📜 अब केवल 8 दिन शेष – 15 अगस्त 2025
ध्वजारोहण – राष्ट्रीय अस्मिता का शिखर बिंदु
“ध्वज मात्र एक प्रतीक नहीं, यह राष्ट्र की आत्मा का भौतिक रूप है।”
आदरणीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं राष्ट्रनिष्ठ कार्यकर्ताओं,
देशभर में आज़ादी का अमृत महोत्सव, अपने अंतिम चरण में है। 15 अगस्त केवल एक उत्सव नहीं, यह भारतीय संविधान की जीवंत अभिव्यक्ति है। अब जबकि केवल 9 दिन शेष हैं, आइए हम संवैधानिक मर्यादाओं और ध्वज आचार संहिता को समझें और उसका अनुपालन करें।
🔺 राजनीतिक ध्वजारोहण हेतु विशेष आचार-संहिता:
संविधान और ‘भारतीय ध्वज संहिता, 2002’ के अनुसार:
1️⃣ ध्वज का उपयोग किसी राजनीतिक लाभ, दलगत प्रचार, या व्यक्तिगत महिमा के लिए नहीं किया जा सकता।
2️⃣ राष्ट्रीय ध्वज किसी भी दल के झंडे से ऊपर या नीचे नहीं लगाया जा सकता।
3️⃣ ध्वज का अपमान - जैसे फटना, उल्टा लगना, ज़मीन पर गिरना या रात्रि में बगैर प्रकाश के फहराना - दंडनीय अपराध है।
4️⃣ राजनीतिक कार्यक्रमों में ध्वज के साथ पूर्ण सम्मान, सावधान मुद्रा, और राष्ट्रगान के समय नतमस्तक रहना अनिवार्य है।
5️⃣ सरकारी या निजी भवनों पर झंडा केवल विधिसम्मत एवं अधिकृत व्यक्तियों द्वारा ही फहराया जाए।
🌟 विशेष अपील:
आप सभी जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यालय-प्रशासन, एवं पंचायत-पदाधिकारीगण, कृपया सुनिश्चित करें कि:
✅ ध्वज से जुड़ी प्रत्येक गतिविधि संविधान की भावना के अनुरूप हो।
✅ प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा ही ध्वजारोहण सम्पन्न हो।
✅ 15 अगस्त की पूर्व संध्या (14 अगस्त की शाम) को जन संवाद, संविधान वाचन, और तिरंगा संकल्प सभा का आयोजन हो।
🛑 ध्यान रहे:
“ध्वज की मर्यादा की रक्षा, केवल प्रशासन की नहीं, हम सबकी सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी है।”
🙏 आइए, इस 15 अगस्त को राजनीतिक सीमाओं से परे जाकर, केवल और केवल राष्ट्रध्वज को सर्वोपरि रखकर, संविधान के अनुरूप ध्वजारोहण करें।
जय हिन्द।
वंदे मातरम्।
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भूतपूर्व विधायक - खड्डा (329)
जटा शंकर त्रिपाठी
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