मंडल की नीली टट्टी से लिपाई करती भाजपा
पहले मंडल ने हगा कि सवर्ण और मुसलमान भाजपा को वोट नहीं करते। ट्विटर से डिलीट मारा, फेसबुक पर रहने दिया। फिर भाजपा के आधिकारिक हैंडलों से बाढ़ आई यह बताने के लिए भाजपा को दलितों ने, आदिवासियों ने बंगाल जीत कर दे दिया।
फिर हमें मालवीय, त्रिवेदी, पात्रा समेत कई सवर्ण हैंडलों से बताया गया कि 75% रहा है दलित आरक्षित सीटों का स्ट्राइक रेट। यह नहीं बताया कि इनका कुल स्ट्राइक रेट भी 70% है। यह भी नहीं बताया की SC सीट में केवल SC नहीं होते, सवर्ण भी होते हैं।
भाजपा का पूरा बल इस बात पर रहा कि बंगाल चुनाव के बाद ये लोग स्वयं को दलित पार्टी घोषित कर, ‘ब्राह्मण-बनिया’ वाला दाग मिटा लें। ये लोग स्वयं ही इसको दाग मानते हैं, मैं नहीं मान रहा। इस चक्कर में जो हरा-नारंगी चार्ट दिखाया इन लोगों ने कि क्या कहा जाए!
बंगाल चुनाव रैलियों में इनके किसी नेता ने अंबेडकर का अ नहीं बोला, क्योंकि वहाँ ये बकलोली नहीं चलती। अब जीतने के बाद इनको मतुआ, नमोशूद्रो समेत दलित आदि याद आने लगे। वह भी तब जब बंगाल ‘जय श्री राम’ के झंडे तले हिन्दू बना नाच रहा है।
मैंने जब त्रिवेदी जी को कोट किया तो मुझे ज्ञान देने लगे कि वो तो… ये तो… अजी घंटा मेरा! कॉपी-पेस्ट पोस्ट हो रहे हैं, हर नेता एक ही बात लिख रहा है। हमें यह बताने के प्रयास हो रहे हैं कि सवर्ण अप्रासंगिक हैं क्योंकि ये इकट्ठे नहीं हैं।
@BJP4India और
@narendramodi को लगता है कि एक ‘वंदे मातरम्’ मारेंगे, लोग नाचने लगेंगे। कर दिया न समकक्ष जन-गण-मन के? कितने लोगों ने चर्चा की? ओवैसी के अलावा कहीं चर्चा भी सुनी कि ऐसा कुछ हुआ? क्योंकि अब सवर्णों को इसमें कोई रूचि नहीं है कि ‘मोदी जी ने मुसलमानों की कह के ले ली’।
अब आपका त्रिपुंड, चाहे आप कितने ही भाव से लगाओ, बहुत लोगों को नौटंकी लगने लगी है, सब चुनावी मैनेजमेंट का सोचा-समझा मैनिक्योर्ड प्लान लगता है। मुझे लगता है या नहीं, वो मैं नहीं बता रहा। आप रैलियों में हिन्दुओं का आह्वान करते हो, जीतते ही दलीत-पीड़ीत-शोषीत-वंचीत का गुणगान।
इसलिए, आज जब रात के 11 बजे आपको पोस्ट करना पड़ता है कि ‘सभी वर्गों का साथ मिला’ तो वह टट्टी पर मिट्टी डाल कर, पैर चिपकाए, दाँत निपोड़े खड़े होना है कि हाँ भैया, थोड़ी-सी हो गई।
लीपते रहो, मंडल को पालते रहो। वह देगा नई मस्त योजनाएँ। अभी ब्राह्मण को केवल जिहादी बताया है, मजा नहीं आ रहा। अभी बोलो लेख लिखे कि बंगाल में अंबेडकर की आवश्यकता है, बंगालियों को पता ही नहीं है कि बाबा साहेब ने उनके लिए संविधान लिखा, उन्हीं के कारण विवेकानंद पढ़ाई कर पाए, नेताजी विदेश जा पाए आदि।