प्रियंक खड़गे
गृह,सूचना प्रौद्योगिकी,जैव-प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस मंत्री,कर्नाटक सरकार दिनांक:13.06.2026
प्रति,
श्री मोहन भागवत जी
सरसंघचालक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS)
नागपुर
विषय: 100 वर्ष पूरे होने पर बधाई एवं संगठन की कानूनी स्थिति के संबंध में स्पष्टीकरण का अनुरोध
महोदय,
सबसे पहले,मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को उसके 100 वर्ष पूरे होने पर हार्दिक बधाई देता हूँ।एक ऐसा संगठन जो भारत और विदेशों में 60हज़ार से अधिक शाखाओं तथा करोड़ों स्वयंसेवकों का दावा करता है, निस्संदेह सार्वजनिक जीवन और समाज में महत्वपूर्ण उपस्थिति रखता है।ठीक इसी व्यापकता,प्रभाव और पहुँच के कारण RSS को पारदर्शिता,जवाबदेही तथा संवैधानिक अनुपालन के सर्वोच्च मानकों पर खरा उतरना चाहिए।अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) द्वारा जारी वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार,जो RSS की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है,संगठन की कर्नाटक में भी उल्लेखनीय उपस्थिति है।वहाँ 4,127 दैनिक शाखाएँ 1,389 साप्ताहिक मिलन तथा 60 मासिक मंडलियाँ संचालित हैं।RSS की सार्वजनिक गतिविधियाँ भी अत्यंत व्यापक हैं।आपकी रिपोर्ट के अनुसार संगठन ने 2,194 समाजोत्सव आयोजित किए,जिनमें 19,61,158 प्रतिभागी शामिल हुए।आप यह भी दावा करते हैं कि संगठन ने राज्यभर में 562 पथ-संचलन (रूट मार्च) आयोजित किए,जो सामान्यतः 2.5 से 3 किलोमीटर लंबे होते हैं और जिनमें 2,21,963 गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि कर्नाटक में RSS का एक विशाल,अनुशासित और गहराई तक फैला हुआ नेटवर्क सक्रिय है,जो दैनिक शाखाओं,साप्ताहिक एवं मासिक आयोजनों,सार्वजनिक कार्यक्रमों तथा गणवेशधारी मार्चों के माध्यम से संचालित होता है।इतनी व्यापक संगठनात्मक उपस्थिति,विशेषकर जब उसमें नियमित सार्वजनिक जुटान,गणवेशधारी मार्च तथा बड़े पैमाने पर सामाजिक पहुँच कार्यक्रम शामिल हों,को केवल निजी या अनौपचारिक व्यवस्था नहीं माना जा सकता।इससे संगठन की कानूनी स्थिति,जवाबदेही,वित्तीय पारदर्शिता,सार्वजनिक व्यवस्था,अनुमतियों,धन के स्रोतों तथा भारतीय संविधान और कानूनों के अनुपालन से जुड़े वैध प्रश्न उठते हैं।इसलिए हम RSS से अनुरोध करते हैं कि वह अपने अधिकृत पदाधिकारियों को यह स्पष्ट करने हेतु नामित करे कि इतने बड़े संगठन का संचालन किस कानूनी आधार पर किया जा रहा है,जबकि वह औपचारिक रूप से किसी कानूनी इकाई के रूप में पंजीकृत नहीं है अथवा लागू कानूनों के अंतर्गत केवल "व्यक्तियों का समूह" (Body of Individuals) माना जाता है।एक संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संगठन चाहे वह कितना भी पुराना,बड़ा या प्रभावशाली क्यों न हो जाँच और जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकता।सार्वजनिक जीवन में कार्यरत प्रत्येक नागरिक,संस्था,संगठन और निकाय से अपेक्षा की जाती है कि वह कानून का पालन करे।भारत में तो सरकारी लाभ प्राप्त करने के लिए एक साधारण सफाई कर्मचारी को भी पंजीकृत होना पड़ता है।धार्मिक संस्थाओं और धार्मिक ट्रस्टों का ऑडिट होता है।धर्मार्थ ट्रस्ट,गैर-सरकारी संगठन (NGO),समितियाँ,कंपनियाँ तथा अन्य संस्थाएँ अपनी संरचना,गतिविधियों,वित्तीय स्थिति और आय के स्रोतों का खुलासा करने के लिए बाध्य होती हैं।इसी संदर्भ में यह उचित और आवश्यक है कि RSS भी आगे आए और सार्वजनिक रूप से निम्नलिखित जानकारी प्रस्तुत करे।उसकी कानूनी स्थिति और संगठनात्मक संरचना,पदाधिकारियों और अधिकृत प्रतिनिधियों का विवरण।दान,योगदान और आय के स्रोत,व्यय और परिसंपत्तियों (संपत्तियों) का विवरण।क्या लागू (Taxes) कानून के अनुसार चुकाए जा रहे हैं।औपचारिक पंजीकरण के बिना संगठनात्मक गतिविधियाँ चलाने का कानूनी आधार।वह संवैधानिक एवं वैधानिक ढाँचा जिसके अंतर्गत संगठन बिना सार्वजनिक जवाबदेही के इतने बड़े स्तर पर कार्य करने का अधिकार होने का दावा करता है।सार्वजनिक कार्यक्रमों,पथ-संचलनों, जनसभाओं तथा अन्य संगठित गतिविधियों के लिए प्राप्त अनुमतियों,प्राधिकरणों और अनुपालन व्यवस्थाओं का विवरण।जो संगठन नियमित रूप से राष्ट्रवाद,अनुशासन और कर्तव्य की बात करता है,उसे इन मूल्यों को पारदर्शिता,कानून के पालन और भारतीय संविधान के सम्मान के माध्यम से भी प्रदर्शित करना चाहिए।
RSS सामान्य भारतीय नागरिकों से नियमों का पालन करने की अपेक्षा नहीं कर सकता, जबकि स्वयं उन्हीं मानकों से मुक्त रहने का प्रयास करे। यदि श्रमिकों,छोटी संस्थाओं,धार्मिक संगठनों,NGO,ट्रस्टों,कंपनियों और नागरिकों को पंजीकरण,खुलासा,ऑडिट और कर भुगतान करना पड़ता है,तो RSS को भी कानून का पालन करके उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
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