जेईई एडवांस : छात्र बोले- एकदम न बदलें पैटर्न, मिले स्पष्ट जानकारी और समय
"परीक्षा प्रणाली में सुधार आवश्यक है, लेकिन किसी भी बदलाव को लागू करने से पहले विद्यार्थियों को पर्याप्त समय, स्पष्ट दिशा-निर्देश और तैयारी का अवसर मिलना चाहिए."
#आगरा में देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस के परीक्षा पैटर्न में संभावित बदलाव को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है. जानकारी के अनुसार भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित (पीसीएम) आधारित पारंपरिक प्रश्नों के स्थान पर एप्टीट्यूड आधारित प्रश्नों को अधिक महत्व देने पर विचार किया जा रहा है. इस प्रस्तावित बदलाव को लेकर छात्रों ने सुधार का स्वागत तो किया है, लेकिन इसे अचानक लागू करने का विरोध भी जताया है.
समाचार के अनुसार विशेषज्ञों का मानना है कि इंजीनियरिंग के लिए केवल विषय ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और समस्या समाधान कौशल भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में एप्टीट्यूड आधारित मूल्यांकन एक बेहतर विकल्प हो सकता है. हालांकि, किसी भी नए पैटर्न को बिना पूर्व सूचना और पर्याप्त तैयारी अवधि के लागू करना लाखों विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार विद्यार्थियों ने मांग की है कि यदि परीक्षा पैटर्न में बदलाव किया जाता है तो इसकी जानकारी कम से कम एक वर्ष पहले दी जाए. साथ ही विस्तृत दिशा-निर्देश, सिलेबस, मॉडल प्रश्नपत्र और मॉक टेस्ट भी जारी किए जाएं, ताकि छात्र नए प्रारूप को समझकर अपनी तैयारी को उसी अनुरूप ढाल सकें. छात्रों का कहना है कि अचानक परिवर्तन से उनकी वर्षों की तैयारी और रणनीति प्रभावित हो सकती है.
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले व्यापक चर्चा, परीक्षण और छात्रों से सुझाव लेना आवश्यक है. पारदर्शिता और चरणबद्ध तरीके से किए गए सुधार परीक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, न्यायसंगत और छात्र हितैषी बना सकते हैं.
प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार का उद्देश्य विद्यार्थियों की वास्तविक क्षमता, तार्किक सोच और नवाचार कौशल का बेहतर आकलन करना होना चाहिए. लेकिन किसी भी परीक्षा पैटर्न में अचानक परिवर्तन लाखों विद्यार्थियों की तैयारी और मानसिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है. इसलिए किसी भी बदलाव की पूर्व घोषणा, पर्याप्त संक्रमण अवधि, मॉडल टेस्ट और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना आवश्यक है. शिक्षा व्यवस्था में सुधार तभी सार्थक है, जब वह विद्यार्थियों के हित, समान अवसर और पारदर्शिता के सिद्धांतों के अनुरूप हो.
दीपक सिंह सरीन, राष्ट्रीय संयोजक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO)
PAPA NGO - Progressive Association of Parents Awareness
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