🛑 शिक्षा के नाम पर 'खुली लूट': अब तो जागिए प्रशासन! 🛑
आज की कड़वी सच्चाई: किताबें ज्ञान का साधन नहीं, बल्कि कमीशन का जरिया बन गई हैं। नागौर भास्कर की यह रिपोर्ट दिल दहलाने वाली है। कक्षा 2 के बच्चे का कोर्स 4,000 रुपये के पार पहुँच गया है! जो किताबें NCERT में ₹200 में मिल सकती हैं, निजी स्कूल वही किताबें 20 गुना महंगी दरों पर निजी पब्लिशर्स की लगवा रहे हैं।
📉 आखिर ये मनमानी कब तक?
⚫️ सिंडिकेट का खेल: चुनिंदा दुकानों से किताबें खरीदने का दबाव बनाना सीधे तौर पर अभिभावकों की जेब पर डकैती है।
⚫️ नियम सिर्फ कागजों पर: नियम कहता है कि 5 साल तक ड्रेस नहीं बदली जाएगी, लेकिन स्कूल हर साल नया 'कलेक्शन' ले आते हैं।
⚫️ अधिकारी मौन क्यों?: शिक्षा विभाग कह रहा है कि 'शिकायत मिलेगी तब कार्रवाई करेंगे'। क्या शहर में हो रही इस सरेआम लूट को देखने के लिए किसी लिखित पत्र की ज़रूरत है?
🧠 जरा सोचिए...
जब शिक्षा का बुनियादी ढांचा ही 'लालच' और 'भ्रष्टाचार' पर टिका होगा, तो हम बच्चों से ईमानदारी की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? यह स्कूलों की मनमानी नहीं, बल्कि मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट की हत्या है।
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