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यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं, यह संघर्ष एक व्यवस्था के खिलाफ है। बामसेफ राष्ट्रीय अधिवेशन व्यवस्था परिवर्तन का संकल्प। #BamcefNationalConvention #SystemChangeNow
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यह केवल अधिवेशन नहीं, यह बहुजन समाज का संकल्प है व्यवस्था परिवर्तन का। बामसेफ राष्ट्रीय अधिवेशन ✊ #BamcefNationalConvention #SystemChangeNow
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23 Nov 2025
Economic growth demands that nature is removed from your lives- so you cannot see how it is destroying it. There is no economy on a dead planet. #SystemchangeNOW
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11 Oct 2025
भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की बुनियाद "न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता" पर टिकी हुई है। लेकिन जब इसी व्यवस्था में कार्यरत एक उच्च पदस्थ अधिकारी मानसिक उत्पीड़न, जातीय भेदभाव और प्रशासनिक दबाव के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हो जाए, तो यह लोकतंत्र की आत्मा पर गहरा प्रहार है। आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार की आत्महत्या और उनकी पत्नी आईएएस अवनीत पी. कुमार के साथ प्रशासनिक व्यवहार इस बात का संकेत है कि सत्ता और व्यवस्था का चेहरा कितना कठोर और संवेदनहीन हो चुका है। वाई पूरण कुमार, हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी थे। 9 अक्टूबर 2025 को उनका शव उनके आवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। उनके पास से एक फाइनल नोट बरामद हुआ जिसमें उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर मानसिक और जातीय उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। उनकी पत्नी, आईएएस अधिकारी अवनीत पी. कुमार ने साफ कहा कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि प्रशासनिक हत्या है। उन्होंने मांग की कि एफआईआर में उन सभी वरिष्ठ अधिकारियों के नाम दर्ज किए जाएँ जो उनके पति की मौत के लिए जिम्मेदार हैं। जब यह घटना हुई, तो जनता को उम्मीद थी कि सरकार तत्काल कार्रवाई करेगी, लेकिन हुआ इसका उल्टा। अवनीत कुमार को न केवल न्याय की लड़ाई में अकेला छोड़ दिया गया, बल्कि उन पर यह आरोप लगने लगे कि वे “व्यवस्था को चुनौती” दे रही हैं। कई स्वतंत्र सूत्रों के अनुसार, उनके घर को पुलिस ने चारों ओर से घेर लिया ताकि वे प्रेस से बात न कर सकें। अगर यह सत्य है, तो यह लोकतंत्र नहीं, अधिनायकवाद का चेहरा है — जहाँ सच बोलने वालों को कैद किया जाता है और अपराधियों को सुरक्षा दी जाती है। वाई पूरण कुमार केवल एक अधिकारी नहीं थे, बल्कि वे उस वर्ग से आते थे जिसे भारत की सामाजिक व्यवस्था ने सदियों से हाशिए पर रखा है। उनके “जातीय अपमान” की शिकायतें पहले भी प्रशासन के संज्ञान में थीं, पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जब व्यवस्था अपने ही अधिकारियों को सुरक्षित नहीं रख पा रही, तो आम दलित, बहुजन और वंचित व्यक्ति के लिए न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है? अवनीत कुमार ने अपने पति की मौत के बाद न्याय की मांग उठाई — उन्होंने कहा कि > “मैं शव का अंतिम संस्कार नहीं करूंगी जब तक मेरे पति को न्याय नहीं मिलेगा।” उनकी यह दृढ़ता उस हर महिला की आवाज़ है जो सत्ता के अत्याचार के खिलाफ खड़ी है। लेकिन प्रशासन ने उन्हें हाउस अरेस्ट जैसा व्यवहार देकर उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश की। यह केवल एक अधिकारी की पत्नी के साथ अन्याय नहीं है — यह संविधान की आत्मा का अपमान है। सरकार और पुलिस दोनों ने शुरुआत से ही इस मामले को दबाने का प्रयास किया। सोशल मीडिया पर बढ़ते जनदबाव के बाद ही कुछ नामजद अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। लेकिन धरातल पर कार्रवाई आज भी न के बराबर है। यह लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित संस्थागत जातिवाद का उदाहरण है — जो न्याय के रास्ते को पंगु बनाता है। वाई पूरण कुमार की मौत एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं, बल्कि एक व्यवस्था की विफलता है। आज जरूरत है कि बहुजन समाज, सामाजिक संगठनों, और आम नागरिक मिलकर यह सवाल उठाएँ — क्या भारत में न्याय की परिभाषा केवल सवर्णों के लिए है? क्या दलित-पिछड़े वर्ग के अधिकारी या नागरिक, जब अत्याचार झेलते हैं, तो उनकी आवाज़ यूं ही दबा दी जाएगी? बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था — > “क़ानून सभी के लिए समान है, लेकिन समानता तभी सार्थक है जब समाज समान अवसर दे।” इस मामले में न केवल क़ानून की असमानता स्पष्ट है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की असंवेदनशीलता भी उजागर होती है। एक अधिकारी का बलिदान हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या भारत की नौकरशाही सचमुच संविधान की शपथ निभा रही है? वाई पूरण कुमार की आत्महत्या केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि एक सवाल है — क्या इस देश में सत्य और न्याय के लिए आवाज़ उठाना अपराध बन गया है? आईएएस अवनीत कुमार की जंग केवल अपने पति के लिए नहीं, बल्कि उन लाखों दलित-बहुजन नागरिकों के लिए है जिन्हें यह व्यवस्था बार-बार कुचलती रही है। आज जरुरत है कि देशभर के नागरिक, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि इस आवाज़ को बुलंद करें — ताकि सत्ता को यह एहसास हो कि अब न्याय बिकता नहीं, जनता जाग चुकी है। #JusticeForPuranKumarIPS #StandWithAmneetKumarIAS #StopCasteDiscrimination #SystemChangeNow
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Liebe Kinder, neoliberale Versprechen funktionieren trotz ihrer Vollmundigkeit nie. Am Schluss muss der Staat die Scherben der zerstörten Institutionen zusammensammeln und die Rechnung für das bürgerliche Versagen zahlen. Darum: #SystemChangeNow ✊🏽!
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⚠️El canje de deuda en Galápagos NO protege la vida: protege intereses financieros. #NoCanjesDeudaPorNaturaleza #DeudaEcologica #SystemChangeNow
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हिजो बिहान म बुबासँग एडमिसनका लागि एक कलेजमा गएँ। स्कलरशिपमा नाम आएको थियो, कागजात लिएर अफिसमा पुग्यौँ। त्यहाँ स्टाफले सोधे — “पेइङमा हो?” मैले जवाफ दिएँ — “होइन, स्कलरशिपमा।” त्यसपछि भने — “ठिक छ, फर्म भर्नुहोस्।” मैले फर्म भरें, तर कसैले पनि मलाई कुन विषय पढ्न चाहन्छु भनेर सोधेन। म सुरु देखिनै CS (Computer Science) र Maths पढ्न चाहन्थें। तर पछि भने — “हामीकहाँ त्यो विषय पढाइ हुँदैन।” अचम्म लाग्यो। किनभने मेरा साथीहरू त्यही कलेजमा CS-Maths पढिरहेका थिए। मैले पुनः सोध्दा बल्ल स्वीकार गरे — “पढाइ त छ, तर अहिले सीट भरिसकेको छ।” त्यसपछि लाग्यो — स्कलरशिप पाउनु मेरो गल्ती हो? पेइङ विद्यार्थी भए पढ्न पाउँथें? बुबाले नरम स्वरमा भन्नुभयो — “छोराले आफूले रोजेको विषय पढ्न पाउनुपर्छ, भविष्य उसकै हो।” तर अफिसबाट जवाफ आयो — “यो हाम्रो नीति हो, तपाईंहरूको चाहनाले केही फरक पर्दैन।” कस्तो नीति? – स्कलरशिप पाउनेलाई हेप्ने, – पेइङ विद्यार्थीलाई प्राथमिकता दिने? – अनि दोष विद्यार्थीलाई दिने — "पहिले आउनु पर्थ्यो" भनेर? त्यसपछि हामी महानगरपालिकामा गयौँ। त्यहाँ पनि त्यस्तै दृश्य — दर्जनौँ अभिभावक गुनासो गर्दै, लाइनमा उभिएर पीडा पोख्दै। कसैले कुरा नसुन्ने, सुने पनि गम्भीरतापूर्वक नलिने। हामीले उजुरी राख्यौँ। नगरपालिकाले पत्र लेख्यो तर कलेजले फेरि भन्यो — “हाम्रो नियमअनुसार मात्र हुन्छ।” दिनभर दौडधूप भयो। एडमिसनको मिति सकियो। सपना पनि चुँडियो। तर सबैभन्दा पीडादायी कुरा के हो भने — आज म गुमाएँ, भोलि अरू विद्यार्थीले गुमाउनेछन्। सपना देख्नेलाई होइन, पैसा तिर्नेलाई मात्र प्राथमिकता दिने यो शिक्षा व्यवस्था छ। अझ थाहा भयो — कलेजले अनलाइनमा झूटा र नक्कली Review राखेको रहेछ। रियल विद्यार्थीहरूको आवाज कसैले सुन्ने प्रयास गरेको छैन। म आज बोलें, भोलि तपाईं बोल्नुस्। सत्य बोल्नुस्, साथ दिनुस्। नत्र — शिक्षा व्यापार बन्छ, सपना लुटिन्छ। #ScholarshipVsPaying #EducationMafia #SystemChangeNow #StudentRights #बोल्नुपर्छअब #RealStoryNepal फेसबुकबाट साभार
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हर साल एक सपना जलता है... सरकारी नौकरी — सिर्फ़ एक करियर नहीं, लाखों युवाओं के संघर्ष, माँ-बाप की उम्मीदें, रिश्तों की क़ुर्बानी और समाज के सामने सिर ऊँचा करने की आस होती है। 10x10 के छोटे कमरे में जीते इन सपनों ने न जाने कितनी नींदें छोड़ी हैं, न जाने कितने त्योहार बिना परिवार के गुज़ारे हैं। बस एक भरोसा था — मेहनत रंग लाएगी। लेकिन क्या मिला? पेपर लीक... रिजल्ट में सालों की देरी... भर्तियों में भ्रष्टाचार... और एक ऐसा सिस्टम जो मेहनत का मज़ाक बन चुका है। क्या गुनाह सिर्फ़ ये था कि नौकरी का सपना देखा? अब वक़्त है आवाज़ उठाने का — न्याय की, बदलाव की, सिस्टम सुधार की। अगर आज नहीं बोले, तो कल ये अन्याय किसी और की मेहनत को निगल जाएगा। ✊🏼 मैं SSC अभ्यर्थियों के साथ हूँ। "सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।।" #sscReforms2025 #SSCVendorFailure #SystemChangeNow
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ये कैसा लोकतंत्र? जो शिक्षक Eduquity की गड़बड़ियों पर सवाल उठा रहे थे, उन्हें पुलिस उठा ले गई! क्या SSC की लापरवाही पर बोलना अब देशद्रोह है? जो भविष्य बनाते हैं, उन्हें ही जेल में डाल रहे हो? #SSCVendorFailure #SSCReforms #JusticeForTeachers #SystemChangeNow #SSC_System_Sudharo
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📣Aquellos con un historial en mercados financieros son los menos calificados para salvar la biodiversidad⚠️ 🎥Mira más sobre los canjes de deuda ⬇️ youtu.be/Lx4OHfA5_Ec?si=QZXa… #NoCanjesDeudaPorNaturaleza #DeudaEcologica #SystemChangeNow
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🔴Los canjes de deuda por naturaleza son una FALSA solución. @AlbertoAcostaE 🎥Mira más sobre los canjes de deuda ⬇️ youtu.be/Lx4OHfA5_Ec?si=QZXa… #NoCanjesDeudaPorNaturaleza #DeudaEcologica #SystemChangeNow
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Replying to @firstbiharnews
🔴 कब तक चलेगा भ्रष्टाचार का यह खेल? ⤵️ कई बड़े भ्रष्टाचारी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि उनके खिलाफ सबूतों के साथ की गई FIR वर्षों से धूल फांक रही है। पीड़ितों के परिवार उजड़ गए, लेकिन सिस्टम में बैठे रसूखदार अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब छोटे अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े जाते हैं, तो निगरानी तंत्र की सक्रियता दिखती है, लेकिन बड़े बईमान अफसरों पर चुप्पी? यह क्या दर्शाता है? 🔍 यह हमारी व्यवस्था की असलियत है:- 1️⃣ कानून का दोहरा चेहरा – कमजोरों पर कार्रवाई, ताकतवरों पर मौन। 2️⃣ प्रशासनिक मिलीभगत – भ्रष्टों को विभागीय या राजनीतिक संरक्षण। 3️⃣ न्याय व्यवस्था से जनता का टूटता भरोसा – जब पीड़ित दर-दर भटके और अपराधी सत्ता के साथ मज़े करे। क्या यही है #अमृतकाल ? ⚖️ अगर सच्चा बदलाव चाहिए तो:- 👉 स्वतंत्र एजेंसियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त और कठोर कार्रवाई के अधिकार देने होंगे। 👉 हर FIR पर निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करनी होगी। 👉 जनता को जागरूक और एकजुट होकर आवाज़ उठानी होगी। 🚨 अब और चुप रहना मुमकिन नहीं! #भ्रष्टाचार_के_खिलाफ #सिस्टम_की_सचाई #जनता_मांगे_जवाब #IndianJusticeSystem #FightCorruption #लोकतंत्र_की_रक्षा #BhrashtacharMuktBharat #IndependentInvestigation #SystemChangeNow #न्याय_मिले_हर_पीड़ित_को
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🔴La conservación corporativista se usa para legitimar el despojo, presentándolo como una supuesta respuesta a la crisis ecológica. 🎥Mira más sobre los canjes de deuda ⬇️ youtu.be/Lx4OHfA5_Ec?si=QZXa… #NoCanjesDeudaPorNaturaleza #DeudaEcologica #SystemChangeNow
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🚨 Los canjes de deuda por conservación (corporativista) constituyen un negocio basado en la privatización y el despojo. 🎥Mira más sobre los canjes de deuda ⬇️ youtu.be/Lx4OHfA5_Ec?si=QZXa… #NoCanjesDeudaPorNaturaleza #DeudaEcologica #SystemChangeNow
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💰🌱Quienes provienen de los mercados financieros no protegen la biodiversidad ni mejoran los medios de vida, ya que han lucrado con los mismos sistemas que han causado su deterioro. 🎥Mira más ⬇️ youtu.be/Lx4OHfA5_Ec?si=QZXa… #NoCanjesDeudaPorNaturaleza #SystemChangeNow
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“जब वोट की कीमत एक बिरयानी और ₹500 हो जाए, तो फिर न नौकरी मिलेगी, न इज्जत। फिर मत कहना — सिस्टम ही खराब है!” “नेता सेल्फी लेंगे, अफसर फाइल घुमाएंगे, और तुम DM में PNR भेजते रह जाओगे…” 🙁🙁 #VoteWisely #YouthAwakening #SystemChangeNow #Railway_Reform
रावण

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We disrupted business as usual at the UN #FFD4Sevilla. ✊🏽 For the first time ever, APMDD together with other CSOs organized an action inside the halls of power. We showed them what resistance looks like. Our message was loud and clear: #PayUp #CanceltheDebt #SystemChangeNow
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Fossil gas isn't a transition fuel — it’s a #debt trap. Multilateral development banks are fuelling debt that locks the Global South into poverty, pollution & dependence. Analysis & recommendations by @bigshiftglobal 👉 bigshiftglobal.org/resource/… #SystemChangeNow #FFD4
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1 Jul 2025
Global North - Fulfill your obligations to deliver Climate Finance for the Global South!   #PayUp #FFD4People #SystemChangeNow #ClimateFinanceNow #CancelTheDebt #TaxTheRich #ReparationsNow @AfricansRising @CANIntl @CANZIM11 @Wahengayouths
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