आरा से, बलिया से, छपरा से, बनारस-इलाहाबाद से, अयोध्या से, मेरठ, मुजफ्फरनगर से... देश के कोने-कोने से लोग यहां की सोसाइटियों में यूं ही नहीं आ गए.
पैसे दिए हैं, पूरी कीमत चुकाई है.
क्या गाली खाने के लिए?
जो जमीन बेचकर स्कॉर्पियो और थार खरीद चुके, वो किस बात की धौंस दिखाते हैं?
"बहन के...
हमारी जमीन पे रह रिया है हमें है बता रिया है
तेरी मां की..."
(कृपया ईयर फोन लगाकर सुनें)
महाराज जी के राज में पुलिस प्रशासन के इक़बाल को यूं चुनौती देने वाले का इलाज ज़रूरी है.
@Uppolice
@DCPCityGZB
थाना क्षेत्र - नंदग्राम, गाजियाबाद