अजीब दौर है।
जिन्हें विधायक, सांसद, नेता दूसरी पार्टियों से चाहिए, उन्हें अपने लिए महापुरुष भी दूसरी पार्टी से ही चाहिए।
सरदार पटेल कांग्रेस के अध्यक्ष थे, कांग्रेस के नेता थे और स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री थे। वही सरदार पटेल, जिन्होंने RSS पर प्रतिबंध लगाया था।
सवाल है कि अगर अपनी वैचारिक विरासत पर इतना गर्व है, तो फिर मंचों पर मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, गोलवलकर और हेडगेवार को आगे क्यों नहीं रखा जाता?
इतिहास की सबसे बड़ी सच्चाई यही है, जो विरासत अपनी नहीं होती, उसे बार-बार उधार लेना पड़ता है।