मेरी किताब की पहली प्रति प्रकाशक लोकभारती प्रकाशन, प्रयागराज से मिल गयी है।
Received first copy of my book from the publishers Lokbharti Prakashan, Prayagraj.
@RajkamalBooks
सियाहत मेरी स्याही से—भारत की 'तुम' से 'आप' तक की यात्रा
1991 का यह वह वर्ष था, जब भारत ने अपने इतिहास में एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ाया। आर्थिक उदारीकरण की नीति ने देश के युवाओं को सपने देखने और उन्हें साकार करने के नए अवसर दिए। इसी बदलते दौर में, मैं, फ़िरोज़ाबाद की गलियों से निकलकर, भारतीय कांच हस्तशिल्प को दुनिया के हर कोने में पहचान दिलाने का सपना लेकर अपने सफर पर निकला।
यह किताब उसी सफर की कहानी है।
- कैसे 90 के दशक की नई नीतियों ने एक साधारण युवक को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की ताकत दी।
- पेरिस की गलियों में टूटा हुआ सूटकेस और संघर्ष की कहानियां, लेकिन कभी हार न मानने का हौसला।
- बहरीन के दृष्टिहीन व्यापारी, दोहा के इस्माइल शेख जो एक दोस्त बन गए, और मिस्र के मिस्टर मैगदी के साथ इजिप्ट के अद्भुत अनुभव।
- जर्मनी के मेसे फ्रैंकफर्ट एम्बिएंटे मेले और नोएडा के EPCH जैसे वैश्विक मंच, जिन्होंने भारतीय हस्तशिल्प को नई पहचान दिलाई।
- स्विट्ज़रलैंड की सुरम्य वादियों और हॉलैंड के शानदार नज़ारों के बीच यात्रा के अनमोल क्षण।
यह सिर्फ एक यात्रा-वृत्तांत नहीं है। यह उस दौर की कहानी है, जब भारत बदल रहा था। जब एक युवा उद्यमी ने अपने संघर्ष, दृढ़ विश्वास और सपनों के सहारे एक छोटे से शहर से निकलकर वैश्विक मंच पर जगह बनाई। पेरिस के एफिल टावर से लेकर इटली के ऐतिहासिक स्मारकों तक, मिस्र के पिरामिड से लेकर स्विट्ज़रलैंड और हॉलैंड की खूबसूरत वादियों तक—यह यात्रा सिर्फ भौगोलिक सीमाओं को पार करने की नहीं थी, बल्कि एक मिशन था: फ़िरोज़ाबाद के कांच को पूरी दुनिया में चमकाना।
"सियाहत मेरी स्याही से" सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि उस भारत की कहानी है, जो 90 के दशक में बदलाव की दहलीज पर खड़ा था। यह संघर्ष, सपनों और नई संभावनाओं की गाथा है। यह देश के नौजवानों के लिए सन्देश है कि आप जॉब सीकर की जगह जॉब गिवर बनने के ख्वाब देखिए और हाँ हमारे देश में नौजवानों के सपने सच भी होते हैं। यह कहानी है हमारे जैसे निर्यातकों की ‘तुम’ से ‘आप’ तक की यात्रा की।
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