⚡ राजधानी लखनऊ में वर्टिकल व्यवस्था फेल?
मेंटेनेंस के नाम पर “अधिकारहीन चेकिंग”, संविदा गैंग राज और ₹6000 वसूली का आरोप
लखनऊ। मध्यांचल डिस्कॉम के गोमती नगर जोन में लागू की गई वर्टिकल व्यवस्था अब खुद अपने उद्देश्य पर सवाल खड़े कर रही है। सूत्रों के अनुसार, मेंटेनेंस के नाम पर संविदा कर्मियों का एक खुदमुख्तार गैंग क्षेत्र में सक्रिय है—जो न तो किसी अधिकृत अधिकारी के साथ चलता है और न ही किसी लिखित आदेश के तहत। बिजली चोरी दिखने पर न सूचना, न अधिकृत टीम—बस खुद ही चेकिंग और खुद ही कार्रवाई।
⚠️ अमराई गांव पावर हाउस से चौंकाने वाला खुलासा
अमराई गांव पावर हाउस क्षेत्र में सुबह 7 से 10 बजे के बीच केवल दो शिकायतें दर्ज थीं—एक मुर्गी फार्म और दूसरी वासुदेव डिग्री कॉलेज से जुड़ी। इसके बावजूद पावर हाउस से 6–7 संविदा कर्मियों की टीम निकल पड़ी और शिकायत स्थल से करीब 1 किलोमीटर दूर एक विकसित कॉलोनी में पहुंचकर बिना अधिकारी के स्वयं चेकिंग कर डाली।
🔌 तार उखाड़े, तीन घंटे तक अफसरों को खबर नहीं
सूत्र बताते हैं कि मौके से तार उखाड़कर लाए गए, लेकिन करीब तीन घंटे तक इसकी सूचना किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को नहीं दी गई। जबकि राजधानी में वर्टिकल प्रणाली के तहत हर काम के लिए अलग-अलग अधिकृत टीमें और जिम्मेदार अधिकारी तय हैं—तो यह अधिकार किसके थे?
💸 ₹6000 वसूली का आरोप, नियंत्रण पर सवाल
इस कथित चेकिंग के बाद एक उपभोक्ता से ₹6000 लिए जाने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि यूपीपीसीएल मीडिया इस आरोप की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यह आरोप विभागीय नियंत्रण, जवाबदेही और ईमानदारी पर सीधा तमाचा है।
🛡️ “पारस पत्थर” बचाने में जुटे अफसर?
खबर प्रसारित होने के बाद संबंधित उच्च अधिकारी अपने “होनहार” संविदाकर्मियों को बचाने में जुटे दिखे। विभाग के भीतर यह चर्चा आम है कि अगर किसी संविदाकर्मी पर कार्रवाई हुई, तो अफसरों के हाथ से कमाई का पारस पत्थर निकल जाएगा।
🔁 हटाया गया, फिर लौटा—गांधीवाद की आंधी में!
हैरानी की बात यह कि संविदाकर्मी सुजीत सिंह चौहान को पहले भी हटाया गया था। मामला शांत होते ही वह फिर से बहाल हो गया—मानो जवाबदेही का कोई नियम ही न हो।
📞 सवालों से बचते अधिकारी
मुख्य अभियंता सुशील गर्ग इस कदर असहज नजर आए कि यूपीपीसीएल मीडिया का कॉल तक उठाने की हिम्मत नहीं कर सके।
❓बड़ा सवाल
👉 क्या वर्टिकल व्यवस्था सिर्फ कागजों में है?
👉 क्या मेंटेनेंस कर्मियों को अधिकारहीन चेकिंग और वसूली की खुली छूट है?
👉 क्या जिम्मेदार अधिकारी अपने कमाऊ संविदाकर्मियों को बचाने के लिए किस हद तक गिरेंगे?
जवाब चाहिए—और जवाबदेही भी— यूपीपीसीएल मीडिया
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