हमारा हांथ सनातन, संस्कृति, सदाचार, समता, समाज एवं स्वाभिमान के साथ। RT or Tags are not endorsed.

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वट वृक्ष शुरू मे इतना छोटा होता है कि बकरी से भी बचाना पड़ता है, पर जब विशाल वट वृक्ष बन जाता है तो हाथी भी बंधा रहता है। अपना प्रयास वट वृक्ष की तरह ही है, जो कुछ ही समय मे विशाल हो जायेगा और भीषण विषमताओं की गर्मी से मुक्ति पाने को समाज का हर व्यक्ति उसकी छाया लेने को दौड़ेगा।
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जुगुल किशोर बुन्देला IPS (Rtd)- जन सामान्य मंच retweeted
ये काकरोची किस देश की बात कर रही है ? अगर टीचर झाड़ू पकड़ा दे बच्चों को तो हाय तोबा मच जाती है और ये क्या बोल रही है ? झूठ भी भी बिन शोर पैर का।
भारत में संविधान लागू हुए 75 साल हो गए। 50 सालों से कौन-सा ब्राह्मण दलितों को पढ़ने से रोक रहा है? मैं इस कॉकरोजन को चुनौती देता हूँ कि ये पिछले 5 वर्षों की ऐसी 5 घटनाएँ बताए। जिनमें आरोपी ब्राह्मण हो और उसने किसी दलित बच्चे को स्कूल जाने रोका हो। ऐसे मामलों में तथ्यों के साथ बात होनी चाहिए। केवल आरोप और झूठा नैरेटिव फैलाने से समाज का भला नहीं होगा। यदि कोई दावा किया है तो उसका प्रमाण भी होने चाहिए।
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यह है गौमाता का हाल। सत्यानाश हो इन हरामखोरों का भ्रष्ट, बेईमान नेताओं का।
"गाय पशु नहीं माता है " आदरणीय @myogiadityanath जी
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राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा अनेक राजनीतिक पार्टियों एवं सामाजिक संगठनो का गठबन्धन है जो जातिवादी विधानों के विरूद्ध है तथा सनातन के मानबिन्दुओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है जुड़े और अपने साथ लोगों को जोड़े 🙏 @Adv_Anil_Mishra @ipsjkishore08
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इसी तरह एक दूसरे का जूठन खाने को ही शायद ये भाई चारा मानते हैं। तभी करणी सेना के राज शेखावत ने बेसराम का जूठा पानी पिया था जिससे अधिकांश स्वाभिमानी क्षत्रिय समाज ने उनसे किनारा कर लिया। ऐसे ही भाई चारा होता है क्या ? हमारे यहाँ किसी को किसी का जूठा खाना अनुमन्य नही है चाहे वह जो
आंबेडकरवादी कही ब्राह्मणवाद के विरोध में एक दूसरे का 💩 ना खा ले। 😂😂
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जुगुल किशोर बुन्देला IPS (Rtd)- जन सामान्य मंच retweeted
क्या तुलना की है नेहरू जी और मोडी के कार्यकाल की, जश्न तो बनता है।
1947 से 2026 तक का सफर. Nehru जी Vs Modi जी. श्रद्धानंद जी की सैल्यूट.
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जुगुल किशोर बुन्देला IPS (Rtd)- जन सामान्य मंच retweeted
इस तुच्छ राजनीति ने लोगों के दिमाग मे इतना जहर भर दिया है कि वे जातियों और पार्टियों तथा नेताओं के चक्कर मे बिना जाने-पहचाने, बिना सोचे-विचारे व्यक्ति, जाति, समाज और धर्म तथा ईश्वर के विरुद्ध कुछ भी बोलते हैं। क्या उपाय है इस समस्या के समाधान का ?
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जुगुल किशोर बुन्देला IPS (Rtd)- जन सामान्य मंच retweeted
रिकार्ड बना लिया झूठ, वादा खिलाफी, लफ्फाजी, महंगाई, जग हंसाई, भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग, धर्म और जाति के आधार पर विभाजन, अयोग्यता को बढ़ावा, प्रतिभाओं की हत्या, पेपर लीक, दलबदल को बढ़ावा, पुलों और सड़कों के गिरने का, पर्ची मुख्यमंत्रियों का, देव धर्म में हस्तक्षेप का।
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यदि आप सहन कर रहे हो या नही भी कर रहे हो तब भी आप भी पापी हो इसलिए मिलकर इनका प्रतिकार करिये, भ्रष्ट व्यवस्था को बदलिए।
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सत्यानाश करके मानेंगे ये धर्मद्रोही। नकल इनके बाप के संरक्षण में होती है ये धूर्तता दिखाते हैं चूडी, रक्षा, जनेऊ, कलावा, बिन्दी उतरवाने में कमीने।
धीरे धीरे आपके संस्कारों से दूरी किया जाएगा ये कथित हिंदूवादी सरकार करके है रहेगी। जब एक युवा विरोध कर रहा था तो एक बुजदिली बोल रहा था परीक्षा ही जरूरी है। बुर्का पर सवाल कभी नहीं खड़ा किया जाता है। प्लानिंग तहत हिंदुओं के प्रतीकों पर हमला हो रहा है।
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व्हमपक सूतक में मन्दिर घूम रहा था
सपा के प्रमुख अखिलेश यादव झूठ बोल है तो राम मंदिर ट्रस्ट तत्काल FIR कराए, ये आरोप कोई आम आदमी लगाए तो तुरंत नाप दिए। जायेगा।
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यूजीसी रेगुलेशन के विरुद्ध जब हम दिल्ली मे एक वरिष्ठ अधिवक्ता के यहाँ बैठक कर रहे थे तो उन्होंने इस विधेयक की चर्चा की थी कि वेदेशों मे भी सवर्ण समाज को प्रताड़ित करने की साजिश मण्डल & कम्पनी कर रही है। तभी से हमने अपने जम्पर्कों को सचेत किया सभी लोग सक्रिय हुये और ये धूर्त सफल नही हुये। किन्तु यह साजिश अभी चलती रहेगी। आज जो धनपशु और सत्ताधीश इस देश को बर्बाद करके विदेशों में बसने की योजना बना चुके हैं (इनमे से अनेक विदेश की नागरिकता भी ले चुके हैं) उनको यह बात आ जाय इसके लिए अभियान चलाना होगा। जिससे ये अर्थपिशाच और भ्रष्ट नेता/अधिकारीगण इस देश को बांटने और बर्बाद करने की नीतियों से बाज आयें। भस्मासुर का अंत ही करना होगा। एक और स्वतंत्रता संग्राम की मांग है देश को। कैन कौन तैयार है ? @ndskaushal @DeepikaSharmaa_ @ashwani_dube @Hindu_Voic @voicress @VoiceOfBrahmins @Ignorant002 @8PM_24x7SERVICE @neha_laldas @talk2anuradha @ThePushprajX @NaveenJaihind @AJAYKUM95107739 @Ad_VaibhavJoshi
मंडल जैसे धूर्तों ने सवर्णों के विरुद्ध अमेरिका मे नैरेटिव चलाकर, फर्जी कहानियां गढ़कर सवर्णों को बदनाम कर उनको वहाँ पर दंडित कराने के लिए विधेयक प्रस्तुत कराया किन्तु वहां के जागरूक जन सामान्य ने इसका प्रबल विरोध किया जिससे यह कानून पास नह हुआ। यहाँ की तुच्छ राजनीति यह वहां असफल
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जुगुल किशोर बुन्देला IPS (Rtd)- जन सामान्य मंच retweeted
यह गाना बना था जब गैस सिलेंडर 400 रुपए का था "सखी सैंया तो खूबै कमात है, महंगाई डायन (नेता बेईमान) खाये जात है।"
1. 75 वर्षों बाद भी बेरोजगार युवा नौकरी के लिए दर-दर क्यों भटक रहा है? 2. किसान अन्नदाता होकर भी कर्ज और आत्महत्या के संकट से क्यों जूझ रहा है? 3. शिक्षा और स्वास्थ्य आम नागरिक की पहुंच से दूर क्यों होते जा रहे हैं? 4. भ्रष्टाचार पर बड़े-बड़े दावे होते हैं, फिर भी आम जनता को रिश्वत क्यों देनी पड़ती है? 5. महंगाई पर नियंत्रण के वादे बार-बार क्यों विफल हो रहे हैं? 6. महिलाओं की सुरक्षा आज भी एक बड़ी चुनौती क्यों बनी हुई है? 7. गांवों से पलायन रुक क्यों नहीं रहा है? 8. युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर कब मिलेंगे? 9. सनातन संस्कृति और भारतीय मूल्यों पर बार-बार आघात क्यों हो रहा है? 10. जनता को चुनाव के समय याद करने वाले नेता चुनाव जीतने के बाद गायब क्यों हो जाते हैं? 11. क्या लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का माध्यम बनकर रह गया है या जनसेवा का भी कोई महत्व है? 12. क्या देश और प्रदेश की राजनीति को एक नए, स्वच्छ और राष्ट्रहितकारी विकल्प की आवश्यकता नहीं है? जनसभा में पूछने योग्य प्रभावशाली प्रश्न: “जब समस्याएँ वही हैं, वादे वही हैं और परिणाम भी वही हैं, तो क्या अब राजनीति में एक नए राष्ट्रीय विकल्प का समय नहीं आ गया है?” “यदि जनता मालिक है, तो उसके जीवन से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों का उत्तर कौन देगा?” (राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा)
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देते हैं भगवान को धोखा इंशां को क्या छाँड़ेगें ?
मेरे स्वप्न का दूसरा हिस्सा- स्वप्न का दूसरा हिस्सा ये कहता है- कि मेरे आराध्य के दानपात्र में चढ़ाए जा रहे करोड़ों के चढ़ावे से लगातार चोरी की जा रही थी। जब एक बड़े हॉल में गिनती की जाती तो किसी को कुछ पता ही नहीं चलता क्योंकि पैसा पहले ही गायब हो चुका होता। इस बार मामला यूं खुला कि किसी ने करोड़ों का दान दिया। जब नियमित अंतराल पर गणना हुई तो सब चौंक गए क्योंकि एक भक्त की वो करोड़ों की दी हुई रकम मैच नहीं हो सकी। क्योंकि वो रकम करोड़ों की थी, सो जिम्मेदारों के संज्ञान में थी। इसके बाद गदर कटा। सीसीटीवी खंगाले गए। सबूत मिला। ट्र्स्टी चिल्लाए, एफआईआर कराओ। राजधानी से आए फोन ने समझाया, शांत हो जाओ। 'ऊपर' से आदेश है, रायता मत फैलाओ। जितना भी फटा हुआ, बिखरा हुआ, चिथड़ा हुआ है, सब पर रामनामी कालीन ओढ़ा कर रखना है, हमें बस रामनाम जपना है, जो प्रभु का है, वही तो अपना है वैसे भी ये सब तो फ़क़त एक पत्रकार का सपना है!! पुलिस हमारी, राम हमारे, किसका डर? किस बात का कंपना है? प्रधानमंत्री मेरा स्वप्न आप तक पहुंचे। इस पर कोई फिल्म बने। मैं निशुल्क पटकथा लिखने को तैयार हूं। @PMOIndia @narendramodi @HMOIndia @AmitShah @myogiadityanath @RSSorg
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1. 75 वर्षों बाद भी बेरोजगार युवा नौकरी के लिए दर-दर क्यों भटक रहा है? 2. किसान अन्नदाता होकर भी कर्ज और आत्महत्या के संकट से क्यों जूझ रहा है? 3. शिक्षा और स्वास्थ्य आम नागरिक की पहुंच से दूर क्यों होते जा रहे हैं? 4. भ्रष्टाचार पर बड़े-बड़े दावे होते हैं, फिर भी आम जनता को रिश्वत क्यों देनी पड़ती है? 5. महंगाई पर नियंत्रण के वादे बार-बार क्यों विफल हो रहे हैं? 6. महिलाओं की सुरक्षा आज भी एक बड़ी चुनौती क्यों बनी हुई है? 7. गांवों से पलायन रुक क्यों नहीं रहा है? 8. युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर कब मिलेंगे? 9. सनातन संस्कृति और भारतीय मूल्यों पर बार-बार आघात क्यों हो रहा है? 10. जनता को चुनाव के समय याद करने वाले नेता चुनाव जीतने के बाद गायब क्यों हो जाते हैं? 11. क्या लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का माध्यम बनकर रह गया है या जनसेवा का भी कोई महत्व है? 12. क्या देश और प्रदेश की राजनीति को एक नए, स्वच्छ और राष्ट्रहितकारी विकल्प की आवश्यकता नहीं है? जनसभा में पूछने योग्य प्रभावशाली प्रश्न: “जब समस्याएँ वही हैं, वादे वही हैं और परिणाम भी वही हैं, तो क्या अब राजनीति में एक नए राष्ट्रीय विकल्प का समय नहीं आ गया है?” “यदि जनता मालिक है, तो उसके जीवन से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों का उत्तर कौन देगा?” (राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा)
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आज वाराणसी से "राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा" की बैठक अनेक लोगों ने मोर्चा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का संकल्प लिया।
सभी का स्वागत है। राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा किसी एक व्यक्ति का प्रकल्प न होकर सैकड़ों दलों/सामाजिक संगतजनों का सामूहिक संकल्प है जो एक स्वच्छ, ईमानदार, भेदभाव रहित राजनीतिक विकल्प देने हेतु प्रतिबद्ध है।
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वर्तमान सत्ता प्रतिष्ठान के आदर्श यही हैं। इनको प्रशासन जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति तत्काल देता है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के विश्वविद्यालय में ये वर्षों से- "तिलक तराजू औ तलवार" "ब्राह्मण, बनिया भारत छोंडो" ब्राह्मण, क्षत्रिय, बनिया छोंड़ बाकी सब हैं DS4 "दलित मुस्लिम भाई हैं, वामन साला कसाई है" के नारे लगाते चले आ रहे हैं। इसी तरह JNU की धरती मे कब्र खुदने के नारे से लेकर देश, धर्म एवं समाज विरोधी नारे लगातार लगते रहते हैं। शासन प्रशासन इनको रोकना तो दूर इनको प्रदर्शन की अनुमति सहर्ष देता है। आपको क्या लगता है कि यह सब बिना सत्ता प्रतिष्ठान की सहमति से होता है ? फिर हम सबके पास क्या उपाय है ? क्योंकि यह बीमारी सत्ता ही फैला रही है। आगे ऐसे ही लोग शासन प्रशासन करेंगे, कर भी रहे हैं जो देश के अमन पसंद नागरिकों को तो दबा रहे हैं, विभिन्न शगूफे छोंड़कर डरा रहे हैं, किन्तु विदेश के दबाब में देश के सारे संसाधन बर्बाद कर रहे हैं, हानिकारक समझौते कर रहे हैं। स्थिति करो या मरो की है। मरने को तैयार हैं तो मुर्दों से क्या बात करना और यदि करना है तो विकल्प उपलब्ध है।
जंतर मंतर पहुंचे अलग अलग किस्म के कॉकरोच।😁👇 #जय_भीम #जय_सरिया
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जुगुल किशोर बुन्देला IPS (Rtd)- जन सामान्य मंच retweeted
जितने लोग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहे हैं, सब नरेंद्र मोदी को बचा रहे हैं। #CockrochJantaParty

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जुगुल किशोर बुन्देला IPS (Rtd)- जन सामान्य मंच retweeted
8 मार्च को दिल्ली में आज के कॉकरोच जनता पार्टी से 100 गुना अधिक लोग थे लेकिन हरामखोर, बिकाऊ नेशनल मीडिया ने उसको कवर नहीं किया था लेकिन आज क्यों कवर किया सोचिए? ये 8 मार्च का दृश्य था, जबकि सामान्य वर्ग के प्रभावी लोगों को हाउस अरेस्ट किया गया था।

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