भाषा पर ज्ञान देने काअधिकार उस पार्टी को या फिर उस मीडिया को तो बिल्कुल नहीं है जो अनगिनत बार सारी मर्यादाएं लाँघ चुकीचाहते तो हम यही थे कि राजनैतिक विमर्श में भाषा की शुचिता बनी रहे,आप किसी पर, उसके खानदान, दादा, नाना, माँ, पिता पर टनों कचरा उछालेंगे तो कुछ छींटें आप पर भी आएगी