सचिन भाई, जिस विषय में ज्यादा कुछ जानकारी ना हो तो मुंह नहीं खोलना चाहिए।
भयंकर गरमी है, जानलेवा उमस है, ऐसे में किसी सस्पेक्ट को अगर किसी IO ने थाने के जेल में डिटेन किया है तो, सबसे पहले उसकी सुरक्षा जरूरी है।
अगर किसी कारण से वो बेहोश हो जाए तो जाँच अधिकारी के टे,, मुंह को आ जायेगा, साथ हीं उसके सुरक्षा में तैनात कर्मी भी नपेंगे।
सस्पेक्ट को जब पकड़कर थाने में लाकर जैसे हीं सलाखों के पीछे डाला जाता है, एकाएक उसका हार्टबीट कई गुना बढ़ जाता है. और उनका तो ज्यादा, जो कभी सपने में भी थाना जेल नहीं देखा है।
रोजाना मेडिकल होता है बाकायदा सरकारी अस्पताल में, डॉक्टर प्रमाण पत्र देता है. उससमय कैदी से पूछते हैं डॉक्टर की क्या तकलीफ है,, अगर उसे सांस लेने या अस्थमा की दिक्क़त है तो डॉक्टर के सलाह पर हवा उपलब्ध किया जाता है।
पेशी में अगर कैदी ने जज को बोल दिया कि हमें जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है ताकि मैं जाँच अधिकारी की बातें मान उनके बनाये स्टेटमेंट पर sign कर दूँ, तो जज बड़े से बड़े जाँच अधिकारी की खड़े खड़े पैंट उतार देता है कोर्ट में।
कस्टोडियल डेथ बहुत खराब माना जाता है.
कई अधिकारी नप गए इसमें.. इसलिए कैदी की सुरक्षा जरूरी है।
पुलिस स्टेशन के लॉकअप में बंद सभी लोगों की तरफ से बिहार सरकार का धन्यवाद !!
📍थाना महुआ, बिहार