🛕 सोमनाथ मंदिर में राहुल गांधी ने खुद को बताया था गैर-हिंदू।
राहुल गांधी की गैर-हिंदू की तरह एंट्री की गई है। एक बार फिर से बता दें, इस वक्त की यह बड़ी खबर है। राहुल गांधी के सोमनाथ मंदिर जाने पर विवाद हो गया है।
सोमनाथ के रजिस्टर में राहुल ने खुद को गैर-हिंदू लिखा है। सोमनाथ मंदिर में एक नियम है कि जो गैर-हिंदू होते हैं,
वहां उनको प्रवेश करने से पहले इजाजत लेनी पड़ती है। तो उसी के तहत राहुल गांधी और अहमद पटेल, इन दोनों ने ही सिग्नेचर किए।
इन दोनों ने अपने-अपने को डिक्लेयर किया कि वे नॉन-हिंदू हैं और उसके बाद उनको इजाजत दी गई। उसके बाद उन्होंने दर्शन किए हैं। इसकी तस्दीक भी उन सिग्नेचर्स से की जा रही है जो आप देख रहे हैं। बाकायदा यहां के पुजारियों ने कन्फर्म किया कि यह तस्वीर और यह जो सिग्नेचर आए हैं, ये असली हैं।
उन्होंने समझाया कि हां, ये सिग्नेचर सही हैं और चूंकि नॉन-हिंदू हैं, इसलिए उन्होंने ये सिग्नेचर किए हैं। उसके बाद जाकर उन्होंने दर्शन किए हैं और विजिटर बुक में बाकायदा एंट्री भी की।
पूरे मामले को लेकर अब यह जो विवाद उठा है, जैसे कि मंदिर की विजिटर बुक में आपने बताया कि राहुल की गैर-हिंदू की तरह एंट्री का यह पूरा मामला है, इस बारे में क्या रिएक्शन अभी तक सामने आए हैं?
लेकिन रिएक्शन सीधा सा यह है कि बीजेपी से जुड़े लोग इन सिग्नेचर्स को तमाम जगहों पर पहुंचा रहे हैं। अलग-अलग मीडिया ग्रुप्स, समर्थकों के पास। उनका यह कहना है कि राहुल गांधी इस बात को छुपाते क्यों हैं? 🤔
अगर वे नॉन-हिंदू हैं, तो सोमनाथ मंदिर सभी के लिए खुला है, लेकिन एक नियम यह है कि गैर-हिंदू को इजाजत लेनी पड़ती है। और यह नियम वहां ट्रस्ट ने सिक्योरिटी कंसर्न्स के चलते लागू किया था।
कुछ साल पहले से ही वे यह सवाल उठा रहे हैं। बीजेपी से जुड़े लोग पूछ रहे हैं कि राहुल यह बात छुपा क्यों रहे हैं?
यह बात उनको जाहिर करनी चाहिए थी। और चूंकि चुनाव का मौका है, इसलिए छोटी-छोटी बातों को भी तूल दिया जा रहा है, एक नए तरीके से। तो अब यह भी एक बड़ा विवाद का मसला बनता जा रहा है। 🗳️
राहुल के मंदिर जाने को लेकर तो पहले से ही विवाद कई दिनों से चला आ रहा है। बिल्कुल देखिए, वह एक अलग मसला है। वहां पर तो सवाल उठ रहे थे कि राहुल गांधी "सॉफ्ट हिंदुत्व" की ओर बढ़ रहे हैं।
लेकिन अब यह बात सामने आ गई कि जो बात छिपाई जा रही थी, सोमनाथ जाकर वह बात साबित हो गई।
एक बात और है, जो आज से पहले भी लोग बताते आए थे, लेकिन ट्रस्ट का यह नियम नहीं था।
यह नियम अभी दो-तीन साल पहले लागू किया गया है, सिक्योरिटी कंसर्न्स के चलते।
🙏 अब सिर्फ शुक्रिया। फिलहाल पूरी जानकारी के लिए।