limited financial transparency, and an identity that shifts between cultural, educational, charitable, and informal association. A street vendor must register. A giant organization influencing national life doesn’t have to. That’s why the question isn’t whether the RSS is powerful. The question is: who watches the watchdog?
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ज़ोर से बोलो जय श्रीराम। अद्भुत।
Nirmala Sitharaman has crippled India’s economy. Gadkari has damaged your vehicles with ethanol. S. Jaishankar has weakened India’s foreign policy. Dharmendra Pradhan has destroyed India’s education system. Amit Shah has destroyed Indian democracy. Narendra Modi has failed India.
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Moun - Modi ?
News giant ANI has posted 876 muted videos of PM Narendra Modi: Report
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जब राम मंदिर की ज़मीन खरीदी जा रही थी, तब मैंने एक स्टोरी की थी.. सवाल सीधा था कि दो करोड़ रुपये की ज़मीन कुछ ही घंटों में अठारह करोड़ रुपये की कैसे हो गई ! और फिर उसी ज़मीन को मंदिर ट्रस्ट ने क्यों खरीदा ! सवाल यह भी था कि अयोध्या में ज़मीनों की खरीद-फरोख्त के दौर में कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के रिश्तेदारों के नाम पर करोड़ों रुपये की ज़मीनें खरीदे जाने की बातें सामने आईं. दस्तावेज़ सार्वजनिक हुए, रजिस्ट्रियों की चर्चा हुई, लेकिन जवाब कभी नहीं मिला. जाँच के नाम पर समितियाँ बनती रहीं। बयान आते रहे. लेकिन नतीजा क्या निकला ! आज तक देश को नहीं बताया गया कि आखिर सच क्या था. करोड़ों रामभक्तों ने अपनी श्रद्धा से चढ़ावा दिया. किसी ने सौ रुपये दिए, किसी ने हजार, किसी ने लाखों. लोगों ने यह सोचकर दान दिया कि यह भगवान राम का काम है. लेकिन जब उसी आस्था से जुड़े लेन-देन पर सवाल उठे, तो जवाबदेही क्यों गायब हो गई. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी थी, वे आखिर इतने वर्षों से खामोश क्यों हैं ! राम के नाम पर वोट माँगना आसान है। राम के नाम पर उठे सवालों का जवाब देना मुश्किल क्यों हो जाता है. क्योंकि यह केवल ज़मीन का मामला नहीं है। यह करोड़ों लोगों की आस्था का मामला है. और आस्था के नाम पर उठे सवालों को दबाने से सवाल खत्म नहीं होते, वे और बड़े हो जाते हैं.
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मुझे भी कोई सहानुभूति नहीं है। और दो वोट पैसा लेकर
पटना के बेरोजगार हैं स्टेशन पर बवाल किए हैं यात्री ट्रेन रोके हुए हैं। यह भाजपा के कोर वोटर हैं इनकी घर की माताएं बहनें भी दस दस हजार में वोट बेची हैं। इनको नौकरी भी चाहिए मोदी जी भी। इनकी समस्या का समाधान फिलहाल फ्रांस से होगा, मोदी जी वहीं है। सम्राट, मोहन भागवत के साथ व्यस्त हैं। "युवा हिंदू जागरण पखवाड़े" की तैयारी चल रही है। मुझे इनसे कोई सहानुभूति नहीं है।
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राहुल पालीवाल (Surviving in जाहिल-युग ©) retweeted
Compromised PM के राज में एक भारतीय होने का मतलब दुर्गति है। विदेशी ताकत हमारे नागरिकों को मारती है। हमारी सरकार एक आज्ञाकारी नौकर की तरह चुप-चाप आदेश मान लेती है - और हमारे नागरिक सड़ने के लिए छोड़ दिए जाते हैं। इस भारतीय को घर लाइए। अभी।
“This is the dead body of our second officer. He died two days ago and his body is decomposing. We reached out to the Indian Embassy but haven’t got a positive response. Our company is hiding from us,” says Indian captain of MT Celestial anchored in Oman
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wow
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में 15 सदस्य हैं, एक पदेन सदस्य ज्ञानेश कुमार हैं जो के.चु.आ. के मुख्य हैं… दूसरे अवनीश अवस्थी है, योगी आदित्यनाथ के सलाहकार और तीसरे ज़िलाधिकारी अयोध्या जो लगातार बदलते रहते हैं… इतने बड़े लोगों की मौजूदगी में ट्रस्ट में “दान की डकैती” होती रही और सब चुप हैं… ज्ञानेश जी बंगाल जितवाने में व्यस्त रहे तो अवस्थी जी “सियासी चाह” में ब्रह्मांड के चक्कर काट रहे हैं…आस्था और श्रद्धा लुटपिट गई…इन सभी मौसेरे भाइयों के गठजोड़ के चक्कर में…
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