AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि यदि सड़कों पर नमाज पढ़ने को गलत माना जाता है, तो संविधान के अनुच्छेद 25 (Article 25) का हवाला देते हुए सभी धर्मों की सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों पर भी समान रूप से पाबंदियां लगनी चाहिए। यह अनुच्छेद प्रत्येक नागरिक को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने तथा उसका प्रचार करने के अधिकार की गारंटी देता है।
'ईद मिलाद-उन-नबी' या 'ईद मिलाप' के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने तर्क दिया कि केवल नमाज पर लोगों की आपत्तियां एक 'दोहरे मापदंड' को दर्शाती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य समुदायों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित किए जाने वाले धार्मिक जुलूसों, यात्राओं और सभाओं पर इस तरह की चिंताएं क्यों नहीं जताई जातीं?
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