पहली बार देख रही हूं कि मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों को सरकार दिल्ली से मुंबई तक प्रोटेक्शन दे रही है।
मतलब जो लोग किसानों के ऊपर ट्रैक्टर चलवा देते हों, हक के लिए आवाज उठाने पर UAPA लगाकर सालों जेल में डाल देते हों, Stan swami के साथ क्या हुआ ये तो हम सभी जानते ही हैं, उमर खालिद , शरजील इमाम , संजीव भट्ट जैसे लोग आज भी सलाखों के अंदर हैं...ऐसे में अभिजीत दीपके को VIP ट्रीटमेंट मिलना मतलब कुछ तो गड़बड़ है?
अभिजीत का आंदोलन के नाम पर पार्टी बनाना और अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की मांग से आगे बढ़ कर सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाने की माँग मतलब आपदा में अवसर वाली बात साबित हो रही है।
क्या यह वास्तव में व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन है, या फिर सत्ता पक्ष द्वारा फिर से वही पुराना खेल?
मतलब पक्ष भी अपना और विपक्ष भी!