क्या महिलाओं का सम्मान सिर्फ भाषणों में है?
झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल RIMS में महिलाओं के शौचालय पर ताला लगा दिया गया है। वो भी डॉक्टर-नर्स स्टाफ के लिए रिजर्व करके।
नतीजा?
बीमार महिलाएं, गर्भवती बहनें, बुजुर्ग माताएं - सब पुरुषों के शौचालय के बाहर लाइन में खड़ी हैं।
एक ही टॉयलेट में पुरुष यूरिनल इस्तेमाल कर रहे हैं और हमारी बहन-बेटियां मजबूरी में वहीं जा रही हैं।
कई महिलाओं ने बताया कि वहां मौजूद पुरुष अश्लील हरकतें करते हैं।
सोचिए उस मां पर क्या बीतती होगी जो अपनी बीमार बच्ची को लेकर आई है और उसे ये सब झेलना पड़ रहा है।
OPD और ब्लड कलेक्शन सेंटर के पास बना महिला शौचालय बंद है। मरीजों के लिए सिर्फ पुरुष शौचालय खुला है।
अस्पताल प्रबंधन को शर्म नहीं आती?
महिला डॉक्टर-नर्स के लिए अलग, और आम जनता की महिलाओं के लिए ताला?
क्या गरीब की इज्जत इज्जत नहीं होती?
राहुल गांधी जी, एक गुज़ारिश है आपसे।
हमने देखा है आप कुलियों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनते हैं।
ऑटो ड्राइवर, मैकेनिक, ट्रक ड्राइवर, सबके साथ आपने इंटरैक्टिव वीडियो बनाए हैं।
उनके दर्द को देश के सामने रखा है। वो वीडियो लाखों लोग देखते हैं और सरकारों को झकझोरते हैं।
आज रिम्स की इन महिलाओं को भी आपकी जरूरत है राहुल जी।
आप एक दिन रिम्स आइए। OPD के बाहर लाइन में खड़ी उन महिलाओं से मिलिए जो शर्म से चेहरा छुपाकर पुरुष टॉयलेट में जाने को मजबूर हैं।
उस मां से बात करिए जो अपनी 12 साल की बेटी का हाथ पकड़कर डर-डर के अंदर जा रही है।
उन बुजुर्ग दादी से पूछिए जिन्हें घंटे भर लाइन में लगना पड़ता है।
आप कैमरा लेकर आइए और इन बहनों की आवाज़ बनिए।
जिस तरह आपने बेरोजगार युवाओं की, किसानों की, मजदूरों की आवाज़ उठाई है, वैसे ही इन महिलाओं का दर्द भी देश को दिखाइए।
जब आप सवाल पूछेंगे तो हेमंत सोरेन सरकार और रिम्स प्रबंधन को जवाब देना ही पड़ेगा।
ये सिर्फ टॉयलेट का मुद्दा नहीं है राहुल जी।
ये इज्जत का सवाल है।
ये बताता है कि हमारे सिस्टम में आम महिला की जगह कहां है।
VIP के लिए सब कुछ रिजर्व, और जनता के लिए बेइज्जती।
रांची की बेटियां आपका इंतजार कर रही हैं।
आइए, इनके साथ एक वीडियो बनाइए। इनकी शर्म को ताकत में बदल दीजिए।
क्योंकि जब आप साथ खड़े होते हैं, तो बदलाव आता है।
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