हाईकोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर सिस्टम की दोहरी नीति को उजागर कर दिया है। सवाल सीधा है—अगर नई पेंशन स्कीम इतनी ही बेहतर है, तो उसे सांसदों और विधायकों पर क्यों लागू नहीं किया जाता? जब फैसले लेने वाले खुद उससे दूर हैं, तो कर्मचारियों पर इसे थोपना कितना न्यायसंगत है?