लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा की स्वतंत्रता और समता के परिपेक्ष में मानवता को प्रभावित करने वाली घटनाओं और कहानियों का विश्लेषण

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"क्या UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम मंदिर, अयोध्या में करोड़ों रुपये की चोरी करने वाले के घर पर बुलडोजर चलाएंगे?" सुनील निषाद प्रदेश अध्यक्ष उ0प्र0 ओबीसी महासभा Sunil Nishad #Rammandir #mandir #ayodhya
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बहुजन नायक अमर शहीद जगदेव प्रसाद कुशवाहा के सुपुत्र नागमणि कुशवाहा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री एवं मण्डल मसीहा लालू प्रसाद यादव पर दिया गया आपत्तिजनक बयान केवल एक व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी नहीं है, बल्कि इसे उत्तर भारत की वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के व्यापक संदर्भ में देखने की आवश्यकता है। उत्तर भारत की राजनीति में आरएसएस और बीजेपी लंबे समय से एंटी-यादव और एंटी-मुस्लिम नैरेटिव को मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं इस रणनीति के तहत बहुजन समाज के विभिन्न वर्गों को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा कर शोषित, वंचित, दलित, पिछड़े और आदिवासी समाज के हक, हिस्सेदारी, सम्मान और सामाजिक न्याय के आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, ताकि सवर्ण वर्चस्व की राजनीति को मजबूत किया जा सके। बिहार की राजनीति में त्रिवेणी संघ के संघर्षों से लेकर जननायक कर्पूरी ठाकुर, अमर शहीद जगदेव प्रसाद कुशवाहा और बी.पी. मंडल जैसे नेताओं के आंदोलनों ने बहुजन समाज के लिए जो सामाजिक और राजनीतिक जमीन तैयार की थी, वह सामाजिक न्याय की राजनीति की मजबूत नींव बनी स्वाभाविक रूप से आरएसएस और सवर्ण वर्चस्ववादी शक्तियाँ इस बहुजन एकता से असहज थीं, इसलिए दलितों, पिछड़ों और अन्य वंचित समुदायों को आपस में लड़ाकर जगदेव प्रसाद कुशवाहा के 90% शोषितों के एकजुटता को तोड़कर सामाजिक न्याय की राजनीति को निरंतर कमजोर करने का प्रयास किया जाता रहा है। उत्तर भारत की राजनीति में यह रणनीति काफी हद तक सफल होती दिखाई भी दे रही है मंडल आंदोलन और उसके प्रभाव को कमजोर करने के लिए बिहार में लालू प्रसाद यादव के विरुद्ध नीतीश कुमार और रामविलास पासवान जैसे नेताओं को खड़ा किया गया। परिणामस्वरूप बीजेपी लगभग दो दशकों तक बिहार की सत्ता में प्रभावी भूमिका निभाती रही और अंततः अपना मुख्यमंत्री बनाने में भी सफल हुई। आज बिहार की राजनीति में ऐसा वातावरण बनाया गया है कि मानो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की आलोचना या उन्हें गाली देना ही राजनीतिक पहचान स्थापित करने का सबसे आसान रास्ता हो। बीजेपी और आरएसएस को खुश करने के लिए हर कोई इसे आसान रास्ता अपना लेता है आरएसएस की इसी रणनीति के माध्यम से मंडल के विरुद्ध कमंडल की राजनीति को पुनः धार देने का प्रयास कर रही है, और कई मामलों में वह सफल होती भी दिखाई देती है। नीतीश कुमार, चिराग पासवान और सम्राट चौधरी के बाद नागमणि कुशवाहा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री मण्डल मसीहा लालू प्रसाद यादव को गाली देने का ताजा प्रकरण भी इसी व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखने और समझने की आवश्यकता है। #NagmaniKushawaha #LaluPrasadYadav
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"तमिलनाडु के प्रमुख दलित नेता और स्वतंत्रता सेनानी, पी. कक्कन का जन्म (13 जून 1909) इसी दिन हुआ था उन्होंने मद्रास (अब तमिलनाडु) सरकार में गृह, कृषि और लोक निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मंत्री पदों पर रहते हुए बांधों के निर्माण और कृषि शिक्षा के प्रसार में ऐतिहासिक योगदान दिया. लेकिन इतिहास में उनको भुला दिया गया है यही ब्राह्मणवादी इतिहासकारों की ग़लती है।" प्रोफेसर विक्रम इलाहाबाद विश्वविद्यालय @ProfvikramAU
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"RO/ARO से लेकर पुलिस भर्ती तक, बार-बार युवाओं के साथ हो रहे विश्वासघात व छात्रों की मांगों को लेकर इको गार्डन, लखनऊ पहुँचे।" नेहा राष्ट्रीय अध्यक्ष आइसा #Neha #AISA
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प्रयागराज के EXAMPUR कोचिंग के संचालक विवेक सर को लखनऊ पुलिस ने हिरासत में लिया है। जानकारी के अनुसार, विवेक सर् 12 जून को प्रस्तावित भर्ती परीक्षा में अनियमितता, पेपर लीक के सवाल को लेकर "इडेन गार्डेन" लखनऊ में धरना प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे, छात्र लेखपाल भर्ती का पुन: परीक्षा कराने, UPP, UPSI भर्ती में स्कोर कार्ड जारी करने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। प्रयागराज प्रशासन छात्रों के इस आंदोलन को समर्थन करने वाले कोचिंग संचालकों के कोचिंग Super Climax Academy, Taget, EXAMPUR कोचिंग सेंटर को पहले ही सील कर चुकी है। विवेक सर् के गिरफ़्तारी की खबर सामने आने के बाद छात्रों और समर्थकों में भारी आक्रोश है छात्रों का कहना है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़े राज्य में अब अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराने का अधिकार नहीं है योगी आदित्यनाथ के रामराज्य में अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज उठाना भी अब अपराध बना दिया गया है? #ReleaseVivekSir #VivekSir #exampur
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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत के पूर्व रेल मंत्री, सामाजिक न्याय की राजनीति के प्रमुख स्तंभ, गरीबों, शोषितों, पिछड़ों, दलितों एवं वंचितों की बुलंद आवाज़ लालू प्रसाद यादव को सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता, गंगा-जमुनी तहज़ीब और संविधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए उनके संघर्ष को देश हमेशा याद रखेगा। थॉमस पेन, मार्टिन लूथर किंग और लालू प्रसाद यादव इन तीनों क्रांतिकारियों का एक मूल भावना न्याय और समानता की लड़ाई है! थॉमस पेन ने "Rights of Man" में राजशाही और विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग का विरोध किया उन्होंने कहा "If there must be trouble, let it be in my day, that my child may have peace." यानी संघर्ष की कीमत खुद चुकानी है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ चैन से जी सकें! मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अमेरिका में अश्वेतों के हक़ के लिए लड़ाई लड़ी उन्होंने कहा "Injustice anywhere is a threat to justice everywhere." यानी जब तक एक भी कोना अन्याय से भरा है, न्याय कहीं भी सुरक्षित नहीं हो सकता! लालू प्रसाद यादव ने भारत में मंडल आंदोलन से लेकर सामाजिक न्याय की राजनीति तक शोषित, वंचित, पिछड़ों, दलितों आदिवासी समाज की आवाज़ को संसद से लेकर सड़क बुलंद किया जब हजारों वर्षो के इतिहास में राष्ट्र के संसाधनों पर मुट्ठी भर कुछ सवर्ण पूजीपतियों का वर्चस्व है, तब लालू ने कहा कि :- "हे भेड़ चराने वालों, भैंस चराने वालों, सूअर चराने वालों, ताड़ी उतारने वाले, मैंला ढोने वालों, पढ़ना-लिखना सीखो!" यह नारा उन्हीं हरवाहा-चरवाहा कृषक समुदायों को संबोधित करता है जिन्हें ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने "नीच कामों" में झोंक रखा था यह नारा कहता है कि तुम्हारे श्रम ने समाज चलाया, लेकिन तुम्हें शिक्षा और सत्ता से वंचित रखा गया लालू प्रसाद यादव ने हजारों वर्षो से स्थापित वर्ण अव्यवस्था आधारित ब्राह्मण, बनिया, राजपूत और लाला के सामाजिक वर्चस्व को चुनौती दिया! थॉमस पेन ने इंग्लैंड के अभिजात्यों को ललकारा तो मार्टिन लूथर किंग ने अमेरिका की नस्लवादी व्यवस्था को झकझोरा दिया और लालू प्रसाद यादव ने भारत की जातिवादी सत्ता को आईना दिखाया उस व्यवस्था को, जहाँ सदियों से मेहनत करने वाली जातियों को "अशुद्ध" और "नीच" कहकर हाशिये पर धकेल दिया गया था। लालू प्रसाद की राजनीति ने उन आवाज़ों को ज़ुबान दिया जिन्हें सदियों तक दबाया गया था और जिनकी पीठ पर इस देश की अर्थव्यवस्था और संस्कृति खड़ी रही इन वर्गों को उनकी पहचान पर गर्व करना ही नहीं सिखाया, बल्कि उन्हें पढ़ने, समझने और सवाल उठाने की ताक़त दिया कि "अब हरवाहा-चरवाहा कृषक परिवार का बेटा-बेटी अपने हक, हिस्सेदारी और अपने ऊपर हो रहे अन्याय व अत्याचार पर खामोश नहीं रहेगा!" जब हरवाहा-चरवाहा पशुपालक-कृषक समाज अपने हक, अधिकार और सम्मान की बात करता है, तो बीजेपी और आरएसएस में बेचैनी दिखती है क्योंकि जिस समाज ने सभ्यता की नींव रखी, वही समाज न्याय और समानता की नींव रखने की क्षमता रखता है पशुपालक चरवाहे केवल झुंडों के ही रक्षक नहीं थे, बल्कि मानव सभ्यता के मूल निर्माता और शाश्वत पथप्रदर्शक रहे है नेतृत्व की शक्ति इनको शासकीय विलासिता और महलों में नहीं, बल्कि झुंड की सेवा, सुरक्षा और न्याय के साहसिक दायित्व में प्रकृति से मिली है, जननायक लालू प्रसाद यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। #LaluPrasadYadav
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राममंदिर और भगवान के नाम पर जनता के करोड़ों रुपयों का चढ़ावा चोरी करने वाले लोग इतने शक्तिशाली हैं कि उनके बारे में भाजपा के सांसद रहे तथाकथित बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह भी सच बोलने कि हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, उनका कहना है कि - "अगर मै सच बोल दूँगा तो बहुत परेशानी में आ जाऊँगा, क्योंकि वह बहुत बड़े लोग हैं।" धर्म और भगवान के नाम पर चढ़ावा के करोड़ों रुपयों के चोरी के इस गोरख-धंधे में शामिल लोगों पर मुकदमा दर्ज कर कठोर से कठोर कार्यवाही सुनिश्चित हो। #Ayodhya #Rammandir #Rammandir
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उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में पुलिस चौकी के शिलान्यास कार्यक्रम की यह तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं कार्यक्रम में उच्च न्यायालय की न्यायाधीश मंजू रानी चौहान, जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार और पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में गैंगस्टर अवधराज सिंह 'पप्पू' का बैठे होना, जिन पर हत्या, हत्या के प्रयास समेत कुल 28 आपराधिक मामले दर्ज हों गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि कानून-व्यवस्था से जुड़े इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपित व्यक्तियों को प्रमुख स्थान मिलता है, तो यह व्यवस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। विडंबना यह भी है कि जिस पुलिस चौकी की स्थापना मंत्रोच्चार, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच की जा रही है, उसी चौकी का मूल उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध रोकना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यदि समाज में शांति, सुरक्षा और न्याय केवल कर्मकांडों, मंत्रों और धार्मिक अनुष्ठानों से ही स्थापित हो सकते हैं, तो फिर पुलिस चौकियों, थानों, अदालतों और प्रशासनिक संस्थाओं की आवश्यकता क्या रह जाती है? एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य में कानून का शासन संविधान, न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही से स्थापित होता है, न कि अंधविश्वास पाखण्ड आधारित धार्मिक आयोजनों से होता है। @mirzapurpolice @DM_MIRZAPUR
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राज्यसभा सांसद एवं आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर प्रयागराज के ADM (सिटी) सत्यम मिश्रा सहित संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस दिया है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि 1 जून 2026 को प्रयागराज सर्किट हाउस में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं की अनियमितताओं, परीक्षा रद्दीकरण, भर्ती में देरी और बेरोजगार युवाओं की समस्याओं को लेकर मिलने आए छात्र नेताओं और नागरिकों को प्रशासन द्वारा रोका गया इतना ही नहीं, छात्र नेताओं की गिरफ्तारी तक की गई, जिससे सांसद को जनता की शिकायतें सुनने और उन्हें संसद में उठाने से वंचित किया गया। संजय सिंह ने अपने नोटिस में कहा है कि किसी सांसद को जनता से मिलने, उनकी शिकायतें सुनने और उन्हें संसद तक पहुँचाने से रोकना न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि सांसद के संवैधानिक और संसदीय विशेषाधिकारों का भी उल्लंघन है। सवाल यह है कि यदि पेपर लीक प्रकरण व लेखपाल भर्ती, UPSI स्कोर कार्ड जारी करने की मांग हो या अन्य भर्तियों में हो रहे घोटाले हों इससे लाखों बेरोजगार युवा छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना और उनकी आवाज़ संसद तक पहुँचाने में भी प्रशासनिक बाधाएँ खड़ी की जाएँगी, तो लोकतंत्र में जनता अपनी बात किसके माध्यम से रखेगी? #Prayagraj
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"मोहन भागवत कौन है, क्या वो कोई PM, CM, HM, DM हैं, उनके पास एक चपरासी की भी नौकरी नहीं है किस हैसियत से एक प्राइवेट आदमी को Z सुरक्षा है?" डॉक्टर प्रियंका भारती प्रवक्ता राजद @priyanka2bharti
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लोकतंत्र केवल चुनावों का नाम नहीं है, बल्कि संविधान, कानून के शासन, नागरिक अधिकारों और संस्थागत जवाबदेही की वह व्यवस्था है जो राष्ट्र को मजबूत बनाती है जो लोग लोकतांत्रिक मूल्यों की अवहेलना करते हैं और संविधान से ऊपर सत्ता तथा व्यक्तियों को स्थापित करने का प्रयास करते हैं, वे देश और समाज दोनों के लिए घातक होते हैं। लोकतंत्र विरोधी प्रवृत्तियां सबसे पहले संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करती हैं जब पुलिस, प्रशासन और अन्य संस्थाएं निष्पक्ष होकर कानून का पालन करने के बजाय सत्ता को खुश करने का माध्यम बनने लगती हैं, तब नागरिकों का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था से उठने लगता है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और न्याय जैसे संवैधानिक अधिकार खतरे में पड़ जाते हैं तथा भय और दमन का वातावरण पैदा होता है। इसी संदर्भ में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर की गई तल्ख टिप्पणी अत्यंत महत्वपूर्ण है न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि राजनीतिक आकाओं को खुश करना संविधान और कानून के पालन से बड़ा लक्ष्य बन जाए, तो यह लोकतंत्र और विधि के शासन के लिए गंभीर खतरा है। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस कमिश्नर और कप्तान के पद किसी की निजी दुश्मनी निकालने या राजनीतिक हित साधने के साधन नहीं हो सकते। जब कानून का शासन कमजोर होता है, तब बुलेट और बुलडोजर नीति के तहत अवैध गिरफ्तारियां, चयनात्मक कार्रवाई, कठोर कानूनों के दुरुपयोग और भय के माहौल की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। लोकतंत्र में पुलिस का काम जनता में भरोसा पैदा करना होता है, न की दहशत पैदा करना। राज्य की शक्ति का उद्देश्य न्याय स्थापित करना है, न कि बुलेट और बुलडोजर के द्वारा नागरिकों को भयभीत करना है। भारत का संविधान किसी सरकार, दल या व्यक्ति से बड़ा है लोकतंत्र की रक्षा तभी संभव है जब पुलिस, प्रशासन, न्यायपालिका और अन्य संस्थाएं पूरी निष्पक्षता के साथ संविधान के प्रति अपनी निष्ठा निभाएं एक मजबूत राष्ट्र की पहचान बुलेट और बुलडोजर के भय और दमन से नहीं बल्कि न्याय, समानता, संवैधानिक मूल्यों और कानून के निष्पक्ष शासन से होता है। #बुलेट_और_बुलडोजर
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बसावन इंडिया retweeted
प्रतापगढ़ में सामंत और मनुवाद चरम सीमा पर है, थाना लालगंज अझारा जलेसरगंज में शीतला प्रसाद पटेल कुर्मी परिवार के ऊपर जानलेवा हमला हुआ, उनका घर राम कृष्ण द्विवेदी उर्फ पंडित द्विवेदी के गुर्गो ने अपने गुंडों के साथ शीतला पटेल का घर बुलडोजर से गिरा दिया, आज वो परिवार बेघर है,जान से मारना धमकी दी जा रही है, परिवार का आरोप है चार लोगों की गिरफ्तारी अभी भी नहीं हुई है , आज ये हाल है बहुजन परिवार प्रतापगढ़ में अपनी जान बचा रहा है, जिस कारण से मनुवादियों के हौसले बुलंद है, ये कही न कही अपराधियों की गुंडई की पराकाष्ठा का उदाहरण है , जबकि बीजेपी सरकार में कुर्मी समाज के कई विधायकों और मंत्रियों की लाइन लगी है, शर्मनाक , आप वीडियो देखिए पीड़ित परिवार कितना जख्मी है और सहमा है , पीड़ित परिवार कोई वकील मुकदमा लड़ने को तैयार नहीं है , @deepakbhuker प्रतापगढ़ SP आपसे उम्मीद है ध्यान दीजिए बहुजनो का ये हाल होगा @NationalDastak @DrJaihind @KanojiaPJ @_YogendraYadav @NationalJanmat @BasavanIndia @KotwalMeena @RahulGandhi @ManojYadavInc_ @yadavakhilesh @Uppolice @dgpup
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धम्म चक्र बौद्ध धर्म का सबसे प्राचीन और पवित्र प्रतीक है जिस प्रकार क्रॉस ईसाई धर्म का और डेविड का सितारा यहूदी धर्म का प्रतीक है, उसी प्रकार धम्म चक्र बौद्ध धर्म का प्रतिनिधित्व करता है। यह बौद्ध धर्म के आठ शुभ प्रतीकों में से एक है! भारतीय उपमहाद्वीप में चक्र का इतिहास अत्यंत प्राचीन है सिन्धु घाटी सभ्यता की मुहरों पर भी चक्र या पहिए के चिह्न मिलते हैं वहाँ प्रायः छह तीलियों वाले चक्र दिखाई देते हैं आगे चलकर बुद्ध ने अपनी शिक्षाओं के प्रतीक के रूप में आठ तीलियों वाले धम्म चक्र को अपनाया, जो आष्टांगिक मार्ग का प्रतिनिधित्व करता है, बाद में सम्राट अशोक ने 24 तीलियों वाले अशोक चक्र को शासन, न्याय और धम्म का प्रतीक बनाया, जो आज भारतीय तिरंगे के केंद्र में सुशोभित है। धम्म चक्र की यह यात्रा सिन्धु सभ्यता से बुद्ध और अशोक तक निरंतर दिखाई देती है यह केवल धर्म का नहीं, बल्कि ज्ञान, नैतिकता, प्रगति और जीवन की सतत गति का भी प्रतीक है सारनाथ में बुद्ध द्वारा दिए गए प्रथम उपदेश को “धम्म चक्र प्रवर्तन” कहा गया, क्योंकि वहीं से ज्ञान का यह चक्र गतिमान हुआ और बौद्ध धर्म विश्व के विशाल भूभाग तक पहुँचा। अब प्रश्न उठता है कि कृष्ण का चक्र “सुदर्शन” क्यों कहलाता है “सुदर्शन” का शाब्दिक अर्थ है सुन्दर दर्शन, अर्थात ऐसा दर्शन जो मन को आकर्षित करे और सत्य का बोध कराए ऐतिहासिक व्याख्याओं के अनुसार, सुदर्शन चक्र को युद्ध के अस्त्र के रूप में नहीं, बल्कि धर्म, ज्ञान और नैतिक व्यवस्था के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। क्या कोई हथियार देखने में सुंदर हो सकता है हथियार तो संहार और भय का प्रतीक होता है असल में, कृष्ण का “सुदर्शन चक्र” कोई घातक अस्त्र नहीं, बल्कि धम्म चक्र का ही सु-दर्शन है! इस तथ्य की पुष्टि सिक्कों के प्रमाण से भी होता है यवन राजा अगाथोक्लिस (190–180 ई.पू.) द्वारा जारी सिक्कों पर कथित वासुदेव कृष्ण के हाथ में धम्म चक्र अंकित है इस चक्र में वही आठ आरे बने हैं जो बुद्ध के धम्म चक्र में पाए जाते हैं। यह साफ संकेत है कि कथित कृष्ण का “सुदर्शन चक्र” वास्तव में बुद्ध के “धम्म चक्र” का रूपक है। बुद्ध का धम्म चक्र इतना सु-दर्शन था कि लोग उसकी ओर सहज ही खिंच जाते थे। उनके उपदेश, उनके विचार और उनका धम्म मार्ग ही “सुन्दर दर्शन” यानी सुदर्शन थे। कृष्ण का “सुदर्शन चक्र” वास्तव में बुद्ध का धम्म चक्र ही है यह हथियार नहीं, बल्कि ज्ञान और धर्म का चक्र है यह धम्म चक्र केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि विचारों की वह शक्ति है जिसने राजाओं को बदल दिया, समाजों को दिशा दी और करोड़ों लोगों को समानता, करुणा तथा विवेक का मार्ग दिखाया। #धम्म_चक्र #सुदर्शनचक्र
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक के नेतृत्व में उठ रही यह आवाज़ संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई का प्रतीक बन रही है। भारत एक बार फिर इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहाँ वंचित, पीड़ित, बेरोज़गार युवा, छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी पेपर लीक, भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अधिकारों की रक्षा और सम्मान के लिए एकजुट होकर आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। भारत में बढ़ती बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और तानाशाही सरकार के खिलाफ यह काकरोच युवा आंदोलन Gen Z युवाओं के एक नए लोकतांत्रिक उभार की शुरुआत है यह वह पीढ़ी है जो संविधान, समान अवसर और सामाजिक न्याय के पक्ष में एक नई जनचेतना का निर्माण कर रही है। #AbhijeetDipke #JantarMantar
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भाजपा योगी आदित्यनाथ के तथाकथित 'रामराज्य' में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के 'राष्ट्र के नाम संबोधन' के बाद अब फिरोजाबाद के ASP अनुज चौधरी का 'राष्ट्र के नाम सम्बोधन' व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो पर लोगों का कहना है ASP अनुज चौधरी का यह वक्तव्य किसी निष्पक्ष प्रशासनिक अधिकारी की बजाय मानो आरएसएस या भाजपा कार्यालय से तैयार की गई स्क्रिप्ट है। ASP अनुज चौधरी के द्वारा कोई यह पहला गैर संवैधानिक कार्य नहीं है इससे पहले भी वह लगातार एक हिन्दुत्त्ववादी सांप्रदायिक छवि बनाये हुए है एक लोकतांत्रिक देश में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से राजनीतिक एवं वैचारिक तटस्थता की अपेक्षा की जाती है ऐसे में यदि किसी अधिकारी के बयान से किसी विशेष विचारधारा या राजनीतिक दल के समर्थन का आभास होता है, तो यह प्रशासनिक निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। देश व प्रदेश के भाजपा शासित राज्यों में यह चलन अब आम हो गया है एक लोकतान्त्रिक देश में यह स्थिति उन आशंकाओं को भी बल देती है कि भारत की संस्थाएँ धीरे-धीरे लोकतांत्रिक संतुलन से हटकर सत्ता-केंद्रित व्यवस्था (चाटुकारिता) की ओर बढ़ रही हैं? #Firozabad #FirozabadPolice #UPPOLICE
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"इंडियन एक्सप्रेस के आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस की सरकार में पिछले 24 वर्षों में 13 बार और * बीजेपी सरकार के कुछ वर्षो में 23 बार महत्वपूर्ण एग्जाम में पेपर लीक हुए हैं. पेपर लीक करने में ज्यादातर लोग सवर्ण और उच्च वर्ग के लोग ही शामिल होते हैं ऐसा क्यों है?" प्रोफेसर विक्रम इलाहाबाद विश्वविद्यालय @ProfvikramAU
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गाज़ीपुर के कथित मुठभेड़ पर कमलेश बिंद के भाई संजय बिंद ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, 'यह कोई एनकाउंटर नहीं, बल्कि मेरे भाई की हत्या है। यदि वह दोषी था, तो उसे कानून के अनुसार अदालत सजा देती, लेकिन पुलिस ने न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर रामगढ़ से लाकर आरोपी कमलेश बिन्द की जान ले ली, संजय बिंद ने आरोप लगाया कि उनके भाई को OBC समुदाय से होने के कारण पुलिस और प्रशासन द्वारा निशाना बनाया गया, जबकि इस मामले का मुख्य आरोपी शकर पांडेय अब भी फरार है उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन मुख्य आरोपी पर कार्यवाही करने की बजाय उनके भाई की हत्या कर दिया संजय बिन्द ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। #Ghazipur
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बिहार के पटना में भाजपा सरकार द्वारा कथित फर्जी मुकदमे में गिरफ्तार किए गए रौशन आनंद यादव के समर्थन में छात्रों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों युवा छात्रों ने सड़कों पर उतरकर रौशन आनंद के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे पूरे पटना का प्रशासनिक तंत्र हिल गया छात्रों ने रौशन आनंद यादव की रिहाई की मांग करते हुए युवाओं की इस हुंकार को अन्याय के खिलाफ युवाओं की आवाज़ बताया। #Bihar #Patana
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गाज़ीपुर में विनीत राय हत्याकांड के आरोपी बताए गए कमलेश बिंद की कथित मुठभेड़ में मौत के बाद उनकी पत्नी मनीषा निषाद की दर्दभरी कहानी चर्चा में है शादी को अभी महज़ 37 दिन ही हुए थे, हाथों की मेहंदी भी पूरी तरह फीकी नहीं पड़ी थी कि उनका सुहाग उजड़ गया। मनीषा का आरोप है कि कमलेश को रामपुर से उठाकर गाज़ीपुर लाया गया और बाद में फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया इन आरोपों की सच्चाई क्या है, यह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही सामने आ सकेगा। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर कानून, न्याय और पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। #बुलेट_और_बुलडोजर
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गाज़ीपुर विनीत राय हत्याकांड का मुख्य आरोपी शंकर पांडेय अभी तक फरार है मुख्य आरोपी को संरक्षण देने वाले कौन लोग हैं पीड़ित परिवार और गाज़ीपुर की जनता पूछ रही है शंकर पाण्डेय और उनको संरक्षण देने वालों पर बुलेट और बुलडोजर की कार्यवाही कब होगी? जब सरकार अपराध और अपराधी के खिलाफ "बुलेट और बुलडोजर" की नीति का दावा करती है, तब यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि कानून का शिकंजा सभी आरोपियों पर समान रूप से कसे, चाहे उनका सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक प्रभाव कितना भी बड़ा क्यों न हो। जनता जानना चाहती है कि विनीत राय हत्याकांड के मुख्य आरोपी शंकर पाण्डेय को संरक्षण देने वाले लोगों पर निष्पक्ष कार्यवाही कब करेगी बुलेट और बुलडोजर न्याय का नहीं आतंक का पर्याय है! #बुलेट_और_बुलडोजर
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