"घिसी-पिटी किताबें, हवा-हवाई कहानियां-80 किलो का भाला, 30 किलो की तलवार"
अंत तक जरूर पढ़ना आपके बच्चों के भविष्य का सवाल है 👇🏻👇🏻
मेरा निवेदन है राजस्थान के माननीय शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर जी से-
"सोशल मीडिया पर हल्ला मचाने से बेहतर होगा कि आप धरातल पर कुछ ठोस काम करें!"
आज के दौर में हर बच्चा 90% अंक ला रहा है, लेकिन क्या हमने एक बार भी ये सोचा कि वो क्या पढ़ रहा है?
आज भी हमारे बच्चे वही घिसी-पिटी किताबें, वही हवा-हवाई कहानियां पढ़ने को मजबूर हैं।
80 किलो का भाला, 30 किलो की तलवार, इतिहास के वीरों के शस्त्रों का वज़न — ये सब जानकर आखिर हमारे बच्चे किस प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं?
समय बदल चुका है, लेकिन हमारा पाठ्यक्रम नहीं बदला।
जब पूरी दुनिया के बच्चे स्कूलों में:
C , Java
Machine Learning, AI
Robotics, Drones
Virtual Reality, Coding
जैसे विषयों को समझ रहे हैं,
तो हमारे बच्चे आज भी भूतकाल में अटके हुए हैं।
सवाल ये है, क्या हम अपने बच्चों को भविष्य से जोड़ रहे हैं, या सिर्फ अतीत में घुमाकर भ्रमित कर रहे हैं?
श्रीमान मंत्री जी, समय आ गया है — अब सिर्फ "संस्कृति की दुहाई" देने से काम नहीं चलेगा।
हमें संस्कृति के साथ टेक्नोलॉजी का संगम करना होगा।
भविष्य की शिक्षा और आज के स्किल्स से बच्चों को लैस करना होगा, वरना हम सिर्फ पास्ट की तलवारें पढ़ते रहेंगे और दूसरे देश हमें टेक्नोलॉजी से पछाड़ते रहेंगे।
अभी नहीं जागे तो देर हो जाएगी।
शिक्षा को लेकर cosmetic changes नहीं, क्रांतिकारी बदलाव की ज़रूरत है।
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