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महिला विधायकों की चमक बाद में, पहले स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली देख लीजिए मंत्री इरफान जी! | JHARKHAND Ground Reality @BJP4Jharkhand @yourBabulal @bjpcpsingh @IrfanAnsariMLA #irfanansari #healthminister #jharkhandnews #108ambulance #healthsystemfailure #jamtaranews
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एक तो इतनी अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था, ऊपर से आठ डॉक्टर गायब, जनता बेहाल! पिथौरागढ़ जिला अस्पताल की यह खबर बेहद चिंताजनक है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं खुद वेंटिलेटर पर हैं। आठ डॉक्टरों की लंबी अनुपस्थिति के कारण मरीज इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। शुक्र है कि रेडिओलॉजिस्ट साहब छुट्टी से वापस आ गए हैं और अल्ट्रसाउन्ड की सेवा शुरू हो चुकी है, वरना आठ की जगह नौ हो जाते। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पाँच बांडधारी डॉक्टरों ने अस्पताल ज्वाइन ही नहीं किया और तीन पीजी करने के बाद लौटे ही नहीं। पहाड़ों पर डॉक्टरों की यह भारी कमी उत्तराखंड सरकार की लचर नीति और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये को साफ बयां करती है। केवल नोटिस भेजने से जनता को इलाज नहीं मिलेगा, धामी सरकार को धरातल पर सख्त कदम उठाने होंगे। पहाड़ों की इस बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का जवाबदेह कौन है? @pushkardhami @SubodhUniyal1 #TheysaidWeheard #TSWH #Uttarakhand #HealthSystemFailure #Pithoragarh #DhamiGovernment
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कोटा अस्पताल की घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि व्यवस्था पर लगा ऐसा कलंक है जिसने पांच परिवारों से उनकी खुशियां छीन लीं 1/4 #KotaHospital #Rajasthan #BJPGovernment #JusticeForMothers #HealthSystemFailure #HospitalNegligence #RajasthanNews #Accountability #SaveMothers
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उत्तर प्रदेशातील मुरादाबाद येथे सरकारी आरोग्य व्यवस्थेचा एक धक्कादायक प्रकार समोर आला आहे. येथील एका सरकारी रुग्णवाहिकेमध्ये गंभीर अवस्थेत असलेल्या रुग्णाला ऑक्सिजन देण्यासाठी चक्क हातोड्याचा वापर करावा लागल्याचा व्हिडिओ सोशल मीडियावर प्रचंड व्हायरल होत आहे. रुग्णवाहिकेत गंभीर रुग्ण तडफडत असताना, ऑक्सिजन सिलिंडरचे लॉक जाम झाले होते. ते उघडण्यासाठी कोणत्याही योग्य उपकरणाचा वापर न करता, रुग्णवाहिकेतील कर्मचाऱ्याने चालत्या वाहनातच सिलिंडरच्या लॉकवर हातोड्याने सपासप वार केले. अत्यंत संवेदनशील असलेल्या ऑक्सिजन सिलिंडरवर अशा प्रकारे हातोडा मारणे अत्यंत धोकादायक ठरू शकले असते, ज्यामुळे रुग्णाच्या आणि कर्मचाऱ्यांच्या जीवाला मोठा धोका निर्माण झाला होता. या घटनेनंतर उत्तर प्रदेशातील सरकारी आरोग्य यंत्रणेवर आणि रुग्णांच्या सुरक्षेवर तीव्र संताप व्यक्त होत असून आरोग्य विभागाने या प्रकरणाची चौकशी सुरू केली आहे. #Moradabad, #UttarPradesh, #AmbulanceHorror, #OxygenCylinder, #HealthSystemFailure
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महाराष्ट्रातील आरोग्य व्यवस्थेचे भाजप सरकारचे आरोग्य मॉडेल"! आज महाराष्ट्रातील भाजप सरकारच्या अनास्थेमुळे आरोग्य विभागाच्या अपुऱ्या सेवा मुळे जनतेचे हाल पाहून अक्षरशः डोळ्यात पाणी आणि संताप आल्याशिवाय राहत नाही! अकोला जिल्ह्यातील शासकीय रुग्णालयातून समोर आलेली ही घटना महाराष्ट्राला लाजवणारी आहे. ब्रेन स्ट्रोक झालेल्या पतीला वेळेत उपचार मिळावेत म्हणून, एका हतबल पत्नीला आपल्या पतीला पाठीवर वाहून न्यावे लागले! कारण काय? तर रुग्णालयात एक साधं 'स्ट्रेचर' सुद्धा उपलब्ध नव्हतं! भाजप आणि महायुती सरकारमधील नेते रोज विकासाच्या आणि 'सुपर स्पेशालिटी'च्या गप्पा मारतात, पण जमिनीवरची हकीकत ही आहे की गरिबांना रुग्णालयात स्ट्रेचरही मिळत नाहीये. हा फक्त रुग्णालयाचा भोंगळ कारभार नाही, तर या ट्रिपल इंजिन सरकारचे हे सपशेल अपयश आहे! मुख्यमंत्री आणि उपमुख्यमंत्री महोदय, इव्हेंटबाजी आणि जाहिरातींमधून वेळ मिळाला असेल, तर जरा महाराष्ट्राच्या शासकीय रुग्णालयांची दुरवस्था बघा! सर्वसामान्यांच्या आरोग्याशी खेळणारा हा जीवघेणा कारभार कधी थांबणार? की अजून एखाद्या गरीब रुग्णाचा जीव जाण्याची वाट पाहत आहात? जनता या क्रूर आणि निष्काळजी व्यवस्थेला कधीच माफ करणार नाही! @ArvindKejriwal @msisodia @SatyendarJain @anuragdhanda @prakashjarwal @AamAadmiParty @AAPPunjab @SanjayAzadSln @pkakkar #HealthSystemFailure #AkolaHospital #MaharashtraPolitics #BJPMinusWork #MahaYutiFailed #GovernmentHospital #ArthaShunyaVikas #Marathiews #ViralVideo
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#कोटा में प्रसूताओं की मौत के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस दुखद घटना का जिम्मेदार कौन है? यदि जांच में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का सैंपल फेल पाया गया, दवा में आवश्यक कंपोनेंट की कमी सामने आई और सप्लाई पर रोक लगानी पड़ी, तो क्या केवल औपचारिक जांच और निलंबन तक ही कार्रवाई सीमित रहेगी, या फिर वास्तविक दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई होगी? पांच परिवारों ने अपनी बेटियां, बहुएं और माताएं खो दीं। यह केवल आंकड़े नहीं, बल्कि उजड़े हुए घरों की पीड़ा है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि क्या दवा निर्माण करने वाली कंपनी, सप्लाई करने वाले जिम्मेदार लोग और गुणवत्ता जांचकर दवा को पास करने वाले अधिकारियों पर गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा? सवाल यह भी है कि जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी मरीजों तक सुरक्षित दवा पहुंचाने की थी, उनसे जवाबदेही तय होगी या नहीं। यदि किसी की लापरवाही या मिलीभगत से निर्दोष महिलाओं की जान गई है, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि मानव जीवन के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाना चाहिए। प्रदेशभर में लोग मांग कर रहे हैं कि मृतक प्रसूताओं के परिजनों को उचित न्याय मिले और प्रत्येक परिवार को कम से कम 5-5 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि सरकार यह संदेश दे सके कि नागरिकों की जिंदगी की कीमत सिर्फ फाइलों और जांच रिपोर्टों तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य व्यवस्था में इस प्रकार की लापरवाही बेहद चिंताजनक है। यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी आम लोगों का भरोसा व्यवस्था से उठता जाएगा। जनता अब केवल आश्वासन... #KotaCase #JusticeForMothers #प्रसूता_मौत_मामला #ऑक्सीटोसिन_कांड #दोषियों_पर_कार्रवाई #स्वास्थ्य_व्यवस्था #माताओं_को_न्याय #MedicalNegligence #कोटा_हॉस्पिटल_मामला #जिम्मेदार_कौन #पीड़ितों_को_न्याय #HealthSystemFailure #महिलाओं_की_सुरक्षा #राजस्थान_स्वास्थ्य_विभाग
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> **🚨 आख़िर कब तक अपनों की लाशों पर राजनीति होगी?** > मीरापुर (मुजफ्फरनगर) में 6 साल के मासूम की मौत ने समाज और सरकार दोनों के दोहरे चेहरे को बेनकाब कर दिया है! > * **समाज से सीधा सवाल:** आज बच्चा मर गया तो अस्पताल की मांग याद आ रही है? आज तक तुम सोए हुए क्यों थे? अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल करके आज तक यहाँ एक बड़ा अस्पताल क्यों नहीं बनवाया? जब तक कोई मरता नहीं, तब तक तुम किसी बड़े कदम के लिए जागते क्यों नहीं? अपनी इस घोर लापरवाही को छुपाने के लिए अब सिर्फ रोने का ढोंग मत करो! > * **सरकार भी बराबर की दोषी:** विकास के बड़े-बड़े विज्ञापनों और दावों के बीच क्या इस इलाके के लोगों को एक इमरजेंसी मेडिकल सुविधा तक पाने का हक नहीं है? जनता के टैक्स का पैसा कहाँ जा रहा है? अगर वक्त पर इलाज मिलता तो आज वो मासूम जिंदा होता। इस प्रशासनिक नाकामी को छुपाया नहीं जा सकता! > **अब आप बताइए:** इस मौत का असली गुनहगार कौन है? वो सोया हुआ समाज जो हादसा होने के बाद जागता है, या वो निकम्मी सरकार जो बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं तक नहीं दे पाती? > 👇 **कमेंट में अपनी राय दें और सच का सामना करें!** 👇 > #Muzaffarnagar #Meerapur #HealthSystemFailure #SocialAwareness #Debate >
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सिर्फ एक इंसान की मौत नहीं, हमारी संवेदनहीन व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है यह घटना!* *नीचे दी गई कड़वी हकीकत को पढ़ेंगे, तो रूह कांप उठेगी कि हम कैसे सिस्टम के भरोसे जी रहे हैं...* *बेंच पर दम तोड़ती इंसानियत चमकती हुई आलीशान इमारतें, 'बेहतर स्वास्थ्य सेवा' के बड़े-बड़े सरकारी विज्ञापन और आधुनिक सुविधाओं के ऊंचे-ऊंचे दावे—नोएडा के सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल की भव्यता देखकर कोई भी धोखा खा जाए। लेकिन 14 मई की उस खौफनाक रात ने यह साबित कर दिया कि इन आलीशान दीवारों के पीछे सिर्फ और सिर्फ संवेदनहीनता का सन्नाटा पसरा है। 32 साल का नीरज कुमार, जिसके सीने में शायद एक बेहिसाब दर्द था, अपनी आखिरी उम्मीद लेकर इस 'तथाकथित' जीवनदायिनी इमारत की दूसरी मंजिल पर पहुँचा था। उसके हाथ में अस्पताल की एक पर्ची थी—वही पर्ची जो सरकारी फाइलों में एक 'मरीज' की एंट्री तो दर्ज कर लेती है, लेकिन एक इंसान की सांसों की गारंटी नहीं दे पाती। उस पर्ची पर नाम और पता तक दर्ज करने की जहमत किसी ने नहीं उठाई थी। वह सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा नहीं, बल्कि इस खोखले सिस्टम का एक और दस्तावेज़ था। नीरज डॉक्टरों का इंतज़ार करता रहा। मिनट, घंटों में बदलते रहे। वह उसी दूसरी मंजिल की सूनी बेंच पर बैठा रहा, इस आस में कि कोई सफेद कोट पहने फरिश्ता आएगा, उसकी नब्ज़ टटोलेगा और उसे इस असहज कर देने वाले दर्द से निजात दिलाएगा। लेकिन उस रात उस अस्पताल में डॉक्टर तो दूर, इंसानियत भी ड्यूटी से नदारद थी। दवा और इलाज की उम्मीद में पथराई आँखों के साथ, नीरज की ज़िंदगी की डोर उसी ठंडी लोहे की बेंच पर टूट गई। वह सो गया... हमेशा के लिए। शर्मनाक बात यह नहीं है कि एक बीमारी ने उसकी जान ले ली। शर्मनाक और झकझोर देने वाली हकीकत यह है कि डॉक्टरों, नर्सों, वार्ड ब्वॉयज और सुरक्षाकर्मियों से पटे पड़े इस अस्पताल में घंटों तक एक लाश वीराने में पड़ी रही और किसी को भनक तक नहीं लगी। जिस जगह पर हर पल ज़िंदगी बचाने का पहरा होना चाहिए था, वहाँ मौत घंटों तक आराम से तमाशा देखती रही। रात के सन्नाटे में जब एक गार्ड की नज़र उस बेजान शरीर पर पड़ी, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तब तक सिस्टम की लापरवाही नीरज को लील चुकी थी। अस्पताल प्रबंधन के पास अब जांच के खोखले आश्वासन और कागज़ी औपचारिकताएं बची हैं। **सवाल सीधा है:* * अगर करोड़ों की लागत से बनी इन भव्य इमारतों में एक आम इंसान इलाज के इंतज़ार में बेंच पर बैठे-बैठे दम तोड़ दे, तो इन आधुनिक सुविधाओं के झूठे दावों का जनाज़ा क्यों न निकाला जाए? हाथ में पर्ची लिए तड़पते हुए मर जाना क्या यह नहीं दिखाता कि हमारा सिस्टम अंदर से कितना बीमार और लाचार हो चुका है? यह एक नीरज की मौत नहीं है, यह हर उस आम नागरिक के भरोसे की हत्या है जो टैक्स भरता है और बदले में सिर्फ एक ठंडी बेंच पर लावारिस मौत पाता है। #Noida #NoidaNews #HealthSystemFailure #GautamBuddhaNagar #SystemParTamacha #HumanityDied #JusticeForNeeraj
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कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद हुई माताओं की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। जिस अस्पताल में नई जिंदगी जन्म लेनी चाहिए, वहां माताओं की सांसें थम जाना बेहद दर्दनाक और शर्मनाक है। सरकार बताये — आखिर ऐसी कौन सी लापरवाही हुई कि एक साथ कई महिलाओं की हालत बिगड़ गई? क्या स्वास्थ्य विभाग सिर्फ विज्ञापनों में ही बेहतर है? क्या सरकारी अस्पतालों में गरीब परिवारों की जिंदगी भगवान भरोसे छोड़ दी गई है? एक माँ की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, पूरा परिवार टूट जाता है। आज जरूरत है पारदर्शी जांच की, जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की। जनता भावनात्मक भाषण नहीं, सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवस्था चाहती है। मातृत्व की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है — और इस जिम्मेदारी में हुई चूक माफ नहीं की जा सकती। #Kota #Rajasthan #MedicalCollege #HealthSystemFailure #Justice #KotaNews #WomenSafety @ashokgehlot51 @ShantiDhariwalk @BhajanlalBjp
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🚨 THIS IS NOT HEALTHCARE. THIS IS NEGLIGENCE. 🚨 My father’s elder brother (bade papa) is fighting between life & death in Karnataka. We rushed him to the so called biggest government hospital in the district… And this is what we faced: ❌ No bed ❌ No ventilator ❌ No urgency ❌ No response A critical patient was left outside while a “24/7 emergency hospital” stood silent. No action. No care. No system. We were forced to shift him to a private hospital while every second was slipping away. How many more families have to go through this? How many more lives will be lost because the system fails at the most crucial moment? This is not an isolated incident. This is a collapse of public healthcare. I demand immediate accountability and action from: @CMofKarnataka @siddaramaiah @DKShivakumar @dineshgrao If a government hospital cannot provide basic emergency care, then what is it even there for? This cannot continue. This must be fixed. #Karnataka #HealthcareCrisis #Gulbarga #MedicalEmergency #Accountability #India #PublicHealth #SaveLives #HealthSystemFailure #EmergencyCare #propfirmmedia📈
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झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर है, यह कहना बिल्कुल भी अतिशयोक्ति नहीं होगी। सरायकेला के राजनगर सरकारी अस्पताल में मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराने की कोशिश के दौरान माँ और नवजात शिशु की दर्दनाक मौत ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। 21वीं सदी में भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में दो जिंदगियों का यूँ चला जाना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता का प्रतीक है। जहाँ एक ओर आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की बात होती है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल बिजली और बैकअप जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए भी जूझ रहे हैं, यह स्थिति अत्यंत शर्मनाक है। और इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अपने विभाग की जमीनी समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय अन्य मुद्दों में व्यस्त नजर आते हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। गढ़वा, दुमका, रांची या जमशेदपुर लगभग हर जिले से ऐसी ही तस्वीर सामने आ रही है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। वहीं प्रशासन का रवैया भी सवालों के घेरे में है, जहाँ दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिशें दिखती हैं। इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। #jharkhand #HealthcareCrisis #HealthSystemFailure #MedicalNegligence #JusticeForVictims @JharkhandCMO
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डिलीवरी के दौरान CHC की बिजली गई, स्वास्थ्य सहिया जच्चा और बच्चा ख*त्म, राजनगर में परिजनों का गंभीर आरोप #SeraikelaNews #RajnagarCHC #JharkhandHealth #HospitalNegligence #BreakingNews #HealthSystemFailure #JharkhandNews #MedicalNegligence #PublicHealth #HindiNews #NewsAlert #HealthcareCrisis #JharkhandUpdate #PatientSafety #IndiaHealthNews
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चतरा:कुंदा भ्रष्टाचार का अनोखा चेहरा,ममता वाहन अस्पताल की जगह बारात में व्यस्त गर्भवती महिला बाइक से पहुंची अस्पताल @DCChatra @IrfanAnsariMLA #ChatraNews #HealthSystemFailure #MamtaVahanScam #JharkhandHealth #KundaChatra #Jharkhand #JharkhandNews #JharkhandUpdate #JharkhandBreaking
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सिद्धार्थनगर CHC में स्वास्थ्य सिस्टम फेल एक बेड पर तीन मरीजों का हो रहा इलाज #SiddharthNagar #HealthSystemFailure #CHCIssues #UPHealthcare #PrimeNews #primenewsnetwork @PrimeNewsInd @siddharthnagpol @CMOfficeUP
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#ଚିକିତ୍ସା_ଅବହେଳାରୁ_ନବଜାତର_ମୃତ୍ୟୁ ସୁବର୍ଣ୍ଣପୁର: ଚିକିତ୍ସା ଅବହେଳାରୁ ନବଜାତ ଶିଶୁର ମୃତ୍ୟୁ ଅଭିଯୋଗ ଜିଲ୍ଲା ମୁଖ୍ୟ ଚିକିତ୍ସାଳୟରେ ନବଜାତ ଶିଶୁର ମୃତ୍ୟୁ ଅଭିଯୋଗ ନର୍ସଙ୍କ ଦାୟିତ୍ବହୀନତା ଯୋଗୁଁ ମୃତ୍ୟୁ ନେଇ ପରିବାର ଲୋକଙ୍କ ଅଭିଯୋଗ ମୃତ ଶିଶୁକୁ ଦୀର୍ଘ ସମୟ ଧରି ବାହାରେ ବସିଛନ୍ତି ପରିବାର ଲୋକ ଅଭିଯୋଗର ତଦନ୍ତ ହେବ କହିଲେ CDMO #Subarnapur #Odisha #MedicalNegligence #Justice #HealthSystemFailure #NewbornDeath #DistrictHospital #ArgusNews
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"अस्पताल की बदहाली = विधायक की विफलता! 🏥🚫 ​जहाजपुर के सरकारी अस्पताल की ये तस्वीरें चीख-चीख कर विधायक गोपीचंद मीणा जी के दावों की पोल खोल रही हैं। जब सेहत ही सुरक्षित नहीं, तो कैसा विकास? सफाई के नाम पर करोड़ों का बजट कहाँ गया? #BJPFails#JahazpurUpdate #HealthSystemFailure
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बनारस के होर्डिंग्स और बिहार की लाचारी: स्वास्थ्य व्यवस्था की एक कड़वी हकीकत! 🏥💔 हमारा मानना है कि स्वास्थ्य किसी भी नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन बिहार के मरीजों के लिए यह अधिकार अब वाराणसी की गलियों में नीलामी का विषय बन गया है। हाल ही में वाराणसी के सरकारी BHU ट्रॉमा सेंटर के बाहर निजी अस्पतालों द्वारा लगाए गए होर्डिंग्स इस विडंबना की पराकाष्ठा हैं। 1. BHU का इनकार और निजी अस्पतालों का 'व्यापार' यह कितनी बड़ी विडंबना है कि जिस सरकारी संस्थान (BHU) पर बिहार के लाखों लोग भरोसा करते हैं, उसने आयुष्मान योजना के तहत बकाया भुगतान न होने के कारण बिहार के मरीजों का इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए। ठीक उसी गेट के बाहर निजी अस्पतालों के होर्डिंग्स बिहार के मरीजों को लुभाने के लिए सज गए हैं। यह सीधे तौर पर "मजबूरी का व्यापार" है। 2. बिहार की यूपी पर निर्भरता: आखिर कब तक? सासाराम, भभुआ, औरंगाबाद और बक्सर जैसे जिलों के लिए आज भी कोई गंभीर इमरजेंसी होने पर पहला नाम वाराणसी का ही आता है। हमारी सरकारों ने दशकों में यहाँ एक ऐसा उच्च-स्तरीय ट्रॉमा सेंटर या अस्पताल विकसित नहीं किया जहाँ गंभीर मरीजों को बचाया जा सके। 3. आयुष्मान कार्ड: राहत या केवल एक प्लास्टिक का टुकड़ा? जब सरकारी संस्थान ही बकाया राशि के नाम पर आयुष्मान कार्ड लेने से मना कर दें, तो गरीब मरीज कहाँ जाए? निजी अस्पताल इन होर्डिंग्स के जरिए उन्हें बुला तो रहे हैं, लेकिन वहां का खर्च एक आम बिहारी परिवार की कमर तोड़ देता है। 4. सिस्टम की विफलता का विज्ञापन वाराणसी की सड़कों पर लगे ये होर्डिंग्स असल में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता के "विज्ञप्ति" (Advertisement) हैं। यह दर्शाते हैं कि पड़ोसी राज्य को पता है कि बिहार में इलाज की कमी है, और वे इसका आर्थिक लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हमारा पक्ष: हम बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग से पूछना चाहते हैं कि आखिर कब तक शाहाबाद और मगध के लोग इलाज के लिए वाराणसी के चक्कर काटते रहेंगे? हमें होर्डिंग्स नहीं, अपने जिले में बेहतर अस्पताल और कार्यशील आयुष्मान योजना चाहिए। @DeepakRLM @mangalpandeybjp @UpendraKushRLM @snehlataRLM @samrat4bjp @NitishKumar @narendramodi @shivesh4BJP #BiharHealthCrisis #VaranasiMedicalLobby #JusticeForBiharPatients #HealthSystemFailure
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महिला की हालत बिगड़ने से हुई मौत स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल #HealthCrisis #WomanDeath #PoorHealthcare #PublicHealthConcern #BreakingNews #UttarPradesh #MedicalIssues #HealthSystemFailure #HealthcareDebate #JusticeForVictim #PrimeNewsNetwork @journoakash @PrimeNewsInd @dmbareilly @adgzonebareilly @Uppolice @UPGovt @CMOfficeUP
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