🚨 मोदी सरकार का "अमृतकाल" या आम जनता के लिए "महंगाई का महाकाल"? 🚨
पश्चिम एशिया संकट और 'ईरान युद्ध' तो सरकार के लिए सिर्फ एक नया बहाना है, असल मकसद चंद मुनाफाखोरों को आम जनता की जेब काटने की खुली छूट देना है! मात्र 46 दिनों में ही देश में एक साल के बराबर महंगाई बढ़ गई है। महज डेढ़ महीने में ही गृहणियों की रसोई का खर्च 15% से 20% तक बढ़ गया है और 'चुनावी मोड' में व्यस्त सरकार गहरी नींद में है।
जनता की गाढ़ी कमाई पर पड़ रहे डाके की क्रूर सच्चाई देखिए:
❌ रसोई गैस की लूट: उज्ज्वला का झूठा ढोल पीटने वालों के राज में घरेलू सिलेंडर ₹400 से छलांग लगाकर ₹913 हो गया है। प्रशासन की नाक के नीचे कालाबाजारी का यह नंगा नाच चल रहा है कि मजबूरी में जनता को एक सिलेंडर ₹3000 तक में खरीदना पड़ रहा है! कमर्शियल सिलेंडर के दाम 3 बार बढ़ चुके हैं, जिससे रेस्टोरेंट में एक कप चाय पीना भी आम आदमी के लिए भारी पड़ रहा है।
❌ कॉर्पोरेट की "Shrinkflation" वाली धोखेबाजी: FMCG कंपनियों को जनता को लूटने का लाइसेंस दे दिया गया है। जनता को पता न चले इसलिए 100 ग्राम के बिस्किट व नमकीन के पैकेट का वजन चुपचाप 90 से 85 ग्राम कर दिया गया है। कॉम्बो पैक और मुफ्त मात्रा देनी पूरी तरह बंद कर दी गई है।
❌ रोजमर्रा का राशन बना आग का गोला: पाम ऑयल, सूखे मेवे से लेकर रोजमर्रा के मसाले—हल्दी, जीरा, धनिया और सौंफ के दामों में बेतहाशा आग लगी है। प्लास्टिक का कच्चा दाना (50%) और पैकेजिंग (40%) महंगी होने का सारा बोझ सीधे उपभोक्ता के कंधों पर डाल दिया गया है।
❌ मिडिल क्लास पर चौतरफा प्रहार: इस भयंकर गर्मी में थोड़ी राहत देने वाले AC (8-12%), फ्रिज और TV (5%) तक महंगे हो गए हैं। मेमोरी चिप के बहाने स्मार्टफोन 10% महंगे कर दिए गए हैं।
❌ सफर और रिहाइश, दोनों पहुंच से बाहर: आम आदमी के लिए सफर करना अब विलासिता है। घरेलू विमान का किराया 50-70%, अंतरराष्ट्रीय किराया 120% तक और होटलों का किराया 10-15% महंगा हो चुका है।
❌ आम जरूरतें और आशियाने का सपना टूटा: 1 अप्रैल से मकान के किराये में 5-10% का इजाफा हो गया है। घर पर खाना मंगाना भी अब महंगा है क्योंकि स्विगी/ज़ोमैटो का प्लेटफॉर्म चार्ज 17% बढ़ गया है। अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए सीमेंट ₹20/बैग महंगा, टाइल्स उत्पादन ठप होने से 10% महंगी और स्टील के दाम ₹300-500/टन तक बढ़ गए हैं।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल, CNG और PNG के दाम भी बढ़ेंगे।
क्या मोदी सरकार का काम सिर्फ अंतरराष्ट्रीय संकटों को जनता को लूटने के "अवसर" में बदलना रह गया है? इस भयंकर महंगाई, कालाबाजारी और मुनाफाखोरी पर लगाम कसने की कोई नीति आपके पास है भी या सिर्फ खोखले नारों से पेट भरा जाएगा?
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