"मरे मुलायम, काशीराम" जैसा विवादित बयान देने वाले रामभद्राचार्य के चरणों में नतमस्तक दिखीं अपर्णा बिष्ट यादव।
जिन्हें नेताजी की बहू कहा जाता है, उनसे सवाल है—क्या राजनीतिक निष्ठा इतनी बड़ी हो सकती है कि अपने ही ससुर के लिए अपमानजनक टिप्पणी करने वाले व्यक्ति के प्रति भी सम्मान जताया जाए?