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Dalit Times | दलित टाइम्स retweeted
सोशल मीडिया पर एक ओर पार्टी की एंट्री हुई है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने 'इश्क करो पार्टी' के गठन का ऐलान किया है। पार्टी का नारा 'नफरत छोड़ो, इश्क करो' रखा गया है। उन्होंने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को भी पार्टी से जुड़ने का न्योता दिया है #IshqKaroParty
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बसपा की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक आज. संगठन विस्तार पर रहेगा फोकस लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक आज लखनऊ में आयोजित होगी। बैठक में बसपा सुप्रीमो मायावती, राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद और वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार बैठक में संगठन विस्तार, आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत बनाने की रणनीति पर चर्चा होगी। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने और भाईचारा अभियान को प्रभावी बनाने के मुद्दों पर भी मंथन किया जाएगा। बताया जा रहा है कि प्रदेश इकाइयों की कार्यप्रणाली, संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों की समीक्षा भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। विधानसभा चुनावों से पहले होने वाली इस बैठक को बसपा की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। #BSP #Mayawati #AkashAnand #SatishChandraMishra #Lucknow
बहुजन समाज पार्टी की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक आज लखनऊ में आयोजित होगी। बैठक में बसपा सुप्रीमो मायावती, राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद और वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। #BSP #mayawati #akashanand #Lucknow #up
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एक महीने में 5 बड़ी घटनाएं, लेकिन चुप्पी क्यों? रामपुर, मुक्तसर, कुरुक्षेत्र, हांसी और देवरिया की घटनाओं का हवाला देकर सामाजिक कार्यकर्ता @SurajKrBauddh ने दलित नेताओं की भूमिका पर उठाए प्रश्न। दलित अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता सूरज कुमार बौद्ध ने हाल में विभिन्न राज्यों में सामने आई दलित उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर दलित नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि एक महीने के भीतर दलित समाज के खिलाफ कई गंभीर घटनाएं सामने आईं, लेकिन इन मामलों में समुदाय के प्रमुख नेताओं की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली। अपने पोस्ट में सूरज बौद्ध ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा की उन घटनाओं का जिक्र किया जिनमें दलित समुदाय के लोगों के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म, मारपीट और सार्वजनिक अपमान जैसी घटनाएं सामने आईं। उन्होंने रामपुर, मुक्तसर, कुरुक्षेत्र, हांसी और देवरिया की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये मामले केवल आपराधिक घटनाएं नहीं हैं, बल्कि समाज में मौजूद जातिगत भेदभाव और हिंसा की गंभीर तस्वीर भी पेश करते हैं। सूरज बौद्ध ने आरोप लगाया कि इन मामलों में दलित समुदाय के किसी भी प्रमुख नेता ने खुलकर आवाज नहीं उठाई। उन्होंने लिखा कि समाज के अधिकांश नेताओं को लगता है कि दलित समाज उनके साथ बना रहेगा, इसलिए वे ऐसे मामलों पर सक्रिय हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस नहीं करते। अपने पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि कई नेता अन्य समुदायों से जुड़े मुद्दों पर लगातार बयान देते हैं, लेकिन जब दलित समाज के लोगों के साथ अत्याचार की घटनाएं होती हैं तो उनकी प्रतिक्रिया दिखाई नहीं देती। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इन घटनाओं पर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक आवाज क्यों नहीं सुनाई दी। सूरज बौद्ध का यह पोस्ट दलित समाज के नेतृत्व, उसकी प्राथमिकताओं और अत्याचार के मामलों में उसकी भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े करता है। #socialjustice #castediscrimination #DalitLivesMatter #castviolence
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भारत में ‘Gen-Z’ संभव नहीं, भारतीय युवा एक समान नहीं हैं: प्रो. विवेक कुमार @VivekkumarProf नई दिल्ली। प्रख्यात समाजशास्त्री प्रो. विवेक कुमार ने कहा है कि भारत में पश्चिमी देशों की तरह एक समान “Gen-Z” की अवधारणा लागू नहीं होती, क्योंकि भारतीय युवा सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से एक जैसे नहीं हैं। उनके अनुसार भारत के युवाओं को मोटे तौर पर छह वर्गों में देखा जा सकता है—ग्रामीण युवा, शहरी युवा, महानगरीय/पश्चिमी प्रभाव वाले युवा, वैश्वीकृत युवा, दलित-आदिवासी एवं अल्पसंख्यक युवा तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों में सक्रिय युवा। प्रो. कुमार का कहना है कि जाति, वर्ग, क्षेत्र, भाषा और अवसरों की असमानता भारतीय युवाओं के अनुभवों को एक-दूसरे से अलग बनाती है। ऐसे में पूरे देश के युवाओं को एक ही सामाजिक पहचान के दायरे में रखना वास्तविकता से दूर है। उन्होंने विशेष रूप से दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक युवाओं की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सम्मान, समान अवसर और सामाजिक न्याय के प्रश्न आज भी उनके जीवन को प्रभावित करते हैं। प्रो. विवेक कुमार के अनुसार जब तक युवाओं के बीच समानता, न्याय, अवसर और सम्मान की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक भारत में एक समान “Gen-Z” की अवधारणा केवल कल्पना बनी रहेगी। 📌 आप प्रो. विवेक कुमार की इस राय से कितना सहमत हैं? अपनी राय कमेंट में बताएं। #ProfVivekKumar #GenZIndia #IndianYouth #DalitTimes #TheEqualGround
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पंजाब के 5 प्रमुख मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पंजाब के पांच प्रमुख धार्मिक स्थलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। जानकारी के अनुसार दुर्ग्याना मंदिर (अमृतसर), काली देवी मंदिर (पटियाला), देवी तालाब मंदिर (जालंधर), मैसरखाना मंदिर (बठिंडा) और मुक्तेश्वर मंदिर (पठानकोट) को निशाना बनाने संबंधी धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ। धमकी मिलने के बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने संबंधित मंदिर परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया गया तथा संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई। प्रारंभिक जांच में ई-मेल के स्रोत और उसके पीछे की मंशा का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए गए हैं और जांच जारी है। #PunjabNews #BreakingNews #PunjabPolice #TempleSecurity #theequalground
पंजाब के 5 प्रमुख मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी दुर्ग्याना, काली देवी, देवी तालाब, मैसरखाना और मुक्तेश्वर मंदिर की सुरक्षा बढ़ाई गई, जांच में जुटीं एजेंसियां। #PunjabNews #BreakingNews #PunjabPolice #TempleSecurity #theequalground
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Dalit Times | दलित टाइम्स retweeted
Pride Month के अवसर पर वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने LGBTQ समुदाय के समर्थन में संदेश जारी किया है। पार्टी ने कहा कि Pride केवल उत्सव नहीं, बल्कि समानता, कानूनी मान्यता, गरिमा और आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग का प्रतीक है। #PrakashAmbedkar #VBA #PrideMonth #LGBTQ #SocialJustice
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Dalit Times | दलित टाइम्स retweeted
Pride Month के अवसर पर कांग्रेस ने LGBTQ समुदाय के साथ एकजुटता जताई Pride Month पूरी दुनिया में हर वर्ष जून के महीने में मनाया जाता है, इसका उद्देश्य LGBTQIA समुदाय की समानता, समावेश और गरिमापूर्ण जीवन की लड़ाई को रेखांकित करना है। #Congress #PrideMonth #LGBTQ #Equality
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“मैं दलित हूं, इसलिए बंगला खाली नहीं हो रहा” - मंत्री नंदकिशोर राम के बयान से बिहार की राजनीति में नया विवाद राबड़ी देवी के सरकारी आवास विवाद ने लिया जातीय मोड़, मंत्री ने लगाया भेदभाव का आरोप; राजद ने कहा- यह मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश पटना। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास विवाद ने अब जातीय और राजनीतिक रंग ले लिया है। बिहार सरकार में मंत्री नंदकिशोर राम ने आरोप लगाया है कि उन्हें आवंटित सरकारी आवास इसलिए नहीं मिल पा रहा क्योंकि वह दलित समाज से आते हैं। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। नंदकिशोर राम ने कहा कि 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला उन्हें आवंटित किया जा चुका है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी अब तक उसे खाली नहीं कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि वह दलित समाज से नहीं होते तो अब तक आवास खाली करा दिया गया होता। मंत्री का यह बयान सामने आते ही मामला केवल सरकारी आवास के विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जातीय प्रतिनिधित्व और भेदभाव की बहस भी शुरू हो गई। दरअसल, बिहार सरकार ने 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास नंदकिशोर राम को आवंटित किया है। वहीं राबड़ी देवी को वैकल्पिक सरकारी आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके बावजूद पुराने आवास को खाली न किए जाने को लेकर भवन निर्माण विभाग कई नोटिस जारी कर चुका है। मंत्री नंदकिशोर राम के बयान के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने आ गए हैं। राजद नेताओं का कहना है कि यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया का है और इसे जातीय रंग देकर मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। वहीं एनडीए नेताओं का कहना है कि सरकारी नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए और आवंटित आवास संबंधित मंत्री को सौंपा जाना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में जहां जातीय समीकरण हमेशा राजनीति के केंद्र में रहे हैं, वहां नंदकिशोर राम का यह बयान आने वाले दिनों में और बड़ी राजनीतिक बहस का कारण बन सकता है। खासकर ऐसे समय में जब राज्य में सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और दलित राजनीति से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। फिलहाल विवाद का केंद्र 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा अब इस बात पर भी हो रही है कि क्या यह सिर्फ आवास का मामला है या फिर बिहार की राजनीति में जाति का सवाल एक बार फिर केंद्र में आ गया है। #NandKishorRam #RabriDevi #DalitPolitics #BiharPolitics #SocialJustice
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दीक्षाभूमि ट्रस्ट विवाद पहुंचा हाई कोर्ट, प्रशासनिक अधिकारों को लेकर सुनवाई शुरू ट्रस्ट अध्यक्ष की याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी पक्षों से मांगा जवाब, 10 जून तक जवाब दाखिल करने के निर्देश नागपुर स्थित दीक्षाभूमि का संचालन करने वाले डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मेमोरियल कमेटी ट्रस्ट के भीतर प्रशासनिक और कार्यकारी अधिकारों को लेकर चल रहा विवाद अब बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ तक पहुंच गया है। ट्रस्ट अध्यक्ष भंते आर्य नागार्जुन सुरई ससाई द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में ट्रस्ट के प्रशासनिक नियंत्रण और अधिकारों की व्याख्या को लेकर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार बैठकों का संचालन, प्रशासनिक निर्णय लेने और दैनिक कार्यों की निगरानी का अधिकार अध्यक्ष के पास होना चाहिए। वहीं, अधिकारों की अलग-अलग व्याख्या के कारण ट्रस्ट के कामकाज को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए 10 जून तक जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित प्राधिकरण कानून के दायरे में अपनी कार्यवाही जारी रख सकते हैं। दीक्षाभूमि देश के प्रमुख ऐतिहासिक और सामाजिक स्थलों में से एक है। 14 अक्टूबर 1956 को इसी स्थान पर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अपने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। इसके बाद से यह स्थल आंबेडकरवादी आंदोलन और नवयान बौद्ध समुदाय का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस बीच, दीक्षाभूमि के पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) से जुड़ी परियोजनाएं भी अलग कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण चर्चा में हैं। ऐसे में ट्रस्ट के भीतर उत्पन्न यह विवाद दीक्षाभूमि के प्रशासन और भविष्य की योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई और पक्षकारों के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं। अदालत के समक्ष 10 जून को मामले की अगली सुनवाई प्रस्तावित है। #Deekshabhoomi #DrBRAmbedkar #Ambedkarite #BahujanNews #nagpur
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“दिल से BSP, फिर से BSP” बसपा ने तेज की 2027 चुनाव की तैयारी देखिये पूरी ख़बर @_TheEqualGround 👇 उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता अब जमीनी स्तर पर सक्रिय दिखाई देने लगे हैं। आगरा में बसपा समर्थकों द्वारा दीवारों पर नारे लिखकर प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में बड़े अक्षरों में लिखा नजर आ रहा है “समाज के दलालों को भगाना है, 2027 में बहन कुमारी मायावती को जीताना है।" इसके साथ ही “जय भीम जय भारत” और “दिल से BSP, फिर से BSP” जैसे नारे भी दीवारों पर लिखे गए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह अभियान बहुजन समाज के बीच पार्टी को दोबारा मजबूत करने और संगठन को सक्रिय करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार बसपा अब 2027 चुनावों के लिए बूथ स्तर पर तैयारी शुरू कर चुकी है। आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में ऐसे नारे और दीवार लेखन चर्चा का विषय बने हुए हैं। बसपा समर्थकों का दावा है कि पार्टी फिर से गांव, कस्बों और शहरों में अपने जनाधार को मजबूत करने पर फोकस कर रही है। वहीं प्रदेश की राजनीति में इसे आने वाले चुनावों की तैयारी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। #BSP #Mayawati #BahujanSamajParty #UPPolitics #JaiBhim @Mayawati @AnandAkash_BSP @ramjigautambsp @bspindia @Bsp4u
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“कॉकरोच” टिप्पणी पर घिरे CJI सूर्या कांत, बेरोज़गार युवाओं और एक्टिविस्ट्स को लेकर बयान पर विवाद पढ़िये पूरी ख़बर @_TheEqualGround 👇 भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्या कांत की एक टिप्पणी को लेकर देशभर में विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने कुछ बेरोज़गार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” से करते हुए कहा कि ऐसे लोग बाद में मीडिया, सोशल मीडिया, RTI एक्टिविस्ट और अन्य एक्टिविस्ट बनकर “हर किसी को निशाना” बनाने लगते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार यह टिप्पणी उस समय की गई, जब CJI सूर्या कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की बेंच एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) का दर्जा दिए जाने से जुड़ी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के सोशल मीडिया व्यवहार और पेशेवर आचरण पर नाराज़गी जताई। सुनवाई के दौरान CJI सूर्या कांत ने कहा: “कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें न तो रोजगार मिलता है और न ही किसी क्षेत्र में कोई पहचान मिल पाती है। उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया, RTI कार्यकर्ता और दूसरे एक्टिविस्ट बन जाते हैं, और फिर हर किसी को निशाना बनाना शुरू कर देते हैं।” इसी दौरान अदालत ने “परजीवी” (Parasites) शब्द का भी इस्तेमाल किया और कहा कि समाज में पहले से ऐसे लोग मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं। यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे बेरोज़गार युवाओं, मीडिया और RTI कार्यकर्ताओं के प्रति अपमानजनक बताया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि अदालत की टिप्पणी एक विशेष मामले और संदर्भ में की गई थी। #CJISuryaKant #SupremeCourt #RTIActivists #SocialMedia #unemloyment
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Dalit Times | दलित टाइम्स retweeted
SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या का CPI ने किया विरोध, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा बोले: “निजी जगह पर हुआ जातीय उत्पीड़न भी अपराध है” पढ़िये पूरी ख़बर 👇 facebook.com/share/1KzvxcnvM… #SCSTAct #communist #supremecourtofindia
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SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के खिलाफ चंद्रशेखर आज़ाद का सवाल: “क्या अब दलितों का अपमान लोकेशन देखकर तय होगा?” पढ़िये पूरी ख़बर -@_TheEqualGround 👇 नगीना से सांसद और आज़ाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट की हालिया व्याख्याओं पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बार-बार न्यायिक व्याख्याओं के जरिए इस कानून के दायरे को सीमित किया जा रहा है, जिससे दलितों और आदिवासियों को न्याय मिलने में और कठिनाई पैदा हो सकती है। चंद्रशेखर आज़ाद का बयान उस फैसले के बाद आया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कथित जातिसूचक गाली किसी निजी स्थान पर दी गई हो और वह “public view” में न हो, तो हर मामले में SC/ST एक्ट की धाराएँ स्वतः लागू नहीं होंगी। अपने X पोस्ट में आज़ाद ने सवाल उठाया कि क्या अब जातीय अपमान का अपराध “लोकेशन” और “माध्यम” देखकर तय किया जाएगा? उन्होंने कहा कि अगर घर के भीतर, फोन पर या निजी स्थानों में जातिसूचक अपमान होता है, तो उसे अपराध न मानना सामाजिक न्याय की मूल भावना के खिलाफ होगा। उन्होंने यह भी कहा कि दलित उत्पीड़न केवल सार्वजनिक जगहों तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी स्थानों, कार्यस्थलों और सामाजिक संबंधों में भी होता है। ऐसे में कानून की ऐसी व्याख्या पीड़ितों को कमजोर कर सकती है। चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की दिशा में कदम उठाएगी। इससे पहले भी वे SC/ST अधिकारों, आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं। #SCSTAct #ChandraShekharAzad #DalitRights #SocialJustice
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भारत में जातिवाद सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं है, इसका असर खेल, शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसरों तक में दिखाई देता है। अंकित बैयनपुरिया का बयान उसी सच्चाई को सामने लाता है। देखिये पूरी ख़बर - @_TheEqualGround 👇 youtube.com/shorts/3X4c7znNe… @baiyanpuria
हरियाणा के पहलवान अंकित बैयनपुरिया ने सुनाई जातिगत भेदभाव की कहानी PM मोदी के साथ मंच साझा कर चुके फिटनेस इन्फ्लुएंसर बोले, अखाड़ों में जाने से पहले पूछी जाती थी CASTE, कई बार जानबूझकर पहुंचाई गई चोट देखिये पूरी खबर 👇 youtube.com/shorts/3X4c7znNe… #AnkitBaiyanpuria
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क्या आज भी इस देश में एक घूंट पानी इंसान की जाति देखकर तय किया जाएगा? पढ़िये पूरी ख़बर 👇 facebook.com/share/p/1CQ1ih4… #dalitlivesmatter #castediscrimination #socialjustice

उत्तराखंड में दलित भाइयों पर हमला, “पानी पीने” को लेकर विवाद का आरोप, शादी समारोह के दौरान दलित युवकों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। शादी में DJ चला रहे युवक ने पानी पी लिया, जिसके बाद जातिसूचक गालियां देते हुए हमला किया गया। पढ़िये पूरी खबर 👇 facebook.com/share/p/1CQ1ih4…
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बंद कमरे में जातिसूचक टिप्पणी SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं? सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर देशभर में बहस तेज Follow कीजिये 👉 @_TheEqualGround सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कथित जातिसूचक गाली किसी बंद कमरे या निजी घर के भीतर दी गई हो और वह “public view” यानी सार्वजनिक नजर में न हुई हो, तो इसे स्वतः SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) लागू होने के लिए घटना का “public view” में होना जरूरी है। यानी ऐसी जगह, जहां आम लोग मौजूद हों या घटना को देख-सुन सकें। यह मामला दिल्ली के एक पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि घर के अंदर जातिसूचक शब्द कहे गए। निचली अदालत और हाई कोर्ट ने आरोप तय कर दिए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें रद्द करते हुए कहा कि निजी कमरे में हुई घटना, बिना सार्वजनिक मौजूदगी के, SC/ST एक्ट की आवश्यक शर्त पूरी नहीं करती। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हर निजी जगह स्वतः कानून के दायरे से बाहर नहीं होगी। यदि किसी निजी स्थान पर भी कई लोग मौजूद हों और घटना सार्वजनिक रूप से देखी या सुनी जा सके, तो SC/ST एक्ट लागू हो सकता है। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया से लेकर कानूनी हलकों तक बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे कानून की “स्पष्ट व्याख्या” बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष आशंका जता रहा है कि इससे जातीय उत्पीड़न के मामलों में शिकायत दर्ज कराना और कठिन हो सकता है। #SupremeCourt #SCSTAct #DalitRights #SocialJustice #dalitlivesmatter
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यूपी की कानून-व्यवस्था पर बहन जी का बड़ा हमला, सर्वसमाज को सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी - बसपा सुप्रीमो उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। बसपा सुप्रीमो Mayawati ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि प्रदेश में ब्राह्मण समाज केवल उपेक्षित ही नहीं, बल्कि काफी असुरक्षित भी महसूस कर रहा है। बहन जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूपी में हाल ही में मंत्रिमंडल विस्तार हुआ है और 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। मायावती जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने विस्तृत बयान में कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार किसी भी सत्ताधारी दल का आंतरिक मामला हो सकता है, लेकिन जनता को उसका सकारात्मक असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार का असली काम केवल राजनीतिक संतुलन बनाना नहीं, बल्कि गरीबों, मजदूरों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और कमजोर तबकों को सुरक्षा, सम्मान और न्याय देना है। अगर जनता को राहत और सुरक्षा महसूस नहीं होती, तो लोग ऐसे विस्तार को केवल राजनीतिक जुगाड़ और सरकारी संसाधनों पर बढ़ता बोझ मानते हैं। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि किसी भी सरकार और उसके मंत्रियों की पहली संवैधानिक जिम्मेदारी समाज के हर वर्ग की जान-माल और सम्मान की रक्षा करना होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में यूपी में कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और कमजोर वर्गों के साथ-साथ अब सर्वसमाज के भीतर भी असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। बहन जी ने हाल ही में राजधानी लखनऊ में ब्राह्मण समाज से जुड़े भाजपा के एक युवा नेता पर हुए जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा। उन्होंने इसे “अति चिंताजनक” स्थिति बताया और कहा कि समाज के किसी भी वर्ग में डर और असुरक्षा की भावना लोकतंत्र और सुशासन के लिए अच्छा संकेत नहीं है। मायावती जी ने अपने शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि बसपा सरकारों में “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की नीति के तहत समाज के हर वर्ग को न्याय और सुरक्षा देने का काम किया गया था। उन्होंने दावा किया कि बसपा शासन में कानून-व्यवस्था मजबूत थी और दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, ब्राह्मण सहित सर्वसमाज को बराबरी का सम्मान और सुरक्षा मिली थी। बहन जी ने यह भी संकेत दिया कि आज प्रदेश में सामाजिक संतुलन और भरोसे का माहौल कमजोर पड़ता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा एक बार फिर सामाजिक न्याय, कानून-व्यवस्था और सर्वसमाज की सुरक्षा के मुद्दे को मजबूती से उठाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। खास तौर पर दलित-ब्राह्मण सामाजिक समीकरण को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। 2007 में बसपा को पूर्ण बहुमत दिलाने में इसी सामाजिक गठजोड़ की बड़ी भूमिका मानी जाती है। बहन जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूपी में जातीय और सामाजिक समीकरणों को लेकर सभी दल सक्रिय हैं। ऐसे में मायावती जी द्वारा ब्राह्मण समाज की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाना आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। #Mayawati #BSP #DalitLivesMatters #UPPolitics #SocialJustice
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लखनऊ के अंबेडकर पार्क में रोज शाम 7:30 बजे दिखाया जा रहा लेजर लाइट शो Follow कीजिये 👇 @_TheEqualGround News लखनऊ के गोमतीनगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में लेजर लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत कर दी गई है। यह शो रोजाना शाम 7:30 बजे आयोजित किया जा रहा है और इसकी अवधि करीब 30 मिनट बताई जा रही है। इस हाईटेक शो में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन, संघर्ष, संविधान निर्माण और सामाजिक न्याय की लड़ाई को लेजर प्रोजेक्शन, विजुअल इफेक्ट्स और साउंड तकनीक के जरिए प्रदर्शित किया जा रहा है। शो में Hindu Code Bill और महिला अधिकारों से जुड़े उनके प्रयासों को भी शामिल किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने तैयार कराया है। पार्क में एंट्री के लिए टिकट व्यवस्था लागू है और लेजर शो शुरू होने के बाद यहां शाम के समय लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में पार्क का एंट्री टिकट 40 रुपये बताए जाने का भी उल्लेख है। अंबेडकर पार्क पहले से ही लखनऊ के प्रमुख पर्यटन और सामाजिक स्थलों में गिना जाता है, लेकिन लेजर शो शुरू होने के बाद यह नई पीढ़ी के बीच भी चर्चा का केंद्र बन गया है। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। #AmbedkarPark #Lucknow #BabasahebAmbedkar #LaserShow #LucknowNews #DrBRAmbedkar #SocialJustice #DalitHistory #ConstitutionOfIndia #HinduCodeBill
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