मैं आदरणीय मोदी जी से अनुरोध करता हूँ कि वे चाहे जिस नाम पर मुझे 10 साल जेल की सजा दे दें, बस एक ही शर्त है कि जेल यही वाली होनी चाहिए जिसमें नेहरू जी को रखा गया था और जितनी कठोर परिस्थितियों में नेहरू जी को रखा गया था बिल्कुल वैसी ही कठोर परिस्थितियों में मुझे भी रखा जाये।
किन्हीं नरेंद्र तिवारी जी ने लिखा है कि "अब अहमदनगर फोर्ट जैसी जगहों को फिर से विशेष जेल में बदलना आसान नहीं होगा।"
तिवारी जी लिखते हैं कि "न ही किसी एक कैदी के लिए बैडमिंटन कोर्ट, स्विमिंग पूल और अन्य विशेष सुविधाओं की व्यवस्था करना संभव दिखता है।
आज के दौर में यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि किसी कैदी के लिए दो सहायक, एक रसोइया और एक लेखक नियुक्त किए जाएं। सुबह रसोइया आकर पूछे, "नाश्ते में क्या लेंगे सर, भारतीय या कॉन्टिनेंटल?" और सहायक विनम्रता से पूछे, "सर, पहले अखबार पढ़ेंगे या आगंतुकों से मिलना पसंद करेंगे?"
रिपोर्टर को यह बताया जाए कि "अभी सर का बैडमिंटन खेलने का समय है, उसके बाद वे एक घंटे की सैर करेंगे", ऐसी तस्वीर भी आज की जेल व्यवस्था में असंभव सी लगती है।"
पर यदि मोदी जी चाह लें तो आज भी क्या असंभव है? सब लोग कहते ही हैं कि मोदी है तो मुमकिन है।
गूगल बाबा बता रहे हैं कि शायद इस भयानक जेल में नेहरू जी को स्विमिंग पूल में डुबकी लगाने का खतरनाक दंड नहीं दिया जाता था। पर कांग्रेस के दूसरे नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलने का कठोर श्रम जरूर कराया जाता था। वे दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों की तरह कोल्हू पेरने जैसे हल्के-फुल्के काम में नहीं लगाये गये थे। खैर, मोदी जी मेरी सहनशक्ति की चिंता न करें। ऊपर जो-जो कठोर स्थितियाँ वर्णित हैं, मैं उन सबको झेल लूँगा। आप चाहें तो जैसे नेहरू जी के साथ अन्य कांग्रेस नेता इस जेल में ठूँसे गये थे, वैसे ही कुछ पत्रकार मितरों को मैं अपने साथ जेल जाने के लिए तैयार करा लूँगा।