‼️ 🚨 "Brahminical" साइंस/गपोड़ ये सबसे बड़ा झूठ है 😂
भाई लोग, एक वायरल क्लेम पर बात करते हैं जो सुधांशु त्रिवेदी जी की स्पीचेस में बार-बार आता है – कि NASA ने राम की जन्म तिथि सिद्ध कर दी। मैंने खुद डीप रिसर्च की, सोर्स चेक किए। चलो, फैक्ट्स देखते हैं।
ये क्लेम मुख्य रूप से पुष्कर भटनागर जी (IRS ऑफिसर) की किताब "Dating the Era of Lord Ram" से आता है। उन्होंने रामायण में बताई ग्रह-नक्षत्र स्थिति को Planetarium Gold सॉफ्टवेयर में डाला और डेट निकाली: 10 जनवरी 5114 BC।
🔥 लेकिन सॉफ्टवेयर NASA का नहीं है। ये एक पुराना कमर्शियल सॉफ्टवेयर है जो NASA के पब्लिक JPL ephemeris डेटा यूज़ करता है – ये डेटा कोई भी फ्री में यूज़ कर सकता है। NASA ने कभी राम जन्म या रामायण पर कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं दिया।🤣🤣
कई रिसर्चर्स (जैसे निलेश नीलकंठ ओक) ने इस डेट की क्रिटिसिज्म की है। ग्रहों की ऐसी स्थिति हजारों साल में कई बार रिपीट होती है। रामायण के दूसरे एस्ट्रोनॉमिकल और सीजनल डिस्क्रिप्शन इस डेट से मैच नहीं करते।🔥🔥
राम सेतु की NASA सैटेलाइट इमेजेस सिर्फ एक नेचुरल लाइमस्टोन शोल दिखाती हैं। NASA ने कभी नहीं कहा कि ये मानव-निर्मित है या रामायण से जुड़ा है। "NASA ने प्रूव किया" वाला हिस्सा स्पीच में ऐडेड इंप्रेशन है।🧐😂
ये कैलकुलेशन इंटरेस्टिंग हो सकता है, लेकिन ये राम के जन्म को "सिद्ध" नहीं करता। हिस्टोरिकल या आर्कियोलॉजिकल प्रूफ के बिना सिर्फ एस्ट्रोनॉमिकल मैच से घटना साबित नहीं होती।🫡🥵
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